बेपटरी स्वास्थ्य सेवाएं:जिले में डाॅक्टरों के 145 में से 87 पद खाली, 11 कोरोना संक्रमित आइसोलेशन वार्ड में मरीजों को देखने के लिए फिजिशियन नहीं

कैथल4 दिन पहले
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सर्जरी ओपीडी के बाहर डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज। - Dainik Bhaskar
सर्जरी ओपीडी के बाहर डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज।

स्वास्थ्य विभाग डाॅक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। पूरे जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं का यही हाल है। डाॅक्टर नहीं होने से प्रबंधन से लेकर ओपीडी, वार्ड और ऑपरेशन थियेटर सब कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ओपीडी में अब स्पैशलिस्ट की सेवाएं दुर्लभ हो गई हैं। विशेषकर गायनी में पिछले लंबे समय से स्पेशलिस्ट ओपीडी नहीं देख रही हैं। इसी तरह सर्जरी और स्किन की भी ओपीडी से रोजाना सैकड़ों मरीज बिना उपचार के ही लौट रहे हैं। इन्हें भी कभी कभार ही स्पेशलिस्ट ओपीडी में मिलते हैं। इनका सबसे बड़ा कारण एमबीबीएस डाॅक्टरों का टोटा है। जिले में चिकित्सा अधिकारियों के 145 स्वीकृत पद हैं।

लेकिन चिंता की बात ये है कि इनमें से करीब 87 पद खाली हैं। अकेले जिला नागरिक अस्पताल में 55 पद स्वीकृत हैं। लेकिन कागजों को छोड़ दें तो यहां सिर्फ 15 डाॅक्टर ही तैनात हैं। इनमें से भी कोई मेडिकल तो किसी अन्य कारण से छुट्टी पर रहने से दिक्कतें और बढ़ जाती है। पिछले कुछ दिन में ही स्वास्थ्य विभाग के 10 से ज्यादा डाॅक्टर कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से करीब 5 डाॅक्टर तो जिला नागरिक अस्पताल के ही हैं। इनके जाने से व्यवस्था अब और बदहाल हो गई है। ओपीडी तो दूर की बात है इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने के लिए भी डाॅक्टरों की भारी कमी है।

जिला अस्पताल में 3 फिजिशियन में से 2 छुट्टी पर, एक कोरोना पाॅजिटिव
जिला नागरिक अस्पताल में 3 फिजिशियन और एक चेस्ट एंड टीबी स्पेशलिस्ट हैं। लेकिन इनमें से 2 तो छुट्टी पर हैं और एक कोरोना पॉजिटिव आ गए हैं। एक फिजिशियन का अता पता ही नहीं है। न तो ये ओपीडी लेते हैं और न ही वार्ड में होते है। हालात ये हो गए हैं कि कोविड आइसोलेशन वार्ड की जिम्मेदारी एक सर्जन को सौंपी गई है। एनेस्थेसिया स्पेशलिस्ट भी नहीं है। वर्तमान में कोविड आइसोलेशन वार्ड में 11 मरीज दाखिल हैं। अगर इनकी हालत बिगड़ती है तो इन्हें देखने के लिए विभाग के पास न तो फिजिशियन है और न एनेस्थेसिया स्पेशलिस्ट।

तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों के दावे खोखले
दूसरी लहर की तरह ही स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन तीसरी लहर से निपटने के दावे तो खूब कर रहा है, लेकिन डाॅक्टरों के खाली पद व इनको लेकर अधिकारियों का ढीला रवैये से पता चलता है कि तीसरी लहर में गंभीर मरीज बढ़े तो हालात पहले से भी वेहतर हो सकते हैं। दूसरी लहर में ढीले रवैये व देर से डाॅक्टर मिलने से जिले में करीब 200 से ज्यादा लोगों को कोरोना से जान गंवानी पड़ी थी।

डाॅक्टरों की डिमांड की गई है। लगातार पत्राचार भी किया जा रहा है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। अगर जरूरत पड़ी तो तुरंत और डाॅक्टरों की डिमांड की जाएगी। -डाॅ. जयंत आहुजा, सिविल सर्जन, कैथल।

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