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  • To Protest Against Privatization And Demand To Fulfill The Pending Demands, The Workers Staged A Sit in, Said Roadways Need 14 Thousand Buses, 84 Thousand Workers, But The Government Is Bent On Privatization

धरना-प्रर्दशन:निजीकरण के विरोध और लंबित मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर कर्मियों ने दिया धरना, बोले- रोडवेज को चाहिए 14 हजार बसें, 84 हजार कर्मी, लेकिन सरकार निजीकरण करने पर तुली

कैथल2 महीने पहले
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हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन ने निजीकरण के खिलाफ और लंबित मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर बस अड्डा परिसर में धरना दिया। धरने की अध्यक्षता डिपो प्रधान रणबीर सिंह ने किया। मंच का संचालन राजपाल शर्मा ने किया।

यूनियन के राज्य नेता जसबीर सिंह ने कहा सरकार हरियाणा रोड़वेज समेत सभी विभागों का निजीकरण कर बर्बाद करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि आज विभाग में 14,000 सरकारी बसें व 84,000 कर्मचारियों की आवश्यकता है। एसकेएस जिला प्रधान जरनैल सिंह ने सभी संगठनों को सरकार की हठधर्मिता व निजीकरण नीतियों के खिलाफ सांझा संघर्ष करने का आह्वान किया। मौके पर केंद्रीय कमेटी सदस्य राजकुमार नेपेवाला, अमित कुमार,संदीप कुंडू, महिपाल राणा, जगतार सिंह, राजपाल शर्मा, सुरेश मराठा, रमेश कुमार उपस्थित रहे।

कर्मचारियों की मांगे|

राज्य के नेता जसमेल और कृष्ण कुमार गुलियाणा ने कहा सरकार परिचालकों का ग्रेड पे बढ़ाने सहित कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए गम्भीर नहीं है। उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, सभी खाली पदों पर पक्की भर्ती करें, तकनीकी वेतनमान से वंचित सभी तकनीकी कर्मचारियों को तकनीकी वेतनमान देने, कर्मशाला कर्मचारियों के कम किए गए राजपत्रित अवकाश पहले की तरह लागू किया जाए।

कोरोना महामारी के दौरान बसें खड़ी रहने के कारण विभाग को हुए घाटे की भरपाई के लिए 2000 करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाए। सभी कर्मचारियों को 5000 रुपए जोखिम भत्ता देने, सभी कर्मचारियों को एक माह के वेतन के समान पांच वर्ष का बकाया बोनस का भुगतान करने, ओवरटाइम, टीए का भुगतान करने आदि 6 जनवरी व 4 जून 2020 को परिवहन मंत्री से बातचीत में मानी गई मांगों को लागू किया जाए।

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