सांस्कृतिक प्रदर्शनी:विरासत हस्तशिल्प प्रदर्शनी में दिखी हरियाणा की सांस्कृतिक झलक, 100 साल से पुराने अनाज मापक बर्तन बने आकर्षण

कुरुक्षेत्रएक महीने पहले
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विरासत हेरीटेज विलेज में पुराने मापकों को देखती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
विरासत हेरीटेज विलेज में पुराने मापकों को देखती महिलाएं।

गीता जयंती के अवसर पर विरासत हेरिटेज विलेज जीटी रोड मसाना में आयोजित राज्य स्तरीय हरियाणा हस्तशिल्प हुनर कार्यशाला एवं हरियाणा सांस्कृतिक प्रदर्शनी में प्रदेशभर से आई हस्त शिल्पकारों की प्रदर्शनी लगाई गई। मंगलवार को एचएसआरएलएम की सीईओ डॉ. अमरेंद्र कौर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस मौके पर हरियाणा के सभी जिलों से पहुंची महिला कलाकारों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।

इसमें हरियाणवी फुलकारी के नमूने, हरियाणा की विविध कलात्मक दरियां, हरियाणा के लोक परिधान, हाथ से बनाए हुए जूट के बैग, गुड्डे-गुड़ियां और खिलौने, योगा मैट, मिट्टी के बर्तन, हाथ की कढ़ाई से तैयार किए गए आसन, दीवार पर लटकाने के लिए हरियाणवी लोक कलात्मक विषय-वस्तुएं, लुगदी से बने हुए विविध आकार एवं प्रकार के बोहिए, डालडी, ठाठिया, गेहूं की तूलियों से बने हुए टोकरे, बोहनी, चंगेरी इसके साथ ही खजूर के पत्तों से बनी टोकरी, बीजना, इंडी, इंडे और हरियाणवी आभूषण प्रदर्शित किए गए। इस मौके पर डॉ. रणबीर सिंह और डॉ. विवेक चावला मौजूद रहे।

विरासत हेरिटेज विलेज में भारत में अनाज को मापने के लिए जिन लोक पारंपरिक बर्तनों का प्रयोग किया जाता था, उनकी प्रदर्शनी लगाई गई। 100 से अधिक मापक बर्तन प्रदर्शित किए गए। इन बर्तनों में लोक पारंपरिक स्वरूप से गेहूं, चने, दाल, चावल, तेल और अनाज मापा जाता था। यहां पर तमिलनाडू, हरियाणा, पंजाब, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा के पुराने अनाज मापक बर्तन प्रदर्शित किए गए हैं। इन बर्तनों में पाव, छटांक, शेर, अधशेर, धड़ी, दो धड़ी, तीन धड़ी, चार धड़ी, मण के मापक यंत्र पर्यटकों को लुभा रहे हैं। गौरतलब है कि भारत में अंग्रेजों के आने से पहले भारत की अपनी अनाज मापक व्यवस्था थी। इस दौरान चरखों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

हरियाणा पैवेलियन में ग्रामीण लोक कला से कराया रू-ब-रू
कुरुक्षेत्र . गीता महोत्सव-2021 में लगाए गए हरियाणा पेवेलियन में लोग हरियाणा की ग्रामीण लोक कला संस्कृति से रू-ब-रू हो रहे हैं। बच्चों से लेकर युवाओं एवं बुजुर्गों में हरियाणा पेवेलियन आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। गीता महोत्सव को देखने आए जिला कैथल के गांव शिवमाजरा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने हरियाणा पेवेलियन का अवलोकन करने के उपरांत कहा कि पेवेलियन में उन्हें प्राचीन हरियाणवी संस्कृति को देखने का अवसर मिला है।

स्कूल के डीपी शमशेर ने कहा कि वे 51 स्कूली बच्चों को लेकर इस महोत्सव को देखने आए हैं जिससे बच्चों को हरियाणवी संस्कृति के साथ-साथ गीता जंयती महोत्सव के बारे जानकारी मिल पाए। स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा लवप्रीत ने कहा कि पहली बार गीता जंयती महोत्सव देखने आई है और उन्हें राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों द्वारा फ्लैक्स के माध्यम से हरियाणा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे जानकारी मिली है।

लवप्रीत ने कहा कि उसे हरियाणा पैवेलियन में गांव के कुएं पर हरियाणवी वेशभूषा में पनिहारन द्वारा मटके में पानी भरने का स्टैच्यू बेहद आकर्षक लगा है और उसने उसके साथ सैल्फी भी ली है। ग्रीन सिटी कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक हीरा लाल तथा नत्था सिंह ने कहा कि यह हरियाणा सरकार का एक सराहनीय कदम है।

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