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कैथल के दो नेताओं को मिली चेयरमैनी:2019 में इनेलो छोड़ भाजपा से जुड़े कैलाश भगत बने हैफेड के चेयरमैन गुहला विधायक के बेटे रणधीर सिंह डेयरी विकास संघ के चेयरमैन बने

कैथल13 दिन पहले
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कैलाश भगत
  • शहर के राइस मिलर्स समेत मुख्य व्यवसायियों में गिने जाते हैं कैलाश
  • वरिष्ठ विधायक होने पर मंत्री पद नहीं मिला तो अब बेटे को चौधर

लोकसभा चुनाव से पहले मार्च 2019 में इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले कैलाश भगत को हरियाणा सरकार ने चौधर देते हुए हैफेड का चेयरमैन बनाया है। भाजपा जाॅइन करते वक्त उन्हें लोकसभा या विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी का प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन प्रतिद्वंदियों को देखते हुए भाजपा आलाकमान ने समीकरण बनाते हुए दूसरे नेताओं को टिकट दे दी। इसके बावजूद कैलाश भगत पार्टी से सक्रियता से जुड़े रहे और टिकट न मिलने का कोई मलाल प्रकट नहीं किया जिस कारण वे पार्टी व मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र बने और उसी का यह तोहफा चेयरमैनी के रूप में मिला है। वहीं गुहला विधायक के बेटे रणधीर सिंह को भी सरकार ने चेयरमैन बनाया है।

2014 में इनेलो के टिकट पर सुरजेवाला के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं कैलाश

देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान से कैथल आकर 1946 में जनसंघ से जुड़े अमरनाथ भगत के बेटे हैं कैलाश भगत। लेकिन कैलाश भगत ने राजनीति शुरुआत के बाद इनेलो जाॅइन की थी। कैलाश भगत इनेलो के पूर्व जिला प्रधान के साथ-साथ वर्ष 2005, 2009 और 2014 में इनेलो की टिकट पर कैथल विधानसभा से सुरजेवाला के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं जबकि उनके पिता अमरनाथ भगत शुरू से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं।

उन्होंने 1982 में कैथल विस से भाजपा व लोकदल गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था लेकिन आजाद प्रत्याशी रोशनलाल तिवाड़ी के मुकाबले हार गए थे। कैलाश भगत के वर्ष 2000 से 2005 की चौटाला सरकार के दौरान तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला से अच्छे संबंध बन गए थे जिसके बाद से वे लगातार तीन बार इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ते रहे। कैलाश भगत शहर के राइस मिलर्स समेत मुख्य व्यवसायियों में गिने जाते हैं।

हाल ही में राजनीति में आए, नगर पार्षद रह चुके हैं रणधीर

गुहला से जजपा विधायक ईश्वर सिंह भी अपने बेटे को राजनीतिक चौधर दिलाने में कामयाब रहे। उनके बेटे रणधीर सिंह को भी हरियाणा डेयरी विकास संघ का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि मनोहर-2 सरकार बनाने में जजपा के समर्थन के बाद विधायक ईश्वर सिंह मंत्री पद के दावेदार माने जा रहे थे लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं मिला।

शपथ के समय बाकायदा विधायक ईश्वर सिंह ने विधानसभा में कहा था कि वे मौजूदा विधायकों में सबसे वरिष्ठ हैं, वर्ष 1977 में वे पहली बार विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे थे। अब माना जा रहा है कि विधायक कहीं नाराज न हो जाएं, इसके लिए अब उनके बेटे को चेयरमैन बनाया है। इससे पहले रणधीर सिंह नगर पार्षद रह चुके हैं मगर सक्रिय राजनीति में अभी आए हैं।

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