शुभ मुहूर्त पर जमकर खरीददारी:भाईदूज आज, भाइयों को तिलक के लिए 2 घंटे 11 मिनट का शुभ मुहूर्त

कुरुक्षेत्रएक महीने पहले
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कुरुक्षेत्र। भैया दूज को लेकर मिठाई की दुकानों पर रही भीड़। - Dainik Bhaskar
कुरुक्षेत्र। भैया दूज को लेकर मिठाई की दुकानों पर रही भीड़।
  • भैया दूज को लेकर मिठाई की दुकानों पर रही भीड़।

दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज मनाई जाती है। इसे यमद्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक करती हैं। उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस बार ये पर्व 6 नवंबर शनिवार को है। मान्यता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसकी अकाल मौत नहीं होती। बहन को इस दिन प्रसन्न रखना चाहिए। उसे मनचाहे उपहार दें। ध्यान रहे कि आपकी किसी बात से बहन को दुःख न पहुंचे।

बहन के चेहरे की मुस्कराहट से ही यम प्रसन्न होकर दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं। राहुकाल में तिलक करने से बचें : राहुकाल सुबह 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक के अनुसार भाई दूज का त्योहार शुभ मुहूर्त में मनाने से लाभ होता। राहु काल में भाई को तिलक करने से बचना चाहिए। जो सुबह 9बजकर 20 मिंट से 10-42 मिनट तक रहेगा इस समय तिलक न करें। भाई दूज की द्वितीया तिथि 5 नवंबर को रात 11 बजकर 14 मिनट से लगेगी, जो 6 नवंबर को शाम 7 बजकर 44 मिनट तक बनी रहेगी।

इस दिन भाइयों को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से लेकर 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। यानि तिलक करने का शुभ मुहूर्त 2 घंटा 11 मिनट तक रहेगा। इसके बाद भी सूर्यास्त तक तिलक करवा सकते हैं । बहनें थाली में जरूर रखें ये सामान : भाई दूज पर भाई की आरती उतारते वक्त बहन की थाली में सिंदूर, फूल, चावल के दाने, सुपारी, पान का पत्ता, चांदी का सिक्का, नारियल, फूल माला, मिठाई, कलावा, दूब घास और केला जरूर होना चाहिए। इन सभी चीजों के बिना भाई दूज का त्योहार अधूरा माना जाता है।

बहनें सुबह स्नान करने के बाद अपने ईष्ट देव, भगवान विष्णु या गणेश की पूजा करें। भाई के हाथों में सिंदूर और चावल का लेप लगाने के बाद उस पर पान के पांच पत्ते, सुपारी और चांदी का सिक्का रख सकते हैं। फिर उसके हाथ पर कलावा बांधकर जल उड़ेलते हुए भाई की दीर्घायु के लिए मंत्र पढ़ें।

कई बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर कलाई पर कलावा बांधती हैं। फिर भाई का माखन-मिश्री से मुंह मीठा कर अंत में उसकी आरती उतारती हैं। इस दिन भाई अपनी बहनों के घर जाकर भोजन करते हैं। उन्हें कुछ उपहार भी देते हैं।

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