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आरकेएसडी संस्था चुनाव:साकेत मंगल गुट 20 कॉलेजियम जीतने के बाद भी मायूस मित्तल गुट ने एक कॉलेजियम जीतकर गुलाल उड़ाया

कैथल10 दिन पहले
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राष्ट्रीय विद्या समिति (आरकेएसडी शिक्षण संस्थान) के तीन वर्ष बाद हुए चुनाव में साकेत मंगल व सतीश बंसल गुट 21 में 20 काॅलेजियम जीतकर भी मायूस दिखा। मायूसी का कारण कॉलेजियम नंबर 21 रहा। जहां सुभाष मित्तल गुट से उनके छोटे भाई विष्णु भगवान मित्तल और साकेत गुट से विपिन गोयल आमने सामने थे। दोनों गुटों का इसी कॉलेजियम पर पूरा जोर लगा था और साकेत व बंसल गुट ने इसको अहम की लड़ाई बना लिया था। मित्तल गुट से विष्णु मित्तल के आठ वोटों से जीतते ही समर्थकों ने गुलाल उड़ाकर और ढोल बजाकर जीत का जश्न मनाया।

वहीं दूसरी तरफ साकेत व बंसल गुट के सदस्य हार को पचा नहीं पा रहे थे। सुभाष मित्तल का कहना है कि आज से 67 वर्ष पहले उनके नाना सेठ मक्खन लाल ने अपना सब कुछ दान में देकर संस्था की स्थापना की थी, लेकिन साकेत और बंसल गुट की सोच संस्था से उनके परिवार का सफाया करने की रही है। लेकिन वोटर्स ने एक कॉलेजियम पर जीताकर भी साकेत-बंसल गुट को हराने का काम किया, क्योंकि असली सीट यही थी। शहर ने जो फैसला दिया है वे उसका सम्मान करते हैं। शहर के लोगों ने एक कॉलेजियम जीताकर सेठ मक्खन लाल को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

2018 में सभी 21 कॉलेजियम में मिली थी हार
2018 में राष्ट्रीय विद्या समिति के चुनाव में भी दोनों गुट आमने-सामने थे, 2018 में मित्तल ग्रुप किसी भी कॉलेजियम को जीत नहीं पाया था। इस बार भी साकेत व बंसल गुट ने मित्तल गुट का सफाया करने के प्रयास चुनावों से पहले ही शुरू कर दिए थे। यहां तक कि 2018 के समिति चुनाव में मित्तल गुट से चुनाव लड़ने वाले मुकेश निरवानिया और धर्मपाल मित्तल साकेत-बंसल गुट में शामिल हाे गए। विरोध में कि सी दूसरे के नामांकन नहीं करने के कारण 19 कॉलेजियम में पहले ही सदस्य निविर्रोध चुन लिए गए थे।

21 में 20 कॉलेजियम जीतकर किया सफाया
समिति के वर्तमान में प्रधान एडवोकेट साकेत मंगल ने कहा कि स्व. मक्खन लाल के परिवार की संस्था से सफाया करने की सोच कभी नहीं रखी। 2018 से संस्था की भलाई के लिए काम किया आगे भी काम करेंगे। 21 में से 20 कॉलेजियम उन्होंने जीते हैं और जिससे स्पष्ट हो जाता है पूरे शहर का समर्थन उनके साथ है। उधर वाेटराें काे सूचना पत्र न भेजने पर सतीश बंसल ने कहा कि चुनाव संबंधी जानकारी ऑन लाइन वेबसाइट पर थी।

वोटर्स को पत्र भेजे जाते तो नहीं होती सहमति: विजय गोयल
आरकेएसडी स्कूल के पूर्व उप प्रधान रहे विजय गोयल ने कहा कि साकेत बंसल गुट ने संस्था के सभी 3714 वोटर्स को चुनाव संबंधी सूचना के लिए जानबुझकर पत्र ही नहीं भेजे। जबकि इससे पहले यह प्रक्रिया हर बार दोहराई जाती थी। संस्था के ज्यादातर वोटर्स को चुनावों की जानकारी ही नहीं है। अगर वोटर्स को जानकारी होती तो आज सभी कॉलेजियम में चुनाव हो रहे होते। दूसरे गुट के कमजोर होने का फायदा इस गुट ने उठाया और चुपचाप बंद कमरे में बैठकर 19 कॉलेजियम के सदस्य चुन लिए। बची हुए दो कॉलेजियम पर भी बंद कमरे में फैसला करने की इनकी सोच थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया।


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