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विभाग ने मांगे 2 बाल रोग विशेषज्ञ व 3 एमओ:कोरोना की तीसरी वेव आई तो एक बाल रोग विशेषज्ञ व 2 अनुबंध पर लगे चिकित्सा अधिकारियों के भरोसे कैसे निपटेगा प्रशासन

कैथल19 दिन पहलेलेखक: विक्रम पूनिया
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कैथल| सिविल अस्पताल में एसएनसीयू में दाखिल बच्चे। - Dainik Bhaskar
कैथल| सिविल अस्पताल में एसएनसीयू में दाखिल बच्चे।
  • कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की ज्यादा आशंका
  • अधिकारियों ने मांग की सिर्फ 2 आईसीयू व 6 ऑक्सीजन बेड की, जबकि 8 आईसीयू बेड और 15 ऑक्सीजन बेड की जरूरत

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर चल रही है। वहीं तीसरी लहर की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। चिंता की बात ये है कि इससे सबसे ज्यादा बच्चों के प्रभावित होने का खतरा है। लेकिन उससे निपटने के लिए भी स्वास्थ्य विभाग के पास न तो डाॅक्टर मौजूद हैं और न इंफ्रास्ट्रक्चर।

पूरे जिले में विभाग के पास सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ और 2 अनुबंध आधार पर लगे चिकित्सा अधिकारी हैं। जबकि विभाग को सिविल अस्पताल में ही 3 बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत है। इसके अलावा अनुबंध आधार पर लगे 2 चिकित्सा अधिकारी मौजूद हैं। जबकि विभाग को 5 चिकित्सा अधिकारियों की जरूरत है। इसी तरह एसएनसीयू के लिए 6 ट्रेंड स्टाफ नर्स व वार्ड के लिए 4 स्टाफ नर्सों की जरूरत है।

ऑक्सीजन व आईसीयू के साथ सामान्य बेडों की भी कमी

सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन व आईसीयू बेडों के साथ-साथ सामान्य बेड भी नहीं है। अस्पताल में 20 पीडियेट्रिक बेडों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में 12 हैं और इनमें से ही 8 को कोविड के लिए रिजर्व किया गया है। इसी तरह 18 एसएनसीयू बेड हैं। जबकि 10 और एसएनसीयू बेडों की जरूरत है।

अस्पताल के पास 6 एचडीयू बेड हैं और 15 की जरूरत है। आईसीयू और ऑक्सीजन बेडों की भारी कमी है। विभाग के पास सिर्फ 2 आईसीयू बेड हैं। जबकि 8 की जरूरत है। इसी तरह 15 ऑक्सीजन बेड की जरूरत है। लेकिन वर्तमान में सिर्फ 6 बेड उपलब्ध हैं। इसी तरह वेंटिलेटर की भी कमी है।

कोरोना से अब तक नहीं हुई किसी बच्चे की मौत

जिले में कोरोना की पहली और दूसरी लहर में अब तक किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। हालंाकि पहली लहर में भी और दूसरी लहर में भी करीब 60 बच्चे संक्रमित पाए गए हैं और कुछ को ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ी थी। लेकिन तीसरी लहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं।

बेड और स्टाफ की स्थिति और जरूरत

डीसी और सिविल सर्जन को सिविल अस्पताल की वर्तमान स्थिति और जरूरतों से अवगत करवा दिया गया है। डाॅक्टरों के साथ-साथ संसाधनों की कमी है। वर्तमान में हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। भविष्य में जरूरतों को देखते हुए समय समय पर कदम उठाए जाएंगे।
डाॅ. शैलेंद्र ममगाईं शैली, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल।

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