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मानसून की देरी ने फसलों की तासीर बिगाड़ी:समय से पहले कॉटन में निकल आए फूल, ज्वार में बन रहा तेजाब, गन्ने का खत्म नहीं हो रहा चोटी भेदक कीड़ा

कैथल18 दिन पहलेलेखक: सुरेंद्र भारद्वाज
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मानसून की देरी ने खरीफ की सभी फसलों की तासीर बिगाड़ दी है। हालात यह हो गए हैं कि पानी की कमी के कारण खरीफ के फसलों जिनमें कपास, गन्ना, ज्वार, धान आदि शामिल हैं में बीमारियां आ रही हैं। समय पर सिंचाई न हो पाने के कारण फसनल खराब होने लगी हैं। इससे फसल के उत्पादन पर तो असर पड़ेगा ही।

इसके साथ-साथ फसल को बचाने के लिए किसानों का बजट भी बिगड़ रहा है। उन्हें न केवल महंगा डीजल फूंक पर फसल में सिंचाई करनी पड़ रही है। इसके अलावा बीमारियों की रोकथाम के लिए महंगे पेस्टीसाइड का भी छिड़काव करना पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही मानसून की बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों में और ज्यादा नुकसान होगा। इससे किसानों की फसल पर आई लागत भी पूरी हो पानी मुश्किल हो जाएगी।

जानिए...बारिश न होने के कारण खरीफ की किस फसल पर क्या असर पड़ा

कॉटन: नहीं हो पाई बढ़वार
प्रदेश के कई जिलों जिनमें सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, जींद व कैथल शामिल हैं में किसानों ने काफी क्षेत्र में कॉटन की बिजाई की हुई है। जहां पर नहरी पानी की कमी है व बिजली के ट्यूबवेल नहीं है। उनमें फसल पूरी तरह से बारिश पर निर्भर थी। ऐसे एरिया में इन दिनों कॉटन की फसल में फूल निकल आए हैं।

कॉटन की फसल इस युवा अवस्था में थी और उसे सिंचाई की सख्त जरूरत है। सिंचाई से ही फसल बढ़वार ले पाती। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इससे फसल के उत्पादन पर काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा। बारिश न होने के कारण कॉटन में इन दिनों चूरड़ा नाम के कीड़े का भी प्रकोप बढ़ा है।

गन्ना: चोटी भेदक की जकड़ में फसल
गन्ने का यही समय बढ़वार लेने का है। इसी समय पोरी बनती है, लेकिन इस बार बारिश न होने की वजह से फसल में चोटी भेदक कीड़ा जाने का नाम नहीं ले रहा। किसान इसके लिए तरह-तरह के पेस्टिसाइड भी डाल रहे हैं। इसके बाद भी अधिकांश जगहों पर गन्ने की फसल ऐसे लगती है जैसे वह जली हुई हो।

इससे फसल से मिलना वाला उत्पादन काफी प्रभावित होगा। कृषि विशेषज्ञों की किसानों को सलाह है कि फसल में सिंचाई करे और फोरेट जरूरी डाले। इससे जब तक बारिश आएगी तब तक चोटी भेदक कीड़े पर लगाम लग जाएगी।

बाजरा: झुलसने लगी फसल, सिंचाई जरूरी
जिन किसानों ने बाजरा की फसल बीजी हुई है। उसमें भी किसानों को अब बारिश न होने के कारण सिंचाई करनी पड़ रही है। गर्मी व बारिश न होने की वजह से फसल झुलसने लगी है। कृषि विशेषज्ञों की किसानों को सलाह है कि फसल 20 दिन की होते ही अवश्य सिंचाई करे और उसमें यूरिया भी डाले। तभी जाकर फसल बढ़वार ले पाएगी।

बारिश में हो रही देरी से खरीफ की सभी फसलों में नुकसान है। इसके अलावा किसानों की भी चिंता काफी बढ़ गई है। क्योंकि फसल को बचाने के लिए उनको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। बारिश न होने से कपास की फसल में फूल आने लगे है। इसी तरह से गन्ने में चोटी भेदक कीड़ा और ज्वार में तेजाब बनने लगा है। बारिश होने से इन बीमारियों का पुख्ता समाधान हो पाएगा।- यशपाल मलिक, कृषि वैज्ञानिक।

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