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ऑनलाइन परीक्षा:हाईटेक सॉफ्टवेयर से केयू सिर्फ दूरवर्ती पर रखेगी नजर, रेगुलर परीक्षाओं को रखा बाहर

कुरुक्षेत्र3 दिन पहलेलेखक: मुनीष मुंडे
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  • केयू ने एक करोड़ में खरीदा नकल रोकने का सॉफ्टवेयर, इस सत्र में रेगुलर में नहीं होगा यूज

परीक्षा में नकल रोकने के लिए केयू ने करीब एक करोड़ में खास साफ्टवेयर खरीदा है। साफ्टवेयर से परीक्षा में नकल रुकेगी या विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ेगी यह तो साफ्टवेयर के प्रयोग में आने के बाद ही पता चलेगा। इसका प्रयोग पहले दूरवर्ती परीक्षाओं में किया जाएगा। इस सत्र में रेगुलर में इस साफ्टवेयर को यूज नहीं किया जाएगा। 16 जुलाई से पीजी कक्षाओं की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। जबकि 22 जुलाई से दूरवर्ती, प्राइवेट, एडिशनल और इंप्रूवमेंट की परीक्षाएं शुरू होंगी।

इन्हीं परीक्षाओं में नकल को रोकने के लिए साफ्टवेयर का प्रयोग किया जाएगा। रेगुलर छात्रों की परीक्षा में इसे यूज क्यों नहीं किया गया, इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। क्योंकि नकल तो दूरवर्ती के साथ रेगुलर के परीक्षार्थी भी कर सकते हैं। दूरवर्ती के तहत केयू में 15 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि केयू कैंपस में रेगुलर के करीब 13 हजार विद्यार्थी है।

वहीं यदि केयू के संपर्क कॉलेजों को भी जोड़े तो विद्यार्थियों की संख्या कई गुणा है। रेगुलर में इसे यूज न करने के पीछे तर्क है कि रेगुलर स्टूडेंट्स के बारे में शिक्षकों को पूरी जानकारी होती है। जबकि दूरवर्ती में हर छात्र-छात्रा की जानकारी रखना संभव नहीं है। इसीलिए विशेष साफ्टवेयर का प्रयोग किया जाएगा। दूसरे रेगुलर में ऑनलाइन परीक्षा में गूगल मीट से नजर रखी जाएगी। अब यह भी सवाल हैं कि जब रेगुलर परीक्षा में गूगल मीट से नजर रखी जा सकती है तो दूरवर्ती में भी यह संभव था।

दिक्कत- इंटरनेट डिस्कनेक्ट होने पर हो सकती है कार्रवाई

ऑनलाइन परीक्षा की पूरी अवधि के दौरान इंटरनेट कनेक्ट होना आवश्यक है। परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को वेब-कैमरे के सामने उपस्थित रहना होगा। ताकि उत्तर-पुस्तिका लिखते समय उसका पूरा दृश्य वेबकैम में दिख सके। केयू प्रशासन पहले ही कह चुका है कि परीक्षा अवधि के दौरान मोबाइल या लैपटॉप बैटरी या अन्य कोई भी समस्या काे समय में छूट के लिए आधार नहीं माना जाएगा। अगर परीक्षा के दौरान वेबकैम व मोबाइल कैमरे के सामने उपस्थित नहीं होने और परीक्षा के दौरान इंटरनेट डिस्कनेक्ट होने पर भी उसके विरुद्ध कार्रवाई हो सकती है। अगर इस दौरान मोबाइल फोन पर किसी का फोन आ जाए। उस स्थिति में भी कार्रवाई हो सकती है। वहीं तीन घंटे तक विद्यार्थी अपनी सीट से भी नहीं उठ सकता। जबकि गांव में नेट कनेक्टिविटी की समस्या का सामना भी करना पड़ेगा।

एक्सपर्ट व्यू- 3-4 घंटे वीडियो कॉल में लगता औसतन 12 जीबी डाटा
अगर आप ऑनलाइन परीक्षा दे रहे हैं तो आपके लिए इंटरनेट बारे जानना जरूरी है। अगर आपके पास इंटरनेट संबंधी जानकारी नहीं है तो आपके द्वारा की गई परीक्षा की तैयारी भी खराब हो सकती है। आपका केस बन सकता है। टेलीकॉम एक्सपर्ट प्रवीण सैनी का कहना है कि चार घंटे की वीडियो कॉलिंग के लिए औसतन 10-12 जीबी डाटा कंज्यूम होता है। लिहाजा परीक्षार्थियों को परीक्षा से पहले अपने नंबर पर अच्छे इंटरनेट पैक वाला रिचार्ज करवाना भी जरूरी होगा।

स्थिति सामान्य- हो सकती थी ऑफलाइन परीक्षा
कोरोना से स्थिति अब सामान्य बन चुकी है। सरकारी व प्राइवेट सभी सेक्टर खुल चुके हैं। स्कूल भी खुल चुके हैं। अब ऐसे में विद्यार्थियों की ऑनलाइन की बजाए ऑफलाइन परीक्षा भी ली जा सकती थी, लेकिन केयू प्रशासन ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन का भी ऑप्शन दिया।

वेबकैम- सिर्फ दूरवर्ती परीक्षाओं पर रखेंगे नजर
केयू परीक्षा शाखा के नियंत्रक डॉ. हुकम सिंह का कहना है कि 22 जुलाई से होने वाली दूरवर्ती परीक्षाओं में विद्यार्थियों पर वेबकैम से नजर रखी जाएगी। वहीं जब उनसे रेगुलर परीक्षाओं में वेबकैम का प्रयोग न होने की बात कहीं गई तो उन्होंने कहा कि इन परीक्षाओं में गूगल मीट से नजर रखी जा रही है।

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