गीता जयंती पर विशेष:700 श्लोकों में गीता, शंकराचार्य ने 1200 बरस पहले ध्यान लगा बताया था ज्योतिसर में हुआ गीता उपदेश

कुरुक्षेत्रएक महीने पहलेलेखक: संजीव राणा
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ज्योतिसर में प्राचीन शिव मंदिर व अक्षय वट वृक्ष। - Dainik Bhaskar
ज्योतिसर में प्राचीन शिव मंदिर व अक्षय वट वृक्ष।

यह सर्वमान्य है कि गीता के उपदेश महाभारत युद्ध व कुरु की भूमि कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा अर्जुन को दिए गए थे। गीता विश्व का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसके सर्वाधिक भाष्य व टीका और अलग-अलग व्याख्याएं हैं। गीता के श्लोकों को लेकर भी एकमत नहीं है। अब सर्वमान्य धारणा में गीता के 700 श्लोक माने जाते हैं। गीता के अलग व्याख्याओं में 700 से 746 तक श्लोक माने गए हैं।

वहीं कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश ज्योतिसर में माने गए, लेकिन इसे लेकर भी पूर्व में सवाल उठ चुके हैं। ऐसे ही गीता के समयकाल को लेकर भी एक राय नहीं बनी। अब सरकार द्वारा बकायदा काल निर्धारण कर गीता जयंती मनाई जा रही है। इस साल 5159वीं गीता जयंती मनेगी। मान्यता है कि मार्गशीर्ष माह की एकादशी को गीता उपदेश हुए। इसे लेकर भी ज्योतिषी सवाल उठाते रहे हैं।

अब 700 श्लोक माने

गीता महाभारत का ही एक हिस्सा है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण मोहग्रस्त अर्जुन के माध्यम से कई शंकाओं का समाधान करते हैं। यही वजह है कि गीता को महज एक धार्मिक पुस्तक या वर्ग विशेष का ग्रंथ नहीं माना जा सकता। कुछ विद्वान गीता के 701 से 746 तक श्लोक मानते हैं। संस्कृत के विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मोहन मिश्र के मुताबिक गीता के कश्मीरी संस्करणों में 746 श्लोकों की बात कही है।

कश्मीरी गीता के भाष्यकार अभिनव गुप्त की टीका में ये श्लोक मिलते हैं। गुजराती संस्करण में भी 700 से अधिक श्लोक हैं। खुद महाभारत के पर्व सार संग्रह में भी 700 से अधिक श्लोक माने हैं। अब सर्वमान्य धारणा 700 श्लोक की है।

आदि गुरु शंकराचार्य ने ज्योतिसर में लगाया था ध्यान

गीता उपदेश स्थल को लेकर पूर्व में अलग राय रही है, लेकिन यह सभी मानते हैं कि गीता कुरुक्षेत्र में हुई। अब कुरुक्षेत्र के गांव ज्योतिसर को गीता उपदेश स्थली माना जाता है। मान्यता है कि शंकराचार्य करीब 1200 बरस पहले यहां पहुंचे थे। तब उन्होंने यहां ध्यान लगाया था। इसके बाद उन्होंने अपनी ध्यान शक्ति के बाद घोषणा की कि ज्योतिसर ही वह स्थल है, जहां महाभारत युद्ध के दौरान गीता उपदेश हुए।

कुछ विद्वान ज्योतिसर को भगवान शिव का मंदिर मानते हैं। आज भी यहां एक वट वृक्ष के बीच प्राचीन शिवलिंग मौजूद है। ज्योतिसर तीर्थ बाहरी आक्रांताओं के द्वारा कई बार नष्ट किया गया, लेकिन शिवलिंग सुरक्षित रहा। वहीं यहां मौजूद वट वृक्षों को गीता का साक्षी माना जाता है। उक्त वट वृक्ष 5000 पुराने वटों के वंशज हैं।

आज मनेगी 5159वीं जयंती
बता दें कि पहले गीता जयंती काल निर्धारण करके नहीं मनाई जाती थी। मार्गशीर्ष माह की एकादशी के दिन जयंती मनाई जाती है। अब मौजूदा भाजपा सरकार काल निर्धारण कर जयंती मना रही है। इस बार सीएम ने भी घोषणा की कि 5159वीं जयंती मनेगी। यह तिथि अहोली शिलालेख व कलयुग की गणना के अनुसार तय की है। पुरातत्वविद राजेंद्र सिंह के मुताबिक कलयुग युगाब्दध को अब 5123 साल हो चले हैं। कलयुग श्रीकृष्ण के स्वर्ग गमन के 36 बरस बाद शुरू होता है। 5123 में 36 साल जोड़ने पर यह 5159वीं जयंती बैठती है।

जयग्रंथ में 8800 श्लोक
गीता महाभारत के भीष्म पर्व में है। महाभारत में श्लोकों को लेकर अलग राय रही है। अब महाभारत में एक लाख श्लोक माने गए हैं। पुरातत्वविद व श्रीकृष्णा म्यूजियम के क्यूरेटर राजेंद्र राणा के मुताबिक शुरुआती महाभारत जिसे जय ग्रंथ कहा जाता है, में करीब 8800 श्लोक माने गए हैं। इसके बाद जय संहिता में 24 हजार श्लोक माने हैं।

इसे देखते हुए यही लगता है कि गीता के श्लोक भी 60 से 70 होंगे। बाद में महाभारत में करीब एक लाख श्लोक माने गए। जिसमें गीता के 700 श्लोक मानते जाते हैं। गीता कहने के समय को लेकर यही धारणा है कि यह 45 मिनट तक कही गई। राजेंद्र सिंह के मुताबिक यह धारणा सही नहीं है। कारण युद्ध के समय में कोई इतनी देर तक बात नहीं कर सकता। गीता कुछ ही मिनटों में भगवान श्रीकृष्ण के मुख से कही गई होगी।

एक सवाल- गीता पहले कैसे
ज्योतिषी ऋषभ वत्स का कहना है कि केडीबी व सरकार गीता की जयंती मार्गशीर्ष माह की एकादशी को मनाती है। जबकि भीष्म पंचक में वर्णन है कि शरशैय्या पर लेटे भीष्म पितामह कार्तिक माह में युधिष्ठिर को राजा मानते हैं। कार्तिक माह मार्गशीर्ष से पहले आता है। इसे लेकर केडीबी से कई बार आरटीआई से जानकारी मांगी, लेकिन जवाब नहीं मिल पाया।

वहीं राजेंद्र राणा का कहना है कि यह प्रसंग ठीक नहीं है। भीष्माटमी पर भीष्म खुद कहते हैं कि उन्हें शरशैय्या पर 58 दिन हो चुके हैं। ये 58 दिन मार्गशीर्ष माह के बाद फरवरी में जाकर पूरे होते हैं। भीष्माष्टमी भी फरवरी में ही पड़ती है।

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