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पूर्णिमा व अमावस्या का विशेष महत्व:इस साल में एक ही सोमवती अमावस्या, 11 व 12 को, इस दिन स्नान और पिंडदान का विशेष महत्व

कुरुक्षेत्र2 दिन पहले
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इस साल सिर्फ एक ही सोमवती अमावस्या पड़ रही है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा व अमावस्या का विशेष महत्व है। हर माह के कृष्ण पक्ष की आखिरी तारीख को अमावस्या आती है। इस बार कृष्ण पक्ष की अमावस्या 12 अप्रैल को है। इस दिन सोमवार होने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस सोमवार के बाद पूरे वर्ष सोमवती अमावस्या नहीं होगी। जबकि पहले कई बार सोमवती अमावस्या वर्ष में पड़ती थी।

सोमवती अमावस्या का महत्व : गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डाॅ. रामराज कौशिक ने बताया की सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। इस दिन दान करने से घर में सुख-शांति आती है।

सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त- अमावस्या तिथि आरंभ-11 अप्रैल दिन रविवार को सुबह 6 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 12 अप्रैल दिन सोमवार को सुबह 08 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगी। चैत्र अमावस्या पर व्रत रखकर कई धार्मिक कार्य किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत अवश्य रखना चाहिए। चैत्र अमावस्या पर नदी, जलाशय या कुंड में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों का तर्पण करें।

पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें। इस दिन यथाशक्ति अन्न, गौ, स्वर्ण और वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक और शनि देव को नीले पुष्प, काले तिल और सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। इस दिन ओम का उच्चारण करें। सोमवार का दिन शिव की आराधना का विशेष दिन होता है। ऐसे में इस दिन शिव की पूजा का और भी शुभ फल प्राप्त होता है।

अमावस्या के दिन न करें ये काम

कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिन्हें इस दिन वर्जित माना है। डॉ. कौशिक के मुताबिक अमावस्या के दिन श्मशान घाट पर जाना निषेध है। इस दिन भूल से भी देर तक न सोएं। दंपत्तियों को इस दिन संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। शनिवार के अलावा किसी भी दिन पीपल को छूना वर्जित माना है। मांसाहारी खाने परहेज रखना चाहिए। इस दिन बाल काटने, दाढ़ी बनाने या नाखून काटने की भी मनाही होती है।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि : इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। यदि घर में गंगाजल हो तो नहाने के पानी में थोड़ा अवश्य मिला लें। इसके बाद नए वस्त्र पहनकर प्रभु की आराधना करें। इसके बाद ताम्बे के लोटे में पवित्र जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें। उपवास करें और किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दें। महिलाएं पीपल के पेड़ में दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करें। पीपल में 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करें और संतान व पति की लंबी आयु की इच्छा करें।

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