संकट में गौशाला / लॉकडाउन के चलते आर्थिक संकट में कलायत मुढ़ाढ़ गाेशाला

कलायत| मुढ़ाढ़ गोशाला कलायत में आराम कर रहा गोवंश। कलायत| मुढ़ाढ़ गोशाला कलायत में आराम कर रहा गोवंश।
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कलायत| मुढ़ाढ़ गोशाला कलायत में आराम कर रहा गोवंश।कलायत| मुढ़ाढ़ गोशाला कलायत में आराम कर रहा गोवंश।

  • कलायत गाेशाला में इस समय 3,350 गाेवंश, लॉकडाउन के चलते ग्रामीण क्षेत्र से कम मिला चारा

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

कैथल. हजारों गाेवंश को अपने अंदर आश्रय देने वाली मुढ़ाढ़ गाेशाला कलायत इस समय अार्थिक संकट से जूझ रही है। पहले ही धन की कमी से जूझ रही गाेशाला के लिए भी बेमौसमी बरसात व कोरोना वायरस का संक्रमण इस प्रकार अभिशाप बना की गाेशाला प्रबंधन समिति को तूड़ा खरीदने के लिए लाखों रुपए खर्च करने पड़े। गाेशाला प्रबंधन समिति प्रधान योगेश गर्ग सहित पदाधिकारी ओमबीर सिंह राणा, विक्रम नंबरदार, डाॅ. हरीश गर्ग, रमेश राणा, सतीश राणा, धर्मपाल राणा व शीशपाल सिंह आदि ने बताया कि कलायत की गाेशाला में इस समय लगभग 3,350 गाेवंश हैं। इसमें से जहां 2,750 गाेवंश को टैग लगा हुआ है जबकि शेष गाेवंश फिलहाल बिना टैग के ही हैं। कलायत गाेशाला में गाेवंश की समुचित तौर पर देखभाल करने के लिए इस प्रकार से व्यवस्था की हुई है कि जहां छोटे गाेवंश के रखने के लिए अलग से स्थान बनाया हुआ है वहीं इसी प्रकार दुधारू गाेवंश के साथ बीमार गाेवंश के लिए अलग से व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि गाेशाला में प्रबंधन समिति द्वारा जहां समर्पित भाव से सेवा की जा रही है, वहीं क्षेत्र के दानवीर सज्जनों द्वारा भी सहयोग तो दिया जा रहा है मगर गाेवंश की संख्या व इसके रख-रखाव पर लाखों रुपए प्रति माह खर्च होने के चलते यह राशि भी कम है।

कोरोना वायरस के चलते ग्रामीण क्षेत्र में से कम मिली तूड़ी | मुढ़ाढ़ गाेशाला प्रबंधन समिति प्रधान योगेश गर्ग ने बताया कि इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते ग्रामीण अंचल में से बहुत ही कम तूड़ा गाेशाला को मिला। ग्रामीण क्षेत्र में तूड़ा लेने के लिए जाने में जहां परहेज किया गया वहीं इस बार किसानों ने भी गेहूं की फसल कटाई में इस प्रकार सावधानी बरती कि कहीं भी किसी भी प्रकार की विपरीत स्थिति न बनने पाए। जहां ग्रामीण क्षेत्र में से तूड़ा कम मिलने पाया। इसका ही कारण रहा कि गाेशाला ने अब तक 16 लाख रुपए के करीब का तूड़ा खरीद लिया है ।

सरकार द्वारा दी राशि बनती है 82 पैसे प्रति गाेवंश जबकि खर्च होता है 82 रुपए प्रति गाेवंश

गाेशाला प्रबंधन समिति प्रधान योगेश गर्ग ने बताया कि सरकार द्वारा उस गाेवंश का 300 रुपए प्रति गाेवंश राशि दी जाती है जिनको टैग किया जा चुका है। सरकार द्वारा जो राशि दी गई है वह 82 पैसे प्रति गाेवंश प्रतिदिन बनता है जबकि एक गाेवंश पर जहां चारे आदि पर ही 50-60 रुपए प्रतिदिन का खर्च बन जाता है तथा पूरे खर्च का हिसाब लगाया जाए तो वह 82 रुपए के करीब प्रति गाेवंश प्रतिदिन बन जाता है। गर्ग ने कहा कि क्षेत्र के दानवीर सज्जनों द्वारा गाेशाला में आर्थिक तौर पर सहयोग किया जा रहा है फिर भी गाेशाला प्रबंधन समिति द्वारा अपील की जा रही है कि अपने बच्चों के जन्मदिन जैसे खुशी के अवसर पर गाेशाला में दान दे ताकि गाेशाला में दिए दान का पुण्य मिल सके।

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