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संसाधनों व डाॅक्टरों की कमी का असर:मई में 188 में से 129 मौत जिला अस्पताल में हुई, बाकी प्राइवेट अस्पताल व दूसरे शहरों में

कैथल8 दिन पहलेलेखक: विक्रम पूनिया
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  • दूसरी लहर से निपटने के लिए तैयार नहीं था विभाग

कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल भी तैयार नहीं था। सिविल अस्पताल में सुविधाओं का अभाव और विभाग की तैयारियां नहीं होने का खामियाजा कोरोना संक्रमितों को भुगतान पड़ा। ये हकीकत सिविल अस्पताल के मौतों के आंकड़ें खुद ही बयां कर रहे हैं। एक मई से लेकर 31 मई तक जिले में 188 संक्रमितों की जान गई।

जिनमें से 129 मौतें सिर्फ सिविल अस्पताल में ही हुई हैं। यानि मई माह में हुई कुल मौतों की 69 प्रतिशत सिर्फ सिविल अस्पताल में हुई हैं। अगर दूसरे जिलों और राज्यों के संक्रमितों का शामिल कर लिया जाए तो ये प्रतिशत कहीं अधिक है। क्योंकि मई माह के दौरान सिविल अस्पताल में 527 संक्रमित भर्ती हुए। जिनमें से 21 दूसरे राज्यों और 71 दूसरे जिलों से थे। सिविल अस्पताल में होने वाली मौतों में दूसरे जिलों व राज्यों की मौतों को शामिल नहीं किया है।

बाहरी अस्पतालों का जिले के गंभीर मरीजों को लेने से इनकार करना भी मौतों का कारण
जिले में जब गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ रही थी तो अग्रोहा मेडिकल कॉलेज, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल, पीजीआई चंडीगढ़ व रोहतक समेत बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने दाखिले लेने से इनकार कर दिया था। मजबूरन गंभीर मरीजों को अस्पताल में ही भर्ती करना पड़ा और सुविधाओं की कमी के कारण इनकी जान गई।

2 फिजिशियन, वे खुद भी कोरोना संक्रमित हो गए थे

कोविड की दूसरी लहर जब आई तो विभाग में आइसोलेशन वार्ड को संभालने के लिए सिर्फ 2 फिजिशियन थे। चिंता की बात ये है कि जब मई माह में अधिक मौतें हो रही थी तब ये दोनों स्वयं और परिजनों के कोरोना की चपेट में आ जाने के कारण आइसोलेशन में थे। अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों के 55 स्वीकृत पद हैं। लेकिन वर्तमान में सिर्फ 10 से 12 डाॅक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

ऐसे में इनके होम आइसोलेशन में चले जाने से दिक्कतें बढ़ गई। शुरुआत में विभाग के पास 5 वेंटिलेटर थे, लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। हालांकि बाद में अम्बाला व हिसार से विशेषज्ञ आने के बाद इन्हें शुरू किया है। बाद में वेंटिलेटर भी बढ़ाए गए। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

^मैंने कुछ दिन पहले ही पदभार ग्रहण किया है और मौतों के आंकड़ें मैंने अभी नहीं देखे हैं। मौतों का प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन जब प्राइवेट अस्पताल मरीजों को नहीं ले रहे थे तब सिविल अस्पताल ने ही गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया। बहुत से गंभीर मरीज स्वस्थ होकर घरों को भी गए हैं। मरीजों के गंभीर हालत में भर्ती होने के कारण मौतें अधिक हुई हैं।
डाॅ. शैलेंद्र ममगाईं शैली, सिविल सर्जन, कैथल।

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