महिलाओं की बचत को खा रहा जंग:आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिलाओं को दिए कृषि यंत्रों से काम लेना तो दूर, संभाल भी नहीं हो रही

कैथल10 महीने पहले
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  • 2 साल पहले दिए गए कृषि यंत्रों को संगठन से जुड़ी महिलाएं चला ही नहीं पाई, संगठनों के पास यंत्रों को खड़ा करने तक के लिए जगह नहीं
  • महिलाओं के लिए इनको चलाना तो दूर इनकी देखभाल करना भी संभव नहीं

हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिए कृषि यंत्र अब उन्हीं पर बोझ बन गए हैं। महिलाओं के लिए इनको चलाना तो दूर इनकी देखभाल करना भी संभव नहीं है। ज्यादातर गांव में सार्वजनिक स्थानों पर पड़े लाखों के यंत्रों को जंग खा रहा है। असल में ये जंग यंत्रों पर नहीं महिलाओं की बचत पर लगा है, क्योंकि महिलाओं द्वारा की गई बचत राशि से ही इन यंत्रों के लिए 20 प्रतिशत राशि का भुगतान किया था।

गांव कवारतन में संगठन से जुड़ी महिला गुरदेवी, गांव ककहेड़ी में निवासी जसबीर कौर, गांव सैर निवासी प्रवेश और गांव प्रभावत निवासी निर्मला का कहना है कि संगठन से जुड़ी ज्यादातर महिलाएं गरीब परिवारों से हैं। न तो इनके पास जमीन है और न यंत्रों को खड़ा करने की जगह। मजबूरन यंत्रों को सार्वजनिक स्थानों पर रखना पड़ा है या किसी के खेत में खड़े किए हैं। रेट फिक्स किए जाने के कारण यंत्रों को ग्रामीण किराए पर भी नहीं ले रहे हैं।

सरकार के भी 1 करोड़ 4 लाख 52 हजार डूबे

कृषि यंत्रों को खरीदने पर महिलाओं के 27 लाख 48 हजार के अलावा सरकार ने भी 1 करोड़ 4 लाख 52 हजार की सब्सिडी दी है। यंत्रों का इस्तेमाल नहीं होने के कारण फसल अवशेष प्रबंधन के उद्देश्य से सरकार द्वारा ये सब्सिडी राशि भी बेकार गई है।

खरीद में गड़बड़ी की भी चल रही है जांच

ग्राम संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने सीईओ जिला परिषद और एडीसी को दी शिकायत में कृषि यंत्रों को लेकर भी अधिकारियों पर जबरदस्ती थोपने और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए थे। इसमें महिला पदाधिकारियों ने कहा था कि यंत्र संगठनों पर जबरदस्ती थोपे गए और बचत राशि में से अपनी मर्जी से चेक काटकर दे दिए गए। ज्यादातर संगठनों से इसकी मंजूरी भी नहीं ली गई। यंत्र खरीदने के लिए निर्देशानुसार कमेटी भी नहीं बनाई गई और न ही महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई।

ग्रामीण आजीविका मिशन में इन ग्राम संगठनों को दिए थे यंत्र
गांव ककहेड़ी में एकता, गांव डोहर में लक्ष्मी बाई, गांव कवारतन में उन्नति, गांव कांगथली में कल्पना, गांव तारांवाली में नई सोच, गांव नागल में रविदास, गांव खेड़ी गुलाम अली में आगाज, गांव खानपुर में उज्जवल, गांव फिरोजपुर में आशा, गांव सैर में उम्मीद, गांव फर्शमाजरा में कांति, गांव पोलड़ में आजाद, गांव प्रभावत में नई दिशा, गांव खरकां में महादेव, गांव रामनगर में सफलता की कुंजी ग्राम संगठनों को यह यंत्र दिए गए थे।

ये कृषि यंत्र दिए गए थे संगठनों को

प्रबंधन द्वारा एक रोटावेटर, एक स्ट्रा चॉपर, एक जीरो टिल ड्रील मशीन, दो हैप्पी सीडर व एक पलटु हल।

यंत्रों के इस्तेमाल न किए जाने का कारण

  • यंत्रों के लिए किराया अधिक निर्धारित किया जाना।
  • यंत्रों को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं होना।
  • महिलाओं के पास जमीन का नहीं होना।
  • कृषि यंत्रों के साथ पूरा सामान नहीं दिया जाना।

यंत्रों का इस्तेमाल महिलाओं द्वारा ही किया जाना था। यंत्रों की खरीद से पहले पूरी जानकारी महिलाओं को दी गई थी और महिलाओं के हस्ताक्षर के बाद ही यंत्रों के लिए भुगतान किया था।
-रजत भास्कर, कार्यक्रम प्रबंधक, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन

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