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  • Last Year, The Rates Of Bricks Were 5 Thousand Rupees, This Time It Increased To 6 Thousand, Because Coal Became Three Times More Expensive In A Year, The Rate Of Bricks Increased By One And A Half Thousand From Last Year, The Cost Of Building A House Would Increase.

महंगा हुआ आशियाना बनाना:पिछले साल 5 हजार रुपए थे ईंटों के रेट, इस बार बढ़कर 6 हजार हुए, वजह सालभर में तीन गुना महंगा हुआ कोयला, पिछले साल से डेढ़ हजार बढ़ गए ईंटों के रेट, घर बनाने की लागत बढ़ेगी

कैथलएक महीने पहलेलेखक: सुरेंद्र भारद्वाज
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घर बनाना अब और महंगा हो गया है। ईंटों के रेट पिछले साल से काफी बढ़ गए हैं। पिछले साल इन्हीं दिनों में ईंटें 5 हजार रुपए (प्रति हजार) के रेट से मिल रही थीं। अब 6 से साढ़े 6 हजार रुपए पहुंच गए हैं। रेट बढ़ने की बड़ी वजह है कि सालभर में कोयले के रेट करीब तीन गुना बढ़ना बताया जा रहा है।

जीएसटी दरों में बढ़ोतरी, भट्ठों के संचालन पर मार्च तक लगी रोक, महंगी लेबर भी ईंटों के रेट बढ़ने की वजहें हैं। ईंट भट्ठा एसोसिएशन कैथल के जिला प्रधान रामप्रसाद ने कहा, ‘कोयले के महंगा होने के कारण यह रेट नाकाफी है। इसीलिए रेट बढ़ाना मजबूरी है। जल्द हम सरकार से मिलेंगे और सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध कराने की मांग करेंगे ताकि ईंटों के रेट स्थिर किए जा सकें।

प्रदेश में इन तीन कारणों से बढ़ रहे ईंटों के भाव

  • पहला: कोयले के रेट में करीब 3 गुणा बढ़ोतरी होना है। पहले किराया सहित 9 हजार रुपए प्रति टन के आसपास कोयला मिल रहा था जो अब बढ़कर 25 से 27 हजार रुपए तक पहुंच गया है।
  • दूसरा: पहले ईंटों पर जीएसटी 5% थी जो अब 12% कर दी गई है। बढ़ी जीएसटी ईंट भट्ठा मालिक ग्राहक से वसूल रहे हैं इसके अलावा लेबर भी पहले की तुलना में अब काफी महंगी हो गई है।
  • तीसरा: एनजीटी के आदेश हैं। एनजीटी ने एक मार्च तक ईंट भट्ठों के चलाने पर रोक लगाई हुई है। इसके कारण नया माल तैयार नहीं हो रहा है और ईंट भट्ठों पर स्टॉक सीमित है। इससे ईंटों के भाव में बढ़ोतरी हो रही है।

इस ओर सरकार को भी कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे

सभी वाकिफ हैं कि कोयला काफी महंगा होगा है, चूंकि ईंट के उत्पादन में कोयले का भी उपयोग होता है। ऐसे में ईंट के रेट पर असर पड़ना लाजमी है। फिर संचालक रेट को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार को कदम उठाने होंगे।

ईंटों का नया स्टॉक और भी महंगा हो सकता है

प्रदेश भर में करीब 2500 ईंट-भट्ठे चल रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा ईंट भट्ठे झज्जर में हैं। एनसीआर क्षेत्र में एनजीटी के आदेशों के चलते ईंट भट्ठे बंद हैं। इस समय जो ईंटें बेची जा रही हैं, वे पुराने स्टॉक की हैं। काफी भट्ठों पर अब ईंटों का स्टॉक सीमित ही बचा हुआ है। अभी इसे ही बेचा जा रहा है। ऐसे में जब ईंटों का नया स्टॉक बेचना शुरू किया जाएगा तो ईंटों के रेट में और भी बढ़ोतरी होने की संभावना रहेगी। ​​​​​​​

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