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चमत्कारी योग बन रहा है:अद् भुत विष्णु श्रृंखला योग में दान की महिमा का विशिष्ट पर्व वामन द्वादशी

कुरुक्षेत्र12 दिन पहले
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  • 17 सितंबर को सुबह 8 बजकर 8 मिनट तक एकादशी तिथि है

अबकी बार वामन द्वादशी पर एक अद्धभुत और चमत्कारी योग बन रहा है। नारद पुराण के अनुसार श्रवण द्वादशी यदि एकादशी और श्रवण नक्षत्र के साथ संपर्क करे तो इस दिन विष्णु श्रृंखला योग बनता है। इस वर्ष 17 सितंबर को सुबह 8 बजकर 8 मिनट तक एकादशी तिथि है और फिर सारा दिन द्वादशी तिथि है और इन दोनों तिथियों के साथ श्रवण नक्षत्र का संपर्क है। अतः ये पूर्ण विष्णु श्रृंखला योग बन रहा है। ज्योतिष के अनुसार इससे इसका महत्व शास्त्रों के अनुसार कई गुणा हो गया है। ज्योतिषी डॉ. रामराज कौशिक के मुताबिक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी को वामन द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन का जन्म इसी दिन श्रवण नक्षत्र में हुआ था। इस दिन भक्त उचित अनुष्ठान के साथ सुबह जल्दी श्री हरि की पूजा करते हैं। इस दिन चावल, दही आदि का दान करना शुभ माना जाता है। शाम को भक्तों को परिवार के सदस्यों के साथ वामन कथा को सुनना चाहिए और सभी के बीच प्रसाद वितरित करना चाहिए। भक्तों को उपवास रखना चाहिए और भगवान वामन को प्रसन्न करने और सभी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उचित अनुष्ठानों के साथ पूजा करना चाहिए।

वामन कथा : श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार सतयुग में चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वादशी को श्रवण नक्षत्र में अभिजित मुहूर्त में ऋषि कश्यप और देवी अदिति के यहां भगवान वामन का अवतार हुआ था। ऋषि कश्यप उनका उपनयन संस्कार करके उन्हें बटुक ब्रह्मण बनाते हैं। महर्षि पुलह वामन को यज्ञोपवीत, अगस्त्य मृगचर्म, मरीची पलाश दंण, अंगिरस वस्त्र, सूर्य छत्र, भृगु खडाऊं, बृहस्पति कमंडल, अदिति कोपीन, सरस्वती रुद्राक्ष और कुबेर भिक्षा पात्र भेंट करते हैं।

वामन अवतार पिता से आज्ञा लेकर राजा बलि के पास दान मांगने के लिए जाते हैं। वहां राजा बलि से तीन पग धरती मांग लेते हैं। ब्राह्मण समझकर राजा बलि दान दे देते हैं। शुक्राचार्य इसके लिए बलि को सतर्क भी करते हैं लेकिन तब बलि इस पर ध्यान नहीं देता। फिर वामन भगवान विराट रूप धारण कर दो पग में त्रिलोक्य नाप देते हैं। तब पूछते हैं राजन अब मैं अपन तीसरे पैर कहां रखूं? राजा बली कहते हैं कि भगवन अब तो मेरा सिर ही बचा है आप इस पर रख दीजिए। राजा की इस बात से वामन भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे चिरंजीवी रहने का वरदान देकर पाताललोक का स्वामी बना दिया और सभी देवताओं को उनका स्वर्ग लौटा दिया।

हिंदू शास्त्रों में वामन जयंती महत्व
कौशिक के अनुसार हिंदू शास्त्रों के अनुसार श्रवण नक्षत्र होने पर वामन जयंती का महत्व बढ़ जाता है। भक्तों को भगवान वामन की मूर्ति बनानी चाहिए और उचित अनुष्ठान के साथ उनकी पूजा करनी चाहिए। जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करता है, उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन माता अदिति के गर्भ से भगवान विष्णु ने वामन देव के रूप में अवतरण लिया और ब्राह्मण-ब्रह्मचारी का रूप धारण कर लिया।

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