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सुविधा:किसान पराली बेच कर प्रति एकड़ कमा सकते हैं 3 हजार रुपए, पिहोवा में पराली से बनाएंगे बिजली

कुरुक्षेत्र8 महीने पहले
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कुरुक्षेत्र | बायोमास पावर प्लांट में पराली से बिजली तैयार करते कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
कुरुक्षेत्र | बायोमास पावर प्लांट में पराली से बिजली तैयार करते कर्मचारी।
  • दो बायोमॉस पावर प्लांट पराली से पैदा करेंगे बिजली, एक लाख 40 हजार मीट्रिक टन पराली का प्रबंधन

अब कुरुक्षेत्र में दो बायोमॉस पावर प्लांट से पराली का प्रबंधन कर हर वर्ष लाखों यूनिट बिजली पैदा की जाएगी। इससे किसान भी दोनों उद्योगों को प्रति एकड़ करीब तीन हजार रुपए पराली बेचकर कमा सकते हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट्स में एक लाख 40 हजार मीट्रिक टन पराली का प्रबंधन किया जा सकेगा। कृषि विभाग की ओर से जिले में 41 हजार मीट्रिक टन पराली की पैदावार होने के आंकड़े दिए गए हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट पराली न जलाकर पैसा कमाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में दोनों प्रोजेक्ट्स कारगर साबित होंगे। इसके लिए किसानों को पराली को खेतों में न जलाकर दोनों उद्योगों तक पहुंचाना होगा।

दो करोड़ से अधिक यूनिट की पैदा

उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने बताया कि पिहोवा के गांव बाखली में सैनसन पेपर इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा 8 मेगावॉट का बायोमॉस पावर प्लांट स्थापित किया है। इस प्लांट में से तीन मेगावॉट बायोमॉस पावर प्लांट स्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से वर्ष 2009-10 में हरेडा द्वारा 60 लाख रुपए की सब्सिडी उपलब्ध करवाई गई थी।

इस प्रोजेक्ट के जरिए वर्ष 2019-20 में दो करोड़ 16 लाख 22 हजार 285 यूनिट बिजली पैदा की थी। इस प्रोजेक्ट से खर्चों को निकालकर फर्म ने तकरीबन डेढ़ रुपए प्रति यूनिट यानी तीन करोड़ 24 लाख 33 हजार 427 रुपए की बचत की। जून माह तक सैनसन पेपर मिल ने 49 लाख 96 हजार 355 यूनिट बिजली पैदा की। इस प्लांट में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन पराली का प्रबंधन किया जा सकेगा।

छज्जुपुर प्लांट में दिसंबर से पराली प्रबंधन होगा शुरू

उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने बताया कि पिहोवा में ही गांव छज्जूपुर में 15 मेगावॉट का बायोमॉस पावर प्लांट स्थापित कर लिया गया है। इस प्लांट में 25 हजार मीट्रिक टन पराली का प्रबंधन किया जाएगा और यह प्लांट दिसंबर के अंत तक शुरू कर दिया जाएगा। इस जिले में तकरीबन दो लाख 75 हजार एकड़ में धान की फसल पैदा की जा रही है। इसमें से करीब 70 हजार एकड़ में बासमती धान की बिजाई होती है और इस बासमती धान की पराली का प्रयोग किसान अपने पशुओं के चारे के लिए करते हैं।

वहीं 2 लाख 5 हजार एकड़ में पीआर किस्म की धान की बिजाई होती है और इससे 41 हजार मीट्रिक टन पराली पैदा होती है। उन्होंने बताया कि किसान प्रति एकड़ पराली बेचकर 3 हजार रुपए कमा सकते हैं और इन दोनों प्लांट में 41 हजार एमटी की बजाए एक लाख 40 हजार एमटी पराली खरीदने की क्षमता है इसलिए किसान खेतों में पराली को आग न लगाकर दोनों प्लांट को पराली बेच सकता है। इससे किसान पराली जलाने से बचेगा और प्रति एकड़ तीन हजार रुपए भी कमा सकेगा।

पराली जलाने वालों पर करवा रहे केस दर्ज

डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन करने बारे लगातार कृषि विभाग और हरेडा जागरूक कर रहा है। इसके लिए टीमों का भी गठन किया गया है। अभी धान के सीजन में किसानों को फानों में आग न लगाने बारे और पराली का प्रबंधन करने के प्रति किसान गोष्ठियों और शिविरों के माध्यम से गांव-गांव जाकर जागरूक किया जा रहा है। इन प्रयासों के बावजूद कुछ किसान अभी भी फानों में आग लगा देते हैं। इससे न केवल किसानों के मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं बल्कि पर्यावरण भी दूषित हो रहा है। इस प्रकार के लोगों पर प्रशासन द्वारा सख्ती की जा रही है और केस भी दर्ज करवाए जा रहे हैं।

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