वर्कर्स का धरना:आंगनबाड़ी वर्कर्स प्रधान बोलीं-सुपरवाइजर के लगाए आरोप झूठे, निदेशक इसकी जांच कराएं

कैथल2 महीने पहले
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  • आंगनबाड़ी वर्कर्स का धरना 17वें दिन भी जारी
  • राज्यमंत्री के आवास और पिहोवा चौक पर किया प्रदर्शन

आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन के बैनर तले मांगों को लेकर वर्कर व हेल्परों ने 17वें दिन भी पहले राज्यमंत्री के आवास और फिर पिहोवा चौक काले दुपट्टे ओढ़कर प्रदर्शन किया। धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता यूनियन की राज्य प्रधान कुंज भट्ट ने की। जिला अंबाला महासचिव अनुपमा सैनी के नेतृत्व में वर्कर्स-हेल्पर्स ने हिस्सा लिया। कुंज भट्ट और महासचिव अनुपमा सैनी ने कहा कि वर्ष 2018 में खट्टर सरकार ने आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर के साथ आंदोलन के दबाव में समझौता किया था मगर ये लागू नहीं किया गया। वर्कर व हेल्परों की मांगों को लागू करने की बजाय आंदोलन खत्म करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

एक सुपरवाइजर द्वारा यूनियन नेताओं के खिलाफ झूठी पुलिस शिकायत किए जाने का वे विरोध करते हैं। विभाग में काम करते हुए 35 से 40 वर्ष बीत चुके हैं। अनेक आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर सेवानिवृत भी हो चुकी हैं, लेकिन कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। मानदेय डीसी रेट के बराबर भी नहीं है। विभाग के अलावा अन्य विभागों का काम करवाने का कोई अतिरिक्त वेतन भी नहीं दिया जाता है। यह पूरी तरह अन्याय है। कैथल से प्रधान कमला दयौरा ने कहा कि हमारी मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं। वहीं कुछ कर्मचारी नेता भी आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकार के साथ मिल गए हैं और साजिश रचकर 22 जुलाई को धरने को तोडऩे के लिए एक सुपरवाइजर को भेजा गया था। सुपरवाइजर द्वारा लगाए गए सभी आरोप झूठे व बेबुनियाद हैं। यूनियन नेता जगमति मलिक और उनके ऊपर मारपीट व जातिसूचक शब्द कहने के निराधार व झूठे आरोप लगाकर पुलिस कार्रवाई करवाने का दबाव बनाया जा रहा है। पीओ ने उन्हें विभागीय जांच में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया तो पीओ का रवैया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण व तानाशाही भरा था। वे सरकार व महिला एवं बाल विकास विभाग की डायरेक्टर से मांग करते हैं कि शिकायत की जांच या तो वे खुद करें या किसी अन्य अधिकारी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। ताकि सच सामने आ सके। उन्होंने कहा कि दबाव के आगे वे झूकने वाले नहीं हैं।

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