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भाकियू द्वारा पुतला फूंकने का विवाद गहराया:बेदी के समर्थन में हुई महापंचायत, भाकियू नेताओं को माफी मांगने का दिया अल्टीमेटम

शाहाबादएक महीने पहले
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  • बेदी ने शुक्रवार तक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है
  • माफी न मांगी तो समाज के साथ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे

रविवार को पूर्व राज्यमंत्री और सीएम के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी के घर के बाहर भाकियू द्वारा पुतला फूंकने को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार को हरमिलापी धर्मशाला में बेदी के समर्थन में महापंचायत बुलाई गई।

इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। बेदी ने आरोप लगाया कि भाकियू के दो पदाधिकारी जानबूझकर उन्हें टारगेट कर रहे हैं। बेदी ने दोनों को शुक्रवार तक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। माफी न मांगी तो समाज के साथ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।

भाकियू ने फूंके थे पुतले

बता दें कि भाकियू ने दशहरा पर बेदी के निवास के बाहर पीएम व सीएम के पुतले फूंके थे। पहले कहीं और पुतला फूंकने की प्लानिंग थी, लेकिन पुलिस प्रशासन के मुस्तैद होने के चलते आनन-फानन में भाकियू ने रणनीति बदल कर बेदी के निवास के बाहर पुतले फूंके। पुतलों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में लेकर आए थे।

सदमे में है परिवार

महापंचायत में कृष्ण बेदी ने कहा कि कहा कि जिस तरह से रविवार को उनके घर के समक्ष नंगा नाच किया गया और उन्हें अपशब्द बोले गए इससे उनका पूरा परिवार सदमे में है। उन्होंने कहा कि वह सरकार में मुख्यमंत्री के साथ तो इसमें उनका क्या कसूर है। वह सीमाओं में बंधे हैं।

उन्होंने शाहाबाद की जनता को अपना माना और कहा था कि वह और उनकी पत्नी की अंतिम सांस शाहाबाद में होगी। यही उनकी सबसे बड़ी गलती है क्योंकि अब तक जो भी एमएलए बनते रहे हैं, वह शाहाबाद से एमएलए बनकर चंडीगढ़ जैसे स्थानों पर रहते रहे।

बेदी बोले- दो भाकियू पदाधिकारी कर रहे टारगेट, सदमे में है उनका परिवार

हर मामले में घसीटते हैं, शाहाबाद में रहना मुश्किल किया - बेदी

शाहाबाद में रहने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि किसी भी मामले में कोई भी घटना घटित होती है तो यह लोग सबसे पहले उनके पीछे पड़ जाते हैं। चाहे वह शुगर मिल में खराबी होने के कारण मिल बंद होने की बात हो या सूरजमुखी और धान की खरीद के बारे में बात हो हर बात की जिम्मेदारी उनके ऊपर डाल दी जाती है।

वोटिंग के समय भी जब मशीनों के बदले जाने का शोर हुआ तब भी उनके घर का ही घेराव किया गया। कृष्ण बेदी ने कहा कि कुछ लोगों ने आतंक का माहौल बना रखा है। जिस दिन नारायणगढ़ में एफआईआर हुई उस दिन उनके ससुर की मौत हो गई थी। तब से उनकी पत्नी बीमार है और पुत्रवधू की डिलीवरी होने वाली है, लेकिन इन लोगों ने ऐसा माहौल बना दिया है कि उनका शाहबाद में रहना ही मुश्किल कर दिया है।

उन्होने आरोप लगाया कि जसबीर मामू माजरा ने उनके घर के गेट पर पुतला फूंका और अपशब्द बोलते हुए मोदी का पुतला फूंका। वे पांच साल विधायक रहे, मंत्री रहे, लेकिन शाहाबाद में अशांति नही फैलने दी। जसबीर और प्रवक्ता राकेश बैंस उन्हें व्यक्तिगत टारगेट कर रहेे हैं। मजबूर होकर महापंचायत बुलाई। उन्होंने किसानों की सूरजमुखी का एक-एक दाना खरीद वाया और अब चीनी बेचने में कोई भी परेशानी नहीं हुई फिर आंदोलन का क्या अर्थ रह जाता है। वह न तो उस संसद के सदस्य है जहां पर यह कृषि बिल पास हुए और न ही उन्होंने कभी भाकियू के खिलाफ एक शब्द भी बोला।

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