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  • Saudi Arabia, Iran, Iraq Including 12 Countries Used To Export 1.8 Million Tonnes Of Basmati Rice, Labor Shortage Affected Up To 40% At Ports

कोरोना इफेक्ट:सऊदी अरब, इरान, ईराक समेत 12 देशों में हर वर्ष निर्यात होता था 18 लाख टन बासमती चावल, बंदरगाहों पर लेबर की कमी से 40% तक काम प्रभावित

कैथल11 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो
  • पहले दो दिन में खाली हो जाती थी गाड़ी, अब लग रहा 12 से 14 दिन का समय, लोड गाड़ी खड़ी रहने से बढ़ी दिक्कत

(शिवकुमार गौड़) सऊदी अरब, इरान, ईराक, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, कनाडा समेत कई देशों में इंडिया के महकदार बासमती चावल की डिमांड है। कोरोना की वजह से अब राइस मिलों से लेकर बंदरगाह तक लेबर की कमी आड़े आ रही है। बंदरगाहों पर दो से तीन दिन में गाड़ियां उतरती थीं। अब लोड गाड़ी खाली होने में 12 से 14 दिन लग रहे हैं। इससे जहां निर्यातक परेशान हैं।

वहीं, विदेशों में सप्लाई भी देरी से पहुंच रही है। राइस मिलों में आधी लेबर से काम चलाया जा रहा है। कई जगह तो मजदूर लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए अधिक मजदूरी लेकर काम कर रहे हैं। वैश्विक महामारी के दौर में पहली बार ऐसा हुआ जब यूरोप के देशों में भी इंडिया के चावल की डिमांड हुई। पहले पाकिस्तान से चावल निर्यात होता था, लेकिन उसके चावल को रिजेक्ट कर दिया था।

लेबर ने बढ़ाई ट्रांसपोर्टरों की परेशानी
एक्सपोर्टरों के मुताबिक मार्च माह में किया लॉकडाउन के बाद ट्रांसपोर्टेशन यानी ट्रक चलने बंद हो गए थे, जिस कारण चावल निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत तक काम प्रभावित हुआ। कैथल की फर्म लेखराम नरेंद्र कुमार राइस मिल एवं एक्सपोर्टर ने एक माह में 100 कंटेनर के चावल स्टॉक को स्पेशल ट्रेन बुक कराकर गुजरात के कांडला व मुंदरा बंदरगाह पर पहुंचाया।

हरियाणा से विदेशों में लगभग 18 लाख टन से अधिक चावल निर्यात होता है, जबकि पूरे भारत से 42 लाख के करीब चावल निर्यात किया जाता है। राइस मिलों में अब भी लेबर की कमी है। रेनी सीजन के चलते प्रोडक्शन भी पूरी मात्रा में नहीं हो पा रही है।

प्रति टन 830 से 870 डॉलर पहुंचे रेट
राइस एक्सपोर्टर नरेंद्र मिगलानी बताते हैं कि कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बाद विदेशों में भुखमरी से बचने के लिए चावल की डिमांड बढ़ा दी थी। प्रति टन चावल के रेट पहले 830 डॉलर थे, लेकिन इस दौरान वे 870 डॉलर तक पहुंच गए थे लेकिन अब वही रेट आ गए हैं। इसके अलावा लोड कराने में लेबर भी बढ़ी है। अलग-अलग पैकिंग में चावल निर्यात करना पड़ता है। इराक और कुवैत में ज्यादातर साढ़े चार किलो, 9 किलो, 19 किलो की पैकिंग की डिमांड रहती है। अन्य देशों में 5, 10, 20 व 40 किलो की पैकिंग में चावल पहुंचता है। बासमती सैला चावल को विदेशी बड़े चाव से खाते हैं।

यह भी जानिए : बता दें कि करनाल, कैथल, पानीपत, सोनीपत, कुरुक्षेत्र व सिरसा आदि जिलों से करीब 50 एक्सपोर्टरों द्वारा चावल का निर्यात किया जाता है। सबसे ज्यादा करनाल के तरावड़ी, घरौंडा, कैथल, निसिंग, इंद्री, असंध समेत कई जगहों से चावल विदेशों में सप्लाई किया जाता है। हरियाणा राइस मिल डीलर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा के अनुसार कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल से ज्यादा चावल एक्सपोर्ट होता है।

देश से हर साल 42 लाख टन चावल होता है निर्यात : सुनील
देश से विदेशों में हर वर्ष 42 लाख टन से अधिक चावल का निर्यात होता है। इसमें हरियाणा का 18 लाख टन चावल शामिल है। पहले अरब के देशों में डिमांड होती थी। अब यूरोप, यूएसए, यूके में चावल निर्यात हो रहा है। लेबर चार्ज बढ़ा है। लोडेड कंटेनर कई दिनों बाद खाली हो पाते हैं, जिससे एक्सपोर्टर पर आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है। -सुशील कुमार, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा एक्सपोर्टर एसोसिएशन।

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