पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

विश्व पर्यावरण दिवस:प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर नई पीढ़ी के लिए बचाएं पर्यावरण: प्रो. सोमनाथ

कुरुक्षेत्र9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
कुरुक्षेत्र| व्याख्यान में भाग लेते विद्वान।   - Dainik Bhaskar
कुरुक्षेत्र| व्याख्यान में भाग लेते विद्वान।  
  • केयू में यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल ने करवाया वेबिनार

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल की ओर से पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि अगर किसी देश की जमीन की उर्वरक शक्ति खत्म होती है तो देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करना जरूरी है। कुलपति प्रो. सोमनाथ ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र से सीखने की जरूरत है कि कैसे कम लागत से प्राकृतिक तरीके से भी खेती की जाए। उन्होंने बताया कि प्रयोग की गई भवन और सड़क सामग्री कैसे प्रयोग करें व सीमेंट बनाने के लिए कम प्रदूषण करने के उपायों को सोचना चाहिए।

कुलपति ने कहा कि हम जिस ढंग से फेस मास्क, पीपीई किट और सीरींज लापरवाही से खुले में फैंक रहे हैं, इससे हमें बहुत नुकसान होगा। उन्होंने कहा जिस समस्या को इंसान ने पैदा किया है, उसका समाधान भी हमें ही निकालना होगा। सड़क के लिए तारकोल, बजरी के साथ-साथ प्लास्टिक का प्रयोग करने से गुणवत्ता भी अधिक होगी और एक किलोमीटर सड़क बनाने में एक टन प्लास्टिक थैलों का प्रयोग हो पाएगा।

मुख्य वक्ता प्रो. एसके चक्रवर्ती ने बताया कि हमें हर वह कार्य करना होगा जिससे पृथ्वी को रहने लायक बनाया जा सके। उन्होंने कूड़ा निपटान के लिए छह प्रकार के अलग वेस्ट बताए, जिसमें कांच, प्लास्टिक, एल्यूमिनियम, गत्ता, कागज और खाने पीने का सामान है। उन्होंने बताया कि अगर हम कूड़े को इन छह भागों में अलग-अलग रखते हैं तो कूड़ा निपटान करने में किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं होगी।

उन्होंने बताया कि एक ईमेल को भेजने में लगभग 40 ग्राम सीओटू पैदा होती है। ई-मेल को भेजने में जितनी बिजली इस्तेमाल हुई वह थर्मल पावर से जनरेट की गई है ना कि सोलर पावर से। प्रो. चक्रवर्ती ने कहा कि अगर हम धरती को बचाना चाहते हैं तो हमें पेड़ पौधे तो लगाने ही होंगे।

इसके अलावा हमें बिजली का कम उपयोग और अपने रहन-सहन में जहां भी एनर्जी का उपयोग हो रहा है उसे कम करना होगा। हमें पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग करने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालय में प्रथम कक्षा से पांचवीं कक्षा तक प्रत्येक विद्यार्थी से एक-एक पौधा लगवाया जाए और उस पौधे पर उस विद्यार्थी का नाम लिख दिया जाए। ताकि सभी बच्चे अपने-अपने पौधों का ख्याल रखें। इस अवसर पर स्कूल के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. मीत मोहन, प्रो. शुचिस्मिता, नीतिका और दीक्षा मौजूद रही।

खबरें और भी हैं...