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अब तक 3 लोगों ने दर्ज करवाई आपत्तियां:प्रॉपर्टी सर्वे पूरा, डाटा मिसमैच होने पीएमएस पोर्टल पर कल तक दर्ज कराएं आपत्ति

कैथल5 दिन पहले
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  • शहरवासी बोले-नगर परिषद प्रशासन कर रहा खानापूर्ति, आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए मिलना चाहिए 30 दिन का समय

नगर परिषद प्रशासन ने शहर में प्रॉपर्टी सर्वे करवाने के बाद अब डाटा ऑनलाइन करने की प्रक्रिया आरंभ की है। उससे पूर्व परिषद ने शहरवासियों से प्रॉपर्टी सर्वे बारे आपत्तियां दर्ज करवाने की अपील की है। उसके लिए 10 अप्रैल तक का समय शहरवासियों को दिया है। उसके बाद आपत्तियां दर्ज नहीं हो पाएंगी।

हालांकि शहरवासी विरेंद्र कुमार, सुशील कपूर का कहना है कि दिया समय बहुत कम है। ये केवल खानापूर्ति लगती है। अभी तक तो शहरवासियों को ये भी जानकारी नहीं है कि आपत्तियां दर्ज कहां करवानी हैं। इसके लिए कम से कम तीस दिन का समय होना चाहिए। बता दें कि इससे पहले साल 2010-11 में सर्वे हुआ था, जिसके अनुसार शहर में करीब 67 हजार 500 प्रॉपर्टी थी। अब नया सर्वे हुआ है। इसमें 74 हजार प्रॉपर्टी सामने आई हैं।

सीएससी में जाकर पीएमएस पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करवानी होगी

किसी भी शहरवासी को अपनी प्रॉपर्टी से संबंधित डाटा में गलती लगती है, तो उसे सीएससी में जाकर पीएमएस पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करवानी होगी। जब इन आवेदनों को पोर्टल पर खोला जाएगा। उस समय एक ओटीपी कार्यकारी अधिकारी के मोबाइल पर जाएगा। वो ओटीपी डालने के बाद ही इन आपत्तियों को देखा और ठीक किया जा सकेगा।

अगर अधिकारी किसी काम में या मीटिंग में व्यस्त है, तो काम रुका रहेगा। इससे जहां काम धीमा होगा, वहीं ओटीपी एक समस्या का रूप न धारण कर ले। इसलिए जिस क्लर्क या कंप्यूटर ऑपरेटर की इस काम में ड्यूटी है, उसके पास पोर्टल में आई आपत्तियों को ठीक करने की पावर होनी चाहिए। ताकि समाधान तेजी से हो सके । शहरवासी प्रवीण ने बताया कि उसकी घर की जगह 130 गज है, लेकिन सर्वे के बाद उसकी जगह को 136 दिखाया गया है। उसने ये जानकारी ठीक करवाने के लिए आवेदन किया हुआ है। लेकिन उसकी समस्या का हल नहीं हो पाया है।

टैक्स भरने में नहीं हो सकेगी गड़बड़ी

यूएलबी ने पूरे प्रदेश में एक निजी कंपनी से शहर की सभी प्रॉपर्टी का सर्वे करवाया है। सर्वे करने वाले कर्मचारियों ने घर-घर जाकर डाटा एकत्र किया है। इसमें रजिस्टरी, आधार नंबर, मालिक की फोटो, पुरानी आईडी नंबर लिया गया है। जिसे मौके पर ही ऑनलाइन दर्ज कर दिया था। इससे पहले पूरे शहर में ड्रोन के माध्यम से मैपिंग की गई थी। इसमें स्थिति क्लीयर हो गई थी, कौन सा मकान बना हुआ है कहां प्लाॅट खाली है।

इससे फायदा ये हुआ की शहर में प्रॉपर्टी की संख्या बढ़ गई। जिससे टैक्स अधिक आएगा। पहले समस्या आती थी कि कोई कमर्शियल को घरेलू प्रॉपर्टी बता कर कम टैक्स देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। आईडी डालते ही मालिक की फोटो और जगह की तस्वीर दिखेगी। जिससे टैक्स भरने में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकेगी।

सालाना तीन करोड़ का टारगेट, अब बढ़ेगी इनकम

नप के पास अभी तक 67 हजार 500 घेरलू, काॅमर्शियल और इंडस्ट्रीयल प्रॉपर्टी थी। जिनसे सालाना तीन करोड़ रुपए परिषद को मिलता था। इस बार परिषद को काफी छूट देने के बाद भी करीब दो करोड़ रुपए टैक्स के रूप में मिला है।

परिषद ने रिकवरी के लिए भी अभियान चलाया हुआ है, जिसमें एक लाख से अधिक टैक्स बकायादारों को नोटिस जारी कर टैक्स भरने के लिए कहा है। लेकिन अब प्रॉपर्टी करीब सात हजार बढ़ कर 74 हजार हो गई हैं। इससे टैक्स भी बढ़ेगा। वहीं रजिस्टरी करवाने के लिए अनिवार्य किया नो ड्यूज प्रमाण पत्र के कारण भी लोग टैक्स, डेवेलपमेंट चार्ज भर रहे हैं।

प्रॉपर्टी का डाटा ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कोई भी व्यक्ति पीएमएस हरियाणा डॉट कॉम पर जाकर आईडी डाल कर चेक कर सकता है कि, उसकी प्रॉपर्टी का एरिया, स्थिति क्या है। उसके बाद अगर लगता है कि कोई जानकारी गलत है तो उसको 10 अप्रैल तक आपत्ति दर्ज करवा सकता है। अगर यूएलबी ने समय बढ़ाने के आदेश दिए तो, समय बढ़ाया जा सकता है
बलबीर सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।

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