चलते-फिरते अस्पताल की सुविधा:जिले को मिली 3 मोबाइल मेडिकल यूनिट, उपचार से लेकर ब्लड जांच व दवाइयों की भी होगी व्यवस्था

कैथल2 महीने पहलेलेखक: विक्रम पूनिया
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अस्पताल से दूरी अब किसी मरीज के इलाज में बाधा नहीं बनेगी। जिला भर के मरीजों को अब अपने घर के पास ही इलाज की सुविधा मिल पाएगी। इसके लिए कैथल स्वास्थ्य विभाग को 1.20 करोड़ रुपए की 3 मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) मिली हैं। इन एमएमयू को एक प्रकार से चलता फिरता अस्पताल भी कहा जा सकता है। एमएमयू पर ही मरीजों के लिए उपचार से लेकर ब्लड जांच व दवाइयों की व्यवस्था होगी।

यहां तक कि किसी मरीज को यदि माइनर सर्जरी की जरूरत है तो वह भी एमएमयू पर की जा सकेगी। 2 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) पर 1 मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की जाएगी। यूनिट एक महीना एक सीएचसी और फिर दूसरे महीने दूसरी सीएचसी पर तैनात रहेगी। पूरे माह में एक यूनिट 24 गांवों को कवर करेगी। इसी तरह तीनों यूनिट एक माह में 72 गांवों को कवर कर पाएंगी।

यूनिट के लिए ऐसे गांवों का चयन किया जाएगा जहां कोई भी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है। गांव के साथ साथ ईंट भट्ठों और कंस्ट्रक्शन साइटों को भी इसके दायरे में लिया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे। एक साइट या गांव में यह यूनिट कम से कम 3 घंटे तक रहेगी। एक मोबाइल मेडिकल यूनिट पर डाॅक्टर सहित पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था होगी। इसमें स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, एएनएम, लैब टेक्नीशियन सहित कई तरह का पैरामेडिक ल स्टाफ हर समय यूनिट पर तैनात रहेगा।

स्टोर में नहीं सामान तो लोकल परचेज के जरिए मिलेंगी दवाइयां व दूसरा सामान

मोबाइल मेडिकल यूनिट के लिए जरूरी सभी मेडिकल वस्तुएं संबंधित अस्पताल के स्टोर से ली जा सकेंगी। जैसे मरीजों को दी जाने वाली सभी दवाइयां, इस्तेमाल होने वाले बाहरी मेडिकल उपकरण, वैक्सीन व अन्य वस्तुएं। अगर अस्पताल के पास कोई दवा या वस्तु नहीं है तो मोबाइल मेडिकल यूनिट के लिए उसकी लोकल परचेज के जरिए खरीद की जाएगी।

एसएमओ से लेकर डिप्टी डायरेक्टर तक देखेंगे परर्फोमेंस

सीएचसी पर तैनात मोबाइल मेडिकल यूनिट की परफार्मेंस पर एसएमओ से लेकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तक की नजर होगी। रोजाना की परफार्मेंस संबंधित एसएमओ द्वारा रिव्यू की जाएगी। उसके बाद डिप्टी सिविल सर्जन हर 14 दिन में रिपोर्ट लेगा। उसके बाद महीने की 10 तारीख तक सिविल सर्जन खुद परफार्मेंस देंखेंगे और 15 तारीख तक इसको स्टेट और मुख्यालय के साथ सांझा करेंगे। फिर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर और उसके बाद नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर भी हर 15 दिन में इसको रिव्यू करेंगे।

बिना परमिशन के नहीं होगा शेड्यूल में बदलाव
मोबाइल मेडिकल यूनिट किस दिन किस गांव में कितने समय के लिए रहेगी इसका पूरा शेड्यूल हर माह तैयार होगा। इस शेड्यूल के अनुसार ही मोबाइल यूनिट रोजाना गंतव्य के लिए निकलेगी। समय सुबह 9 से लेकर सायं 5 बजे तक होगा और एक गांव या साइट पर कम से कम 3 घंटे तक मोबाइल यूनिट रहेगी। एक बार शेड्यूल बन जाने के बाद इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अगर शेड्यूल में बदलाव करना बहुत ज्यादा जरूरी है तो भी इसके लिए कम से कम सिविल सर्जन की परमिशन जरूरी होगी।

2 दिन पहले ग्रामीणों को दे दी जाएगी सूचना
मोबाइल मेडिकल यूनिट किस दिन किस गांव में होगी इसकी सूचना ग्रामीणों को 2 दिन पहले दे दी जाएगी। इसके लिए गांव के सरपंच, आशा वर्कर व आ आंगनबाड़ी वर्कर के जरिए ग्रामीणों को सूचित किया जाएगा। इसके अलावा मुनादी भी करवाई जाएगी, ताकि एमएमयू के गांवों में आने पर कोई भी व्यक्ति इलाज लेने से वंचित न रहे।

स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों को मिलेगा लाभ
3 मोबाइल मेडिकल यूनिट मिल चुकी हैं। ये अपने आप में चलते फिरते अस्पताल हैं। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों का घर या आसपास ही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा। मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों की रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उच्चाधिकारियों के साथ विचार विमर्श के बाद स्टाफ तैनात करने से लेकर तीनों यूनिट का हर माह शेड्यूल तैयार किया जाएगा।- डाॅ. रमेश सभरवाल, डिप्टी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग।

ऐसे समझें...एक मोबाइल मेडिकल यूनिट पर ये मिलेंगी सुविधाएं

  • परामर्श व उपचार के लिए एक डाक्टर हर समय रहेगा।
  • देखभाल के लिए एक स्टाफ नर्स मौजूद रहेगी।
  • ब्लड जांच के लिए एक लैब टेक्नीशियन रहेगा।
  • दवाई देने को फार्मासिस्ट बनेगा।
  • टीकाकरण को एक एएनएम।
  • यदि किसी मरीज गंभीर बीमारी है तो मेडिकल यूनिट का डाक्टर उसे रेफर करेगा और इसके बारे में विभाग को भी समय पर सूचना उपलब्ध करवाएगा।
  • आसपास में यदि कहीं दुर्घटना हो जाती है तो यूनिट घायलों को उपचार में देगी प्राथमिकता।
  • एमएमयू की देखरेख के लिए एसएमओ रोजाना रिपोर्ट लेगा।
  • स्थाई तौर पर स्टाफ होगा तैनात, 2 टाइम लगेगी हाजिरी।
  • मोबाइल मेडिकल यूनिट या चलते फिरते अस्पताल में कर्मचारियों की ड्यूटियां स्थाई होंगी। मोबाइल यूनिट पर 24 घंटे जीपीएस व सीसीटीवी के जरिए निगरानी भी रखी जाएगी। वहीं कर्मचारियों की 2 टाइम अटेंडेंस होगी। मोबाइल यूनिट के अंदर ही बॉयोमीट्रिक मशीन इंस्टॉल की गई है।
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