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संस्कृति:ऑनलाइन लख्मीचंद की रागनियों से दिया जीवन का संदेश, स्थानीय कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा

कुरुक्षेत्र15 दिन पहले
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हरियाणा कला परिषद्, अम्बाला मण्डल द्वारा शुक्रवार को सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में कला कीर्ति भवन, कुरूक्षेत्र के मुक्ताकाशी मंच पर रागनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कोरोना महामारी के कारण आनॅलाइन कार्यक्रम में रंगकर्मी बृज शर्मा बतौर मुख्यअतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि बृज शर्मा, हरियाणा कला परिषद अम्बाला मंडल के अतिरिक्त निदेशक नागेंद्र शर्मा तथा रागनी गायक गुलाब सिंह ने लख्मीचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्जवलित कर किया। लख्मीचंद द्वारा रचित रागनी ब्रह्मज्ञान से कार्यक्रम का आगाज किया गया।

ब्रह्माज्ञान से किया आगाज

ब्रह्मज्ञान भजन के माध्यम से बताया गया कि जब मनुष्य का जन्म नहीं हुआ था, उससे पहले की स्थिति क्या थी। माला रोज रटाकर बंदे हर के नाम की ना तो माटी में मिल जाएगी काया श्याम की, जैसी पंक्तियों के साथ इंसान को जन्म से पहले की स्थिति याद दिलाई गई और नेक काम करने के लिए उत्साहित किया गया।

इसके बाद पूरणमल के किस्से की रागनियों को सुनाया गया। जिसमें पंडित लखमी चंद जी ने लिखा कि जब पूरणमल मौसी के दर्शन करने के लिए जाता है तो उसकी जवानी सुंदरता को देखकर उसका मन साफ हो जाता है। इस रागनी में पंडित लखमी चंद जी ने दर्शाया है कि मां और मौसी में कोई फर्क नहीं है दोनों के ही पैरों के सिवा कहीं भी नजर नहीं उठेगी। मेहरबानी करके बेटे के उपर रहम करें सिर पै हाथ धर, मां बेटी पै जुलम करे से आदि विभिन्न रागनियों के माध्यम से कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

पद्यमावत से बताई नारी की महत्ता

पद्मावत के किस्से की भी बेहतरीन रागनी सुनाते हुए कलाकारों ने दर्शाया कि नारी की महता क्या होती है। रानी पदमावत ने प्रण किया था कि किसी भी पराए पुरुष का चेहरा नहीं देखेंगी, किंतु संयोगवश राजा रणदीप से बाग में मिलने पर रानी पदमावत अपने प्रण को छोड़ देती है। और अपने मिलन को ब्रह्मज्ञान मानकर स्वयं को कृष्णा तथा रणदीप को मन की संज्ञा देती है। नागेंद्र ने सहयोग के लिए गुलाब सिंह व साथी कलाकारों का भी आभार जताया। वहीं मुख्यअतिथि बृज शर्मा ने कहा कि हरियाणा के पं लख्मीचंद, जिन्हें सूर्यकवि की उपाधि मिली हुई है, अपनी रागनियों में जीवन का सार लिखते थे। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद के सहायक लेखाकार धर्मपाल, लेखा सहायक रविंद्र कुमार, स्टेनो जैकी शर्मा, भंडारपाल देवीदत्त, नीरज सेठी सहित अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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