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हरियाणा के होनहार:कुरुक्षेत्र की महक ने यूपीएससी की तैयारी के लिए छोड़ा 14 लाख का सैलरी पैकेज, अब पाई 393वीं रैंक, पानीपत की मधुमिता को 86वां स्थान

कुरुक्षेत्र2 महीने पहले
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माता-पिता के साथ महक।
  • कड़ी मेहनत, लगन और अपना लक्ष्य निर्धारित कर युवाओं ने हासिल किया मुकाम, असफलता से रुके नहीं
  • मधुमिता बोलीं- घरवालों की सोच अच्छी थी, कहा था- नौकरी लगने तक कोई शादी की बात नहीं करेगा

प्रदेशभर के युवाओं ने कड़ी मेहनत और लक्ष्य निर्धारित कर सफलता को पाया है। यूपीएससी क्लियर करने वाले होनहारों का कहना है कि वे असफलता से डरे नहीं। सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। कुरुक्षेत्र की बेटी ने महक ने 14 लाख रुपए के सैलरी पैकेज को छोड़कर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और मंगलवार को आए यूपीएससी के परिणाम में 393वीं रैंक हासिल की है।

कुरुक्षेत्र की भीम कॉलोनी की महक ने एनआईटी से 2013 में बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई पूरी की। सॉफ्टवेयर कंपनी में गुरुग्राम में तीन साल तक नौकरी की। इसके बाद महक ने मन में सिविल सर्विस की तैयारी की ठानी। घर आकर पिता से मन की बात सांझा की तो पिता धूलगढ़ गुलडेहरा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य दया सिंह स्वामी ने बेटी को नौकरी छोड़कर परीक्षा की तैयारी करने को कहा। महक ने जब नौकरी छोड़ी तो सैलरी पैकेज 14 लाख रुपए सालाना था।

2016 के अंत में यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी घर पर शुरू की। यूपीएससी की मेन परीक्षा तक 2017-18 में पहुंच गई। इसी दौरान एचसीएस की परीक्षा को अपने बीसी वर्ग की बजाय जनरल वर्ग में 19वां रैंक हासिल कर पास किया। महक ने बताया कि उसने घर पर रहकर ऑनलाइन स्टडी मेटीरियल से पढ़ाई की। अधिकतर परीक्षा की तैयारी के नोट्स ऑनलाइन ही मिले। इसके अलावा कुछ नोट्स की जरूरत हुई तो उन्हें दिल्ली से मंगवा लिया।

महक ने कहा कि स्टडी मेटीरियल बहुत अधिक है। ऐसे में हमारे सामने चुनौती उपयोगी मेटीरियल पढ़ने की है। अब सफलता पाकर लग रहा है कि उसकी मेहनत और रिस्क दोनों ठीक रहे। इस दौरान वे सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहीं।

मधुमिता बोलीं- घरवालों की सोच अच्छी थी, कहा था- नौकरी लगने तक कोई शादी की बात नहीं करेगा
पानीपत | सिविल सर्विस में 86वीं रैंक पाने वाली मधुमिता पानीपत की रहने वाली है। सक्सेस से खुश मधुमिता कहती हैं, 'जब यूपीएससी की तैयारी शुरू की तो बगैर किसी इफ एंड बट के करियर को लेकर अपने सारे ऑप्शन बंद कर दिए थे। मेरे घरवालों की सोच भी अच्छी थी। उन्होंने पहले ही कह दिया था कि जब तक छौरी की नौकरी नहीं लागेगी, तब तक शादी-ब्याह की कोई बात नहीं होगी।

मधुमिता कहती हैं कि यूपीएससी के पहले अटेंप्ट में मेन्स एग्जाम क्लियर हुआ था, लेकिन दूसरे में रह गई थी, पर पीछे नहीं हटी, क्योंकि लाइफ में कोई ऑप्शन नहीं बचा था। तैयारी की स्ट्रेटजी बदली और तीसरे अटेंप्ट में जब तक मेन्स का एग्जाम नहीं हुआ था, तब तक फेसबुक, वाॅट्सएप, यू-ट्यूब सब डिएक्टिवेट रखा। बाकी सब चीजें सेकेंडरी थी, प्राइमरी सिर्फ तैयारी थी। तभी आज 86वीं रैंक हासिल की है।

मधुमिता ने अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा दी थी। उसका ऑप्शनल सब्जेक्ट इतिहास था। वे कहती हैं कि यूपीएससी तीसरे अटेंप्ट में क्लियर किया है। पहला अटेंप्ट 2017 में किया था, जिसमें सिर्फ मेन्य क्लियर हुआ था। दूसरा अटेंप्ट 2018 में किया था, जिसमें मेन्स भी क्लियर नहीं हुआ। तीसरा अटेंप्ट 2019 में किया, जिसमें 86वीं रैंक आई है।

प्रदेश के इन युवाओं ने भी हिसार मंडल के आयुक्त की बेटी ने पाई 222वीं रैंकर नहीं देखा।

भिवानी के मुनीश ने तीसरे चांस में मिली 604वीं रैंक
बहल (भिवानी) | मोरकां गांव के मुनीश कुमार ने तीसरे प्रयास में 604वीं रैंक मिली है। पिता सूरत सिंह रणवां ने बेटों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। बीटेक के बाद सॉफ्टवेयर कंपनी में चयन हो गया था। एक साल नौकरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की और प्रतिदिन 10 घंटे तक पढ़ता था।

नाम जैसा काम- अपराजित ने पहले चांस में हासिल की जीत
हिसार | शहर के अपराजित ने अपने नाम के अनुरूप पहले चांस में जीत हासिल की है। उन्हें 174वीं रैंक मिली है। सेक्टर-14 निवासी वकील सुरेश लोहान के एकलौते बेटे अपराजित सफलता के लिए मां की मेहनत को अहम मानते हैं। बताते हैं- मम्मी हिसार के नारनौंद में निजी स्कूल का संचालन करती थीं। केवल मेरी पढ़ाई के लिए उन्होंने स्कूल को छोड़ा। उस वक्त मैं 9वीं कक्षा में था। हिसार में पढ़ता था। मां की गाइडलाइन पर मैंने ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन की। सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी।

सिरसा की कंचन ने 35वीं और ओजस्वी ने हासिल की 284वीं रैंक
सिरसा | कोर्ट कॉलोनी निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट अनिल सिंगला की बेटी कंचन (24) ने 35वीं रैंक हासिल की है। कंचन एनएलयू दिल्ली से लाॅ ग्रेजुएट है। वहां 7 गोल्ड मेडल पाकर विवि में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। कंचन ने कहा- बचपन से सपना था कि कुछ कर दिखाऊं। शहर के ओजस्वी ने 284वां रैंक हासिल करके अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। ओजस्वी का दावा है कि बिना एक्स्ट्रा कोचिंग के घर पर उपलब्ध संसाधनों से ही पढ़ाई और तैयारी करके ये उपलब्धि हासिल की है।

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