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श्रद्धा:उत्तर भारत में आज पिठौरी व भौमवती तो दक्षिण में मनेगी पोलाला अमावस्या

कुरुक्षेत्र18 दिन पहले
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  • इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से होने वाली सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है

सनातन हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार सूर्य और चंद्रमा के एक साथ होने पर यानी जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर शून्य हो जाता है तब अमावस्या की तिथि आती है। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। ज्योतिषि डॉ. रामराज कौशिक के मुताबिक इस अमावस्या पर पितृ तर्पण आदि धार्मिक कार्यों में कुश का प्रयोग किया जाता है इसलिए इसे कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है।

इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से होने वाली सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। आज के दिन कुशा को उखाड़ कर उससे पूरे वर्ष धार्मिक कार्यों में प्रयोग होने वाले मोटक बनाने और कुशा रखने का विधान है। वहीं इस दिन महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु के लिए व्रत भी रखती हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे संतान को लंबी आयु की प्राप्ति होती है। इस साल पिठोरी अमावस्या का पावन पर्व आज 7 सितंबर को है।

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