प्राचीन सरस्वती नदी इतिहास का सर्वे:हिमाचल प्रदेश से लेकर गुजरात तक किया जाएगा सरस्वती नदी पर सर्वे

कुरुक्षेत्र18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
सर्वे के बारे में जानकारी देते धुम्मन सिंह। - Dainik Bhaskar
सर्वे के बारे में जानकारी देते धुम्मन सिंह।
  • लगाएंगे पता-बहाव स्थल के नीचे कहां-कहां है पैलियो चैनल, अब भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग करेगा लुप्त हो चुकी प्राचीन सरस्वती नदी इतिहास का सर्वे

देश की महान नदियों में शामिल प्राचीन एवं पवित्र सरस्वती नदी के परत दर परत इतिहास का सर्वे किया जाएगा। यह सर्वे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग सहित देश के जाने माने भू वैज्ञानिक करेंगे। सर्वे की रिपोर्ट वर्ष 2022 तक सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के बाद ही पवित्र सरस्वती नदी के अनछुए पहलुओं का पता चल सकेगा। सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने यह खुलासा किया।

बुधवार को केयू सरस्वती एक्सीलेंट रिसर्च सेंटर के सभागार में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, इसरो व ऑनलाइन प्रणाली से जुड़े वैज्ञानिकों की मीटिंग हुई। बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की प्रोजेक्ट निदेशक डॉ. दिपाली कपूर, सीनियर वैज्ञानिक मनोज शुक्ला, सीनियर वैज्ञानिक हर्ष तिवारी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सरस्वती एक्सीलेंस शोध केंद्र के निदेशक डॉ. एआर चौधरी, ऑनलाइन प्रणाली से जुड़े इसरो के पूर्व महाप्रबंधक जेआर शर्मा, उप निदेशक बीके बांदरा, इसरो के सेवानिवृत्त निदेशक एके गुप्ता, सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के शोध अधिकारी डॉ. दीपा व जीएस गौतम ने प्राचीन सरस्वती नदी को लेकर किए जा रहे सर्वे पर तकनीकी व वैज्ञानिक दृष्टि से चर्चा की।

यहां तक होगा सर्वे: बोर्ड के उपाध्यक्ष ने बताया कि बोर्ड चेयरमैन व मुख्यमंत्री मनोहरलाल के मार्गदर्शन में प्राचीन सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर प्रवाहित करने के प्रयास सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। नदी को प्रवाहित करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, इसरो व देश के जाने माने भूवैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

वैज्ञानिक हिमाचल, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात राज्यों में सरस्वती नदी के उद्गम स्थल से लेकर गुजरात तक के पूरे चैनल का सर्वे करेंगे। इन राज्यों में यह तलाश किया जाएगा कि अभी भी धरती के नीचे किस-किस जगहों पर पानी के चैनल हैं। इन चैनल की उत्पत्ति और अभी तक धरती के नीचे बहने के क्या कारण रहे हैं। इसके साथ ही मिट्टी की परत दर परत पर भी शोध किया जाएगा कि किस तह पर सरस्वती नदी प्रवाहित होने के साक्ष्य हैं। इस पवित्र नदी की गहराई कितनी रही होगी।

अगले साल आएगी सर्वे की रिपोर्ट

वैज्ञानिकों की तरफ सर्वे कर पवित्र सरस्वती नदी की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2022 तक बोर्ड व सरकार को सौंपा जाएगा। बता दें कि हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के साथ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के बीच वर्ष 2018 में एमओयू भी साइन हुआ है। उन्होंने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के बाद सबसे प्राचीन एवं पवित्र सरस्वती नदी के इतिहास के बारे मे जानकारी मिलेगी। इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय भी जुडेगा। इन शोध कार्यों से देश की युवा पीढ़ी को सरस्वती नदी के ऐतिहासिक पहलुओं से आत्मसात करने का अवसर भी मिलेगा।

खबरें और भी हैं...