टेस्टिंग बढ़ाने के लिए मैनपावर नहीं:कलायत आरटीपीसीआर लैब में स्टाफ की कमी, रोजाना 750 से ज्यादा नहीं हो पा रहे टेस्ट

कैथल16 दिन पहले
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कैथल| कलायत आरटीपीसीआर लैब में सैंपल की जांच करते एक्सपर्ट। - Dainik Bhaskar
कैथल| कलायत आरटीपीसीआर लैब में सैंपल की जांच करते एक्सपर्ट।
  • संक्रमण को रोकने के लिए जांच जरूरी, लेकिन जांच बढ़ाने में बढ़ता पॉजिटिविटी रेट बाधा, दूसरे जिलों में भेजने पड़ सकते हैं सैंपल

कलायत अस्पताल में बनकर तैयार हुई आरटीपीसीआर लैब की जांच क्षमता को लेकर किए जा रहे दावे सही नहीं हैं। दावों को लेकर धरातल की सच्चाई अलग हैं। लैब के पास मौजूदा स्टाफ के साथ लैब की क्षमता 750 से ज्यादा नहीं है। जबकि लैब शुरू होने पर अधिकारियों ने इसकी क्षमता 2500 सैंपल रोजाना होने तक दावे किए थे। लेकिन अधिकारियों के इन दावों में सच्चाई नहीं है। अगर लैब की क्षमता को बढ़ाना है तो स्वास्थ्य विभाग को डबल या इससे भी ज्यादा मैनपावर की जरूरत है।

सबसे ज्यादा दिक्कत रिपोर्ट एनलाइजर एक्सपर्ट (एमडी माइक्रोबॉयोलॉजी, एमडी बायोकेमिस्ट्री या एमएससी माइक्रोबायोलॉजी) की जरूरत है। जो विभाग के पास नहीं हैं। विभाग के पास लैब को चलाने के लिए सिर्फ एक रिपोर्ट एनालाइजर एक्सपर्ट एमडी बायाकेमिस्ट्री है। जबकि 2000 से ज्यादा जांच के लिए कम से कम 3 एक्सपर्ट की जरूरत है। इसके अलावा दूसरे स्टाफ और जांच करने के लिए एक और मशीन की भी जरूरत होगी।
तकनीकी पहलू भी समस्या
अगर जिले में कोविड पॉजिटिविटी रेट कम है तो लैब में क्षमता से ज्यादा सैंपल की जांच संभव है। लेकिन अगर कोविड पॉजिटिविटी रेट 5 प्रतिशत से ज्यादा है या बढ़ रहा है तो लैब की क्षमता 750 या इससे भी कम रह जाएगी। क्योंकि अगर एक साथ 5 सैंपल लगाते हैं और सभी निगेटिव हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर इनमें से एक भी सैंपल पॉजिटिव आ जाता है तो फिर उस सैंपल को डिटेक्ट करने के लिए सभी सैंपल को एक-एक कर मशीन में दोबारा लगाना पड़ता है। इसमें कहीं अधिक समय खर्च होता है जो लैब की क्षमता को प्रभावित करता है।
संक्रमण रोकना है तो बढ़ानी होगी जांच
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच जरूरी है। लेकिन लैब की क्षमता कम होने के कारण जांच को बढ़ाना आसान नहीं है। वर्तमान में जिले में रोजाना औसतन 800 से 900 लोगों की जांच ही हो पा रही है। पॉजिटिविटी रेट बढ़ने से लैब पहले ही क्षमता से ज्यादा सैंपल की जांच कर रही है। वहीं पीक आने पर दूसरे जिलों में चल रही लैबों पर भी लोड कई गुना बढ़ जाता है। दूसरी लहर के पीक के समय तो बाहरी जिलों की लैब ने कैथल के सैंपल तक लेने से इनकार कर दिया था। मजबूरी में स्वास्थ्य विभाग को प्राइवेट लैबों में सैंपल की जांच करवानी पड़ी थी।

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