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किसान आंदोलन:टिकरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में सहायता देने के लिए पाई के ग्रामीणों ने पंचायत में बनाई रणनीति

कैथल4 महीने पहले
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दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में सहायता देने के लिए पाई के ग्रामीणों की दासू पट्टी दरवाजा पर पंचायत हुई जिसमें किसान आंदोलन के लिए रणनीति बनाई गई। आंदोलन में लंगर लगाने के लिए पूरे गांव से चंदा इकट्ठा करने पर सहमति बनी। इसके तहत पूरे गांव के हर घर से 200-200 रुपए चंदा इकट्ठा किया जाएगा। गांव की करीब 25 हजार आबादी में पांच हजार घर हैं।

किसान यूनियन के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष बलवान ढुल व वीरेंद्र ढुल ने बताया कि किसान आंदोलन के प्रति सरकार के उदासीन रवैये को देखकर शनिवार शाम गांव के किसानों की मुख्य बैठक बाबा दासू पट्टी दरवाजे पर हुई। बैठक में गांव की पट्टी व जातियों के सक्रिय 51 सदस्यों की कमेटी बनाई गई। यह कमेटी दिल्ली आंदोलन में चल रहे भंडारे के लिए फंड जुटाएगी। आंदोलन में समय-समय पर सहयोग के लिए गांव से युवाओं व बुजुर्गों की टीम दिल्ली जाएगी।

बैठक में अंदेशा लगाया गया कि 4 जनवरी को किसानों की मांगे नहीं मानी गई तो यह आंदोलन सरकार व पूंजीवाद के खिलाफ जनआंदोलन के रूप में लंबे समय तक अनिश्चित काल तक चलेगा। रविवार 4 जनवरी को सरकार किसानों की मांग को अनदेखा करती है तो ढुल खाप के गावों से लगभग 500 से ज्यादा ट्रैक्टरों को दिल्ली आंदोलन में भेजने की योजना बनाई जाएगी।

कृषि बिलों को लेकर ढुंढवा में हुई पंचायत, आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान

कृषि बिलों के खिलाफ अब केवल अकेले किसानों की लड़ाई नहीं रही। दिल्ली में जारी आंदोलन को समर्थन देने के लिए आदर्श गांव ढुंढवा में महापंचायत हुई। पंचायत में विभिन्न वर्गोंं से जुड़े लोगों ने शिरकत की। महापंचायत में सर्वसम्मति से किसान आंदोलन को हर तरह का सहयोग देने का एलान किया। सभी ने कदम से कदम मिलाते हुए किसान आंदोलन को लक्ष्य तक पहुंचाने का संकल्प लिया। सरूपा राम, सूरजमल, पूर्व सरपंच चंद्रभान, सूबे सिंह, श्याम लाल,धर्मपाल सिंह, सुरेंद्र, सुखपाल कश्यप, विजय कुमार, विजेंद्र सिंह और दूसरे वक्ताओं ने कहा कि खेतीबाड़ी भारत देश के बुनियाद है।

इसके मद्देनजर खेती को नई दिशा देने के लिए सभी का एकजुट होना जरूरी है। किसान की कोई बिरादरी नहीं होती। सभी वर्गों के लोग परोक्ष और अपरोक्ष रूप से कृषि से ताल्लुक रखते हैं। शांति पूर्वक ढंग से चल रहे आंदोलन के दौरान 50 से अधिक किसान अपने प्राणों का बलिदान दे चुके हैं। इन परिस्थितियों को लेकर सभी वर्ग एकजुट हो रहे हैं। ढूंढवा गांव के साथ-साथ अन्य गांवों में भी विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर किसान आंदोलन में अपना योगदान देने की ठानी है।

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