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चातुर्मास:मांगलिक कार्य के लिए त्रिबल शुद्धि से निकालने चाहिए मुहूर्त

कुरुक्षेत्र15 दिन पहले
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  • मांगलिक कार्य पर ज्योतिषियों की अलग-अलग राय, विष्णु रहते हैं निंद्रा में, वैज्ञानिक व आध्यात्मिक का कारण भी

चातुर्मास में कई लोग मांगलिक कार्य नहीं करते। इस दौरान मांगलिक कार्य करने को लेकर ज्योतिषियों में भी अलग-अलग मत हैं। कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि चौमासे में मांगलिक कार्य पर किसी तरह का प्रतिबंध किसी ग्रंथ में नहीं है। वहीं कई ज्योतिषी कहते हैं कि चौमासे में मांगलिक कार्य न करने बारे प्राचीन मान्यताएं हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चार माह तक चातुर्मास है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु पाताल लोक में जाकर विश्राम करते हैं।

ऐसे में सृष्टि का कार्य भगवान शिव देखते हैं। इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं होते। जैनमुनि व संत-महात्मा भी किसी एक ही जगह रहकर चातुर्मास व्रत करते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की दशमी तक श्रीहरि क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिंद्रा में विश्राम करते हैं। इस बार 15 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर पुन: उनका जागरण होगा। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। उसके बाद मांगलिक कार्य शुरू होंगे।

चार महीनों में कई मुहूर्त : डॉ. रामराज के मुताबिक जुलाई में 15 दिन शादी की शुभ तिथियां है। इसमें 21,22, 23,25, 26,28, 29,30 और 31 शुभ है। ऐसे ही अगस्त में 2,3,4, 11,12,13, 14,17,19,20,22,24,25,30 और 31 शुभ दिन है।सितंबर में 1,8, 9,10,14,17 और 18 है। अक्टूबर में 7, 8, 13,14,18,19,20,21,23,24 और 25 है। नवंबर में 1, 7, 8, 11, 12, 13 व अन्य कई मुहूर्त है।

चातुर्मास में नहीं मांगलिक कार्य : मिश्रा
दुर्गा देवी मंदिर पिपली के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा के मुताबिक चातुर्मास में भगवान विष्णु के विश्रामावकाश में होने से विवाह व मुंडन जैसे मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते। क्योंकि तब भगवान विष्णु के साथ देवी-देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिलता। श्री रामचरित मानस और श्री वाल्मीकि रामायण में भी वर्णित है कि चातुर्मास के कारण भगवान राम ने योग, साधना और तपस्या की।

विष्णु देवशयनी एकादशी से देव प्रबोधिनी तक, भगवान शिवजी महाशिवरात्रि तक और भगवान ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक निवास करते हैं। चातुर्मास का आध्यात्मिक कारणों से महत्व है। वर्षा के कारण इस काल में सूर्य और चंद्रमा की शक्ति कमजोर होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से चातुर्मास में जल संबंधित संक्रमण की संभावना होती है।

चौमासे में भी हो सकते हैं विवाह जैसे कार्य : कौशिक
वहीं ज्योतिषी डॉ. रामराज कौशिक का कहना है कि इस दौरान शुभ तिथि न होना इसकी वजह नहीं है। बल्कि बरसात में विवाह आदि में खलल पड़ने से बचने को लोग ऐसे कार्य नहीं करते। चातुर्मास में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल , जम्मू कश्मीर आदि क्षेत्रों में सैकड़ों वर्षों से परंपरानुसार विवाह आदि मंगल कार्य किए जा रहे हैं। मुहूर्त कारों ने भी स्थानीय परम्पराओं को आदर देने की अनुमति दी है।

चिंतामणि, पीयूष धारा वृहत संहिता में वराह का वाक्य है कि देशाचारस्तवादादो विचिन्तय:,देशे देशे या स्थिति: सैव कार्य। विवाह जैसा कार्य में लोग अपनी सुविधा अनुसार किसी खास तारीख पर साहा निकलवाते हैं। ऐसे में ज्योतिषी को चाहिए कि पहले त्रिबल शुद्धि करके शादी की तारीख निकालें। शास्त्रों में कहा है कि केंद्र तरीकों में शुभ ग्रह हो और सूर्य, गुरु,चन्द्र बल सही हो तो शुद्ध विवाह मुहूर्त होता है। मार्तण्ड पंचांग व पंचांग दिवाकर में कई शुभ मुहूर्त हैं।

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