खुले ग्राउंड में रहना खतरे से खाली नहीं / बीकानेर से लाए गए 57 लोग, कइयों के पास खुद का घर नहीं, प्रशासन ने खुले ग्राउंड में होम क्वारेंटाइन किए

57 people brought from Bikaner, many do not have own house, administration quarantines home in open ground
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57 people brought from Bikaner, many do not have own house, administration quarantines home in open ground

  • इन लोगों में 20 महिलाएं और 3 बच्चे भी, बोले- 1-2 दिन में झुग्गियां बना लेंगे

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

अम्बाला. (रवि प्रताप सिंह)राजस्थान के बिकानेर से 57 लोगों को शनिवार सुबह कैंट लाया गया। इन लोगों ने बीकानेर प्रशासन को अम्बाला की 2 कॉलोनियों के एड्रेस देकर कहा था कि उन्हें अम्बाला भेज दें। इसलिए बीकानेर से बस में लाए गए 57 लोगों की थर्मल स्कैनिंग कर इन्हें बब्याल के सैनिक नगर के खुले ग्राउंड में खुले में होम क्वारेंटाइन किया गया। इनके पास अपने घर नहीं हैं लेकिन इन्होंने बताया कि हम लोग 1-2 दिन में अपनी झुग्गियां बना लेंगे। लेकिन खुले ग्राउंड इनका इस तरह रहना खतरा बन सकता है। 

कैंट के बस स्टैंड पर स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को होम क्वारेंटाइन के लिए 6 एंबुलेंस में लाया गया। इसमें 20 महिलाओं के अलावा 3 बच्चे भी शामिल हैं, लेकिन प्रशासन ने इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया कि होम क्वारेंटाइन के लिए पहुंचे इन लोगों में कइयों के पास खुद का घर ही नहीं है। डेहा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले इन लोगों में से 49 ने खुद को सैनिक नगर व 8 ने पारस नगर का बताया था, लेकिन सभी लोग पारस नगर में ही शिफ्ट हो गए जहां अगले 1-2 दिन में वे खुद की झुग्गी बनाने की बात कह रहे हैं। इन्होंने बताया कि रोजगार की तलाश में ये लोग बीकानेर गए थे।

विभागों के बीच दिखी ताल-मेल की कमी

सुबह करीब 10 बजे सैनिक और पारस नगर में होम क्वारेंटाइन के लिए लाए गए इन 57 लोगों की एएनएम पहचान ही नहीं कर पाईं। जबकि होम क्वारेंटाइन के लिए लाए गए ये लोग खुले घूमते रहे। जबकि एएनएम की ये टीम पुलिस कर्मियों के सहयोग से ये काम आसानी से कर सकती थी।

क्वारेंटाइन के लिए पहुंची एएनएम से नोकझाेंक

हाेम क्वारेंटाइन के लिए करीब 11:30 बजे एएनएम कामिनी शर्मा 5 आशा वर्करों के साथ पहुंचीं। 57 लोगों की पहचान के लिए पूछताछ करने लगीं। इस पर डेहा समुदाय के लोग नाराज हो गए और पहचान कराने से इंकार कर दिया। गाली-गलौच करते हुए उन्होंने एएनएम पर कुत्ते से कटवाने की धमकी भी दी। इनका कहना था कि इतना लंबा सफर तय करने के बाद भी हमने सारी जानकारी सुबह बस स्टैंड पर दे दी थी। फिर यहां आकर पुलिस को दी, अब फिर से वही खेल हो रहा है। काफी मशक्कत के बाद भी पहचान न कर पाने के बाद एएनएम दोपहर 1:30 बजे लौट गईं। कामिनी शर्मा ने कहा कि यहां इन्हें 28 दिन के लिए क्वारेंटाइन करने की प्रक्रिया के तहत लाया गया था। अब इनके मुखिया क्रांति कुमार से बात करके इनकी पहचान की जाएगी। अन्यथा पुलिस का सहारा लेना पड़ेगा।

डॉक्टर के 1 घंटा समझाने के बाद बताई पहचान

आशा वर्करों के साथ करीब ढाई बजे मौके पर पहुंचे डॉ. दीपक शर्मा ने क्वारेंटाइन के लिए अपनी पहचान बताने के लिए उन्हें करीब एक घंटा समझाया। तब जाकर वे अपनी पहचान के लिए माने। हालांकि वे पहले डेहा समाज के प्रधान क्रांति कुमार का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। डॉ. दीपक ने बताया कि समझाने से नहीं मानते तो हमें अंत में पुलिस का सहारा लेना पड़ता। हालांकि इन्हें डर था कि पहचान बताने पर इन्हें कहीं और ले जाकर रखा जाएगा। वही डर इनका दूर किया गया।

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