कोरोना का असर:66 साल में दूसरी बार कुरुक्षेत्र में नहीं लगेगा दशहरा मेला, न लंकापति के पुतलों का दहन

कुरुक्षेत्र2 महीने पहले
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शाहबाद में पुतलों को हुडा ग्राउंड लेकर जाते कमेटी के सदस्य। - Dainik Bhaskar
शाहबाद में पुतलों को हुडा ग्राउंड लेकर जाते कमेटी के सदस्य।
  • दशहरा कमेटी का तर्क-तीन माह पहले होती थी तैयारी शुरू, तब कोरोना का पूरा डर था
  • अद् भुत -तीन शुभ योग एक साथ बनने से दशहरा पर पूजन सभी जातकों के लिए अत्यंत शुभ

धर्मनगरी में इस बार भी दशहरे का प्रसिद्ध मेला नहीं भरेगा, न ही थीम पार्क में रावण के पुतला दहन होगा। लगातार दूसरे साल भी कुरुक्षेत्र में पुतला दहन की परंपरा नहीं निभेगी।

पिछले 66 साल में यह दूसरा मौका है, जब दशहरा नहीं मनाया जा रहा। इससे पहले कभी कुरुक्षेत्र में ही दो जगहों पर दशहरे का मेला लगता था। वहीं जिले में सात जगहों पर पुतला दहन होता था। इनमें कुरुक्षेत्र में थीम पार्क का दशहरा मेला सबसे बड़ा और प्रसिद्ध था। अब सिर्फ शाहाबाद में पुतला दहन होगा। यहां भी एक ही मेला लगेगा। जबकि पहले यहां दो जगह मेला लगता था।

पाकिस्तान से आने के बाद पुतला दहन : समाजसेवी व दशहरा कमेटी से जुड़े रहे वयोवृद्ध मक्खनलाल रल्हन बताते हैं कि कुरुक्षेत्र में आजादी से पहले भी दशहरा मनाने की परंपरा थी, लेकिन तब यहां पुतला दहन नहीं होता था। रावण के पुतला दहन की शुरुआत पाकिस्तान से आकर बसे पंजाबी समाज ने शुरू की थी। सन् 1955 के करीब यहां दशहरा मनाने की शुरुआत की।

दहन को लेकर झगड़ा हुआ था : मक्खनलाल व फतेहचंद गांधी के मुताबिक रावण दहन की शुरुआत पंजाबी समाज ने शुरू की थी। इस पर कई स्थानीय ब्राह्मणों व अन्य लोगों ने आपत्ति जताई। तब उन्हें बताया कि वे और उनके पुरखे तो पाकिस्तान में रावण के पुतला दहन करते थे। इसे लेकर झगड़ा भी हुआ। हर साल यह विवाद होता।

मक्खन के मुताबिक एक बार पुलिस उन्हें व साथियों को पकड़कर ले गई। तब ब्राह्मण समाज के मौजिज लोग सामने आए और समझौता किया। इसके बाद पुलिस ने उन लोगों को छोड़ दिया। कुछ साल बाद बनिया व ब्राह्मण समाज के कुछ लोगों ने अपना अलग दशहरा शुरू कर दिया। तब मौजूदा कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी थीम पार्क व दूसरी कमेटी झांसा रोड पर पुतला दहन करने लग, लेकिन भीड़ हमेशा थीम पार्क में रही। बाद में दोनों कमेटी एक हो गई, लेकिन कुछ साल पहले सर्वधर्म समाज के नाम से एक और कमेटी ब्रह्मसरोवर पर पुतला दहन करने लगी, लेकिन अब दोनों एक हो चुकी हैं।

विजय दशमी आज शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगी

विजयदशमी पर इस बार तीन शुभ योग बन रहे हैं। गायत्री अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक के मुताबिक रवि योग 14 अक्टूबर को शाम 9 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगा, जो 16 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। वहीं सर्वार्थ सिद्ध योग 15 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। सुबह सूर्योदय से 9 बजकर 16 मिनट तक कुमार योग रहेगा।

तीन शुभ योग एक साथ बनने से दशहरा पर पूजन सभी जातकों के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। इस बार दशहरा 15 अक्टूबर को है। विजय दशमी 14 अक्टूबर को 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी. जो कि 15 अक्टूबर 2021 को शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। इस मुहूर्त की कुल अवधि सिर्फ 46 मिनट की है। वहीं अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से लेकर 3 बजकर 33 मिनट तक है।

दोपहर को है 46 मिनट का शुभ मुहर्त

14 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 52 मिनट से दशमी तिथि की शुरुआत हुई। इसका समापन 15 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 02 मिनट पर होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त : 15 अक्टूबर को विजय दशमी के दिन दोपहर 2 बजकर 1 मिनट से 2 बजकर 47 मिनट तक विजय मुहूर्त है। इस मुहूर्त की कुल अवधि सिर्फ 46 मिनट की है। वहीं अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से लेकर 3 बजकर 33 मिनट तक है.। अद्भुत लाभ योग : इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए। मां दुर्गा के पूजन से आदिशक्ति की कृपा प्राप्त होती है।

दशहरे पर करें ये खास उपाय : इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करना बड़ा फायदेमंद होता है। नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी दशहरे की पूजा अद्भुत होती है। विजय दशमी के दिन नीलकण्ठ पक्षी का दर्शन शुभ माना है। क्योंकि इसका संबंध भगवान शिव से है। इनके दर्शन से सौभाग्य के द्वार खुल जाते हैं और धन का आगमन शुरू हो जाता है।

सिर्फ शाहाबाद में दशहरा पर लगेगा मेला

कुरुक्षेत्र में सिर्फ शाहाबाद में दशहरा मेला लगेगा। शाहाबाद में कोरोना से पहले तक हर साल दो जगह पुतला दहन हो रहे थे। पहले तीन जगह भी दशहरा मन चुका है। अब शिवशक्ति रामलीला कमेटी, शिवमंदिर रामलीला कमेटी ऋषि मारकंडेश्वर क्लब एक हो चुके हैं। संरक्षक पूर्व मंत्री केएल शर्मा के मुताबिक हुडा ग्राउंड में पुतला दहन होगा। जिसमें 51 फुट का रावण, 45 फुट का कुंभकर्ण व 40 फुट ऊंचा मेघनाद का पुतला होगा। दावा किया कि कोविड को लेकर बनाए नियम व शर्तों का पालन होगा।

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