कार्यशाला:सांगवान ने कहा - सूचना के अधिकार का उद्देश्य भ्रष्टाचार को रोकना

कुरुक्षेत्र2 महीने पहले
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केयू के सीनेट हॉल में मंगलवार को सूचना के अधिकार पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें राज्य सूचना आयुक्त हरियाणा अरुण सांगवान ने कहा कि किसी भी स्वरूप में कोई भी सामग्री सूचना है। सूचना का अधिकार नियम नागरिकों को प्रशासन के सभी स्तरों पर सूचना हासिल करने का व्यवहारिक अधिकार प्रदान करता है। यह अधिनियम काफी विस्तृत है।

इससे पहले कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा व मुख्य वक्ता अरुण सांगवान ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। अरुण सांगवान ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता के लिए सूचनाएं जरूर दें, सूचनाओं का दुरुपयोग करने वालों को नजर अंदाज करें। अगर सूचना उपलब्ध नहीं है तो उसके संकलन सृजन भी नहीं करना चाहिए।

उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम को एक संस्थान के नजरिए से प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस अधिनियम का उद्देश्य जन संबंधी मामलों में पारदर्शिता को बढ़ाना और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार को रोकना व सुशासन व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर नकेल कसना एवं जवाबदेही तय करना इसका मुख्य उद्देश्य है। एक संस्थान के नजरिए से यह जरूरी है कि हम सूचना के अधिकार कानून का पूरी ईमानदारी के साथ पालन करें।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 को आरटीआई अधिनियम लागू हुआ था। इस मौके पर उन्होंने आरटीआई अधिनियम की विभिन्न धाराओं के बारे में बताया। केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि सूचना का अधिकार नियम एक महत्वपूर्ण साधन है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए नागरिकों की क्षमता को बढ़ाता है।

उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता, कुशलता और जवाबदेह बनाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम एक बहुत बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की कमी से वजह से हम आरटीआई का जवाब देने में असमंजस में रहते है। डॉ. सुरेंद्र जागलान, प्रो. दलीप, डॉ. नीरज, डॉ. सुशील और डॉ. रमेश सिरोही मौजूद रहे।

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