गीता महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन:इंद्रेश कुमार बोले - श्रीमद् भागवद गीता से सीखें जीवन जीने की कला

कैथलएक महीने पहले
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महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय एवं श्री लवकुश महातीर्थ (ट्रस्ट) मूंदड़ी के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को अन्तरराष्ट्रीय गीता महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंद्रेश कुमार (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) व मुख्यवक्ता के रूप में जयप्रकाश गौतम (अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री, संस्कृत भारती) एवं सारस्वत अतिथि के रूप में महेंद्र सिंह (प्रधान, श्री लवकुश महातीर्थ (ट्रस्ट) ने हिस्सा लिया।

मुख्यातिथि इंद्रेश कुमार ने कहा कि गीता निस्वार्थ जीवन के लिए प्रेरणा है। जीवन में ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, उतावलापन नहीं होना चाहिए। गीता इन सबका नियंत्रण करना सिखाती है। जीवन में विवेक होना अति आवश्यक है, विवेकयुक्त व्यक्ति सभी दोषों से मुक्त रहता है। गीता विवेक का जागरण करवाती है, गीता में समग्रता को समाहित किया गया है।

कुलपति प्रो.राजकुमार मित्तल ने कहा कि गीता में जीवन प्रबंधन के बारे में विस्तृत रूप से लिखा गया है। उन्होंने कहा कि गीता में जीवन के हर क्षण के बारे में मार्गदर्शन मिलता है। गीता जीवन का प्रबंधन भी सिखाती है। कुलसचिव प्रो. यशवीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय संस्कृत, संस्कृति एवं राष्ट्र संरक्षण के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना आवश्यक है।

जयप्रकाश गौतम ने कहा कि बार-बार गीता पढ़ने से भी तृप्ति नहीं होती है, जो मनुष्य जैसा चाहता है वैसा कर्म करता है। जो गीता में लिखा है वह जीवन में होना चाहिए। जो आचार्य पढ़ाते हैं और जो विद्यार्थी पढ़ते हैं, उनकी विद्या ग्रहण करने की भावना श्री कृष्ण और अर्जुन के समान होनी चाहिए। जो गीता में लिखा है, उसके अनुसार आचरण भी आवश्यक है। गीता हमें मान-सम्मान के साथ जीने का मार्ग दिखाती है। गीता के 200 से अधिक अनुवाद हुए हैं किंतु वास्तविक आचरण क्या है यह जानना अपेक्षित है।

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