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  • The Saraswati River Used To Flow In Haryana Till The 15th Century; Disclosure In Samples Excavated From The Foothills Of Himachal Pradesh To Anupgarh District Of Rajasthan

शोध में खुलासा:हरियाणा मेें 15वीं शताब्दी तक बहती थी सरस्वती नदी; हिमाचल प्रदेश की तलहटी से लेकर राजस्थान के अनूपगढ़ जिले से खुदाई कर लिए सैंपल

कुरुक्षेत्रएक महीने पहलेलेखक: विकास बत्तान
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शोध कर रहे प्रो. चौधरी ने बताया कि  हरियाणा में सरस्वती नदी 15वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों तक प्रवाहित हो रही थी। - Dainik Bhaskar
शोध कर रहे प्रो. चौधरी ने बताया कि हरियाणा में सरस्वती नदी 15वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों तक प्रवाहित हो रही थी।
  • 15वीं शताब्दी के बाद सूख गई थी सरस्वती नदी

हड़प्पा कालीन सभ्यता भी सरस्वती नदी के किनारे ही पनपी थी। यह खुलासा 2015 से लेकर 2021 तक सरस्वती नदी की साइट की खुदाई से लिए सैंपल और कार्बन डेटिंग के शोध के आधार पर हुआ है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में स्थापित सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र के निदेशक प्रो. एआर चौधरी और उनकी टीम की ओर से किए इस शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ आर्कियोलोजिकल प्रोस्पेक्शन ब्रिटेन ने प्रकाशित किया है।

शोध में प्रो. चौधरी ने सरस्वती नदी की साइट से जुटाए तथ्यों के आधार पर प्रमाणित किया कि सरस्वती नदी 14 हजार साल से पहले से बह रही थी। यह नदी 15वीं शताब्दी तक बही और इसके बाद सूख गई। उन्होंने यह शोध कार्य हिमाचल प्रदेश की तलहटी में हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित आदि बद्री तीर्थ से लेकर राजस्थान के अनूपगढ़ के साथ भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में किया।

प्रो. चौधरी ने कहा कि सरस्वती नदी के विषय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धारणा थी कि घग्घर नदी और सतलुज नदी मिलकर जो जलप्रवाह बनाती थी, उसे ही प्राचीन काल में सरस्वती नदी कहते थे। ऐसे में सरस्वती नदी को मिथ्या साबित करने के प्रयास हुए।

सेटेलाइट इमेज से मिले प्रवाह मार्ग के अनुसार कराई खुदाई
2005 से सरस्वती नदी पर शोध कर रहे प्रो. चौधरी ने बताया कि शोध में सामने आया कि हरियाणा में सरस्वती नदी 15वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों तक प्रवाहित हो रही थी। उन्होंने बताया कि सबसे पहले सरस्वती नदी के प्रवाह मार्ग को सेटेलाइट इमेज से चिह्नित किया गया। इसके बाद इस प्रवाह मार्ग पर कई जगह गहरे बोर गड्ढे खोदकर उनके सैंपल की कार्बन-14 डेटिंग और ओएसएल डेटिंग करवाई गई।

इस कार्य में इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलरेटर सेंटर, नई दिल्ली एवं वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की लैब में टेस्टिंग का काम किया गया। ओएसएल डेटिंग और कार्बन-14 डेटिंग के लिए 270 सैंपल में से दो दर्जन से अधिक सैंपल का चयन किया। इन सैंपल की कार्बन डेटिंग से पता चला कि सरस्वती नदी 15 हजार वर्ष पूर्व से हरियाणा में प्रवाहित हो रही थी। यह नदी 1402 ईस्वी यानि 15वीं शताब्दी तक प्रवाहित होती थी।

उन्होंने कहा कि अब तक वैज्ञानिकों का मत था कि सरस्वती नदी ईसा से 500 वर्ष पूर्व में सूख गई थी। इस शोध में यह तथ्य सामने आया कि हरियाणा क्षेत्र के भूखंड में सरस्वती नदी 14 हजार वर्ष पूर्व और उससे भी पहले से प्रवाहित हो रही थी। इस नदी का जल स्तर इतना अधिक था कि इसके बहाव क्षेत्र की औसत चौड़ाई 1.5 किलोमीटर से 13 किलोमीटर तक मिली है। सरस्वती नदी और इसकी वैदिक काल की सहायक नदियां अपया और चौतंग का एक व्यापक जाल पूरे हरियाणा में फैला था, जोकि 2,984 किलोमीटर लंबा था।

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