पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

शिशुओं का कैसे होगा उपचार:5 बाल रोग विशेषज्ञ की जगह एक, ओपीडी तो दूर एसएनसीयू ही संभालना हो रहा मुश्किल

कैथलएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
कैथल| बाल रोग विशेषज्ञ के आने का इंतजार करते अभिभावक। - Dainik Bhaskar
कैथल| बाल रोग विशेषज्ञ के आने का इंतजार करते अभिभावक।
  • जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों के खाली पड़े पद, अभिभावकों को बच्चों के उपचार के बिना लौटना पड़ रहा

सिविल अस्पताल में नवजातों को समय पर उपचार मुहैया नहीं हो पा रहा है। इसका कारण बाल रोग विशेषज्ञों का उपलब्ध न हो पाना है। परिणाम ये है कि बाल रोग विशेषज्ञ के न हो पाने के कारण रोजाना अनेक अभिभावकों को अस्पताल से बच्चों के उपचार के बिना ही बैरंग लौटना पड़ रहा है। ये समस्या लंबे समय से बनी हुई है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इसके समाधान के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

सिविल अस्पताल में इन दिनों 5 बाल रोग विशेषज्ञों की डिमांड है। हालांकि बाल रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत पद 3 हैं। लेकिन अस्पताल में फिलहाल एक ही बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध है। रोजाना 100 से ज्यादा बच्चों की ओपीडी, एसएनआईसीयू (न्यूनेटल इंटेसिव केयर यूनिट) व जरनल वार्ड में बच्चों को चेकअप समय से कर पाना एक बाल रोग विशेषज्ञ पर भारी पड़ रहा है।

इसके चलते अनेक अभिभावक ऐसे हैं जो बच्चों का सरकारी अस्पताल में चाहकर भी उपचार नहीं करवा पा रहे हैं। एसएनआईसीयू को ही चाहिए 4 बाल रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल में एसएनआईसीयू के लिए 4 बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत है। कमजोर व समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों को ही एसएनआईसीयू में रखा जाता है और हर समय में बाल रोग विशेषज्ञ की निगरानी अनिवार्य है।

ऐसे में एसएनआईसीयू में 24 घंटे ड्यूटी के लिए 8-8 घंटे यानि रोजाना तीन बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत है। इसके अलावा इन्हें साप्ताहिक व अन्य निजी कामों के लिए छुट्टी मिल सके इसके लिए एक अतिरिक्त डाॅक्टर की भी जरूरत है। वहीं 100 से ज्यादा बच्चों की ओपीडी को संभालने के लिए भी एक बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत है।

एक ही बाल रोग विशेषज्ञ उन पर 2 अतिरिक्त प्रभार

जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के बावजूद डाॅ. अनिल अग्रवाल को पर दो अतिरिक्त ड्यूटियों का बोझ भी है। 5 बाल रोग विशेषज्ञों की ड्यूटी अकेले संभालने वाले डाॅ. अनिल के जिम्मे ही काला पीलिया और थैलेसीमिया के मरीजों को देखना और उपचार करना है। इन बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना भी उन्हीं की जिम्मेदारी है।

डाॅ. अजय के सुसाइड करने के बाद और बढ़ी समस्याएं

एनएचएम के तहत 2018 में अनुबंध आधार पर भर्ती डाॅ. अजय ने कुछ दिन पहले किन्हीं कारणों से सुसाइड कर लिया था। उनके सुसाइड करने से डाॅ. अनिल अग्रवाल पर ड्यूटियों का भार और बढ़ गया है। डाॅ. अनिल अग्रवाल का कहना है कि विशेषज्ञों की कमी तो पहले भी खल रही थी, लेकिन डाॅ. अजय के जाने के बाद मानसिक तनाव और बढ़ गया है।

डाॅक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर इसके प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता है। उसके बावजूद मरीजों को परेशानी न हो सुनिश्चित किया जा रहा है। जल्द ही एनएचएम के तहत अनुबंध आधार पर डाॅक्टर की भर्ती की जाएगी।
डाॅ. ओमप्रकाश, सिविल सर्जन, कैथल।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज दिन भर व्यस्तता बनी रहेगी। पिछले कुछ समय से आप जिस कार्य को लेकर प्रयासरत थे, उससे संबंधित लाभ प्राप्त होगा। फाइनेंस से संबंधित लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। न...

    और पढ़ें