पगड़ी बनी आकर्षण का केंद्र:विरासत में लगी प्रदर्शनी में दिखे भारतीय पगड़ी के कई रूप

कुरुक्षेत्रएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती के अवसर पर विरासत हेरिटेज विलेज जीटी रोड मसाना में आयोजित हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन एवं हस्त शिल्प कार्यशाला में भारतीय पगड़ी के रूप देखने को मिले। लोकजीवन में पगड़ी का विशेष महत्व है। पगड़ी की परंपरा का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। पगड़ी जहां एक ओर लोक सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है, वहीं सामाजिक सरोकारों से भी इसका गहरा नाता है।

विरासत हेरिटेज विलेज में भारत की इन्हीं अलग-अलग पगडिय़ों के रंग देखने को मिले। विरासत में लगी पगड़ी प्रदर्शनी में राजस्थानी पगड़ी, महाराजा अकबर की पगड़ी, लक्ष्मी बाई की पगड़ी, पंजाबी पगड़ी, मराठी पगड़ी, भगत सिंह पगड़ी, पठानी पगड़ी, शिवाजी पगड़ी, पृथ्वीराज चौहान पगड़ी, गंगाधर तिलक पगड़ी, हिमाचली पगड़ी, मुल्लादीन पगड़ी, शेख पगड़ी, बीरबल पगड़ी, मुनीम पगड़ी, हरियाणा की बृज, मेवात, खादर, बांगर, बागड़ की पगड़ी को दिखाया गया । इसके साथ ही पगड़ी बंधवाओ, फोटो खिंचवाओ के माध्यम से भी हरियाणवी पगड़ी का प्रचार किया गया।

रामकेश जीवनपुरिया ने मचाई धूम

विरासत हेरिटेज विलेज में आयोजित हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन एवं हस्तशिल्प कार्यशाला में कलाकार रामकेश जीवनपुरिया ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। हट जा ताऊ पाच्छै नै गीत के लेखक रामकेश ने पहले वाली बात न रही और एक बै तो यार मनै बचपन म्है जाण दे गीत गाया। विरासत की ओर से डॉ. महासिंह पूनिया ने रामकेश जीवनपुरिया को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन एवं हस्तशिल्प कार्यशाला में ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रदेशभर की महिला कलाकार भाग ले रही हैं। महिलाओं को विषय-विशेषज्ञ हरियाणा की फुलकारी के विषय में जानकारी दे रहे हैं। डॉ. महासिंह पूनिया, डॉ. रणबीर सिंह, एनआईडी की प्रो. नीतू सिंह ने ग्रामीण महिलाओं को हरियाणा की फुलकारी के अलग-अलग स्वरूपों की जानकारी दी।

लोकजीवन में ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक रूप से लोक परिधानों पर हाथ की कढ़ाई एवं फुलकारी का काम करती हैं। हाथ की कढ़ाई में ग्रामीण महिलाएं लह, छायमा, वायल, चूंदड़ी, खारा, घाघरा, दुकानिया, फरगल, टोपला, थैला, बटुआ, आंगी पर कढ़ाई का काम करती हैं।

चटनी बनाओ प्रतियोगिता में सुखविन्द्र रही प्रथम

विरासत में हरियाणवी महिलाओं की चटनी प्रतियोगिता कराई गई। इसमें सभी महिलाओं ने कुंडी सोट्टे के साथ प्याज, पुदीने, धनिया, मरुए, टमाटर की चटनी बनाई। चटनी प्रतियोगिता में लक्ष्मी पपोसा, सरोज पपोसा, वीरमति, उषा शर्मा अंबाला, संतोष, सरिता समालखा, रेनू दुहन जींद सहित कई महिलाओं ने हिस्सा लिया।

चटनी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर करनाल की सुखविंदर रही। सुखविंदर की चटनी सबसे स्वादिष्ट पाई गई। विरासत की ओर से विजेता को 1100 रुपए का पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर निर्णायक मंडल में डॉ. रणबीर सिंह, डॉ. महासिंह पूनिया शामिल रहे।

खबरें और भी हैं...