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प्रदेशभर से पदाधिकारियों ने लिया भाग:सीएमआर पॉलिसी के विरोध में राइस मिलर्स का ऐलान न तो रजिस्ट्रेशन कराएंगे और न ही पीआर धान खरीदेंगे

कैथल12 दिन पहले
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कैथल| मांगों को लेकर नारेबाजी करते राइस मिल एसोसिएसन के सदस्य।
  • हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन की कैथल में हुई मीटिंग में लिया निर्णय

सरकार द्वारा खरीदी गई धान की कस्टम मिलिंग करने को लेकर प्रदेश के राइस मिलर अब 2020-21 की पॉलिसी के विरोध में हो गए हैं। बुधवार को हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के बैनर तले कैथल में हुई राज्यस्तरीय मीटिंग में निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तब तक न तो राइस मिलर रजिस्ट्रेशन कराएंगे और न ही सीजन में पीआर धान की खरीद करेंगे।

इसमें प्रदेशभर से पदाधिकारियों ने भाग लिया। इससे पहले कुरुक्षेत्र में दोनों की एसोसिएशनों की संयुक्त बैठक में नई पॉलिसी के विरोध में एकजुट होने पर सहमति बनाई गई है। पत्रकारों से बातचीत में एसोसिएशन के चेयरमैन एवं कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि सरकार मिलर्स को चोर बता रही है । अब प्रदेश के सभी 1338 राइस मिलों के मिलरों ने नई पॉलिसी का विरोध किया है और कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराएगा।

सरकार अपनी धान खुद खरीदे और मिलों में स्टोर कराए। सरकार को एडवांस में चावल देने को भी वे तैयार हैं। एजेंसियों के मापदंड एक जैसे होने चाहिए। महासचिव राजेंद्र कुमार ने कहा कि बॉर्डर पर जो मंडियां हैं पोर्टल हरियाणा के साथ-साथ इनके भी खोले जाएं। जिला प्रधान सचिन मित्तल ने कहा कि होल्डिंग चार्ज की एक जैसी पॉलिसी बने और मिल मालिकों के बकाया का सरकार जल्द भुगतान कराए। पदाधिकारी रमेश कुमार ने कहा कि एग्री बेस्ड इंडस्ट्री आज बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं। ऑनलाइन के नाम पर ड्रामा किया जा रहा है।

मीटिंग में एसोसिएशन के पदाधिकारियों में अमरजीत छाबड़ा, राजेंद्र सिंह, रमेशचंद्र, सचिन मित्तल, प्रवीण बंसल, अमरजीत चीका, सतीश कंसल, सुशील गुप्ता, महेंद्र गर्ग, ओमप्रकाश जैन, अंकित मिगलानी, रमेश सिंधवानी, जयभगवान, महाबीर सिंगला, तरसेम गर्ग, नरेश होडल, प्रवीण खिजराबाद, अशोक कालड़ा नारायणगढ़ समेत कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

सीएमआर के रुके हुए चार्जेज व बिल तुरंत जारी हों: छाबड़ा

छाबड़ा ने बताया कि उनकी मांगों में इस वर्ष 2019-20 के सीएमआर के रुके हुए चार्जेज व बिल तुरंत जारी करना, एफडी पहले टन पर 7 लाख, उसके बाद 3 लाख प्रति टन करना, जीरी के बदले कोई प्रॉपर्टी गिरवी नहीं लेना, जीरी 17 प्रतिशत नमी की सरकार द्वारा मंडी से खरीद कर मिलो तक पहुंचाना, मिलर्स से बारदाना पहले की तर्ज पर 50 प्रतिशत ही लिया जाए, जबकि सरकार पूरा बारदाना पहले ही मिलर्स से मांग रही है। इसके अलावा वर्षों से मिलर को प्रति क्विंटल धान की मिलिंग पर मात्र 10 रुपए मिल रहे हैं, जबकि लेबर समेत अन्य खर्चे बढ़ रहे हैं।

ऐसे में मिलिंग के रेट प्रति क्विंटल 100 रुपए किए जाएं।, जीरी का मंडियों से सैंपल लेकर कस, टुकड़ा , डैमेज व डिस्कलर की मात्रा 5-5 प्रतिशत निर्धारित किया जाए, हरियाणा में होल्डिंग/ इंट्रेस्ट चार्जेज की एक ही पॉलिसी बनाना, जब एक बार धान खरीद के बाद दिसंबर में सभी मिलर्स की पीवी हो जाती है उन्हें इसके लिए बार-बार तंग न किया जाए। मिलों की कैपेसिटी के लिए मिलों से एफीडेविट लेना या टैरिफ कमीशन द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार माना जाए, कोरोना के मद्देनजर इस बार सीएमआर का समय 30-9-21 निर्धारित करना, जो मंडियां बॉर्डर पर हैं।

उनके साथ लगते दूसरे राज्यों के किसानों का रजिस्ट्रेशन हरियाणा के किसानों के साथ ही शुरु करना, हरियाणा के सभी 1338 राइस मिलों को सीएमआर के अंतर्गत जीरी मिलना, चावल के मॉयश्चर कट के एवज में चावल देने को मिलर तैयार हैं। तथा एफसीआई में कांटा होने के बाद गाड़ी निर्धारित समय मे डंप होना। उन्होंने कहा कि जब तक कोई भी पीआर जीरी की किसी भी प्रकार की खरीद नहीं करेगा जब तक एसोसिएशन का सीएमआर पर फैसला न होगा।

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