जन संकल्प से हारेगा कोरोना:घर के 7 सदस्य पॉजिटिव हुए, पीपीई किट में डॉक्टरों को देखकर 5 साल का बेटा रोने लगा

अम्बाला सिटी6 महीने पहले
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श्वेता मेहता, अहलुवालिया बिल्डिंग, अम्बाला कैंट  | कोरोना वॉरियर - Dainik Bhaskar
श्वेता मेहता, अहलुवालिया बिल्डिंग, अम्बाला कैंट | कोरोना वॉरियर
  • मेरी रिपोर्ट निगेटिव थी लेकिन बेटे के साथ अस्पताल में ही रही
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां आज पढ़े एक परिवार की कहानी- सभी लोग ठीक होकर घर लौटे तो बिल्डिंग के लोगों ने फूल बरसा स्वागत किया

मेरी सास मम्मी कोमल मेहता को कैंसर था। कीमोथैरेपी के लिए दिल्ली लेकर जाते थे। डॉक्टरों ने कोविड टेस्ट करवाने कहा। उनमें कोई लक्षण थे नहीं, फिर भी सैंपल करवाया। उम्मीद थी कि रिपोर्ट निगेटिव ही रहेगी। यही सोचकर दिल्ली जाने के लिए मम्मी का बैग पैक कर रहे थे। अचानक फोन की घंटी बजी तो पापा अमरनाथ मेहता ने कॉल रिसीव की। फोन सरकारी लैब से था। बताया गया कि मम्मी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव है। हम घबरा गए।

कोविड का नाम सुनकर भी डर लगता था। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि पेशेंट को कोविड अस्पताल में आइसोलेट करने के लिए लेने आ रहे हैं। हमने रिक्वेस्ट की कि हम खुद पेशेंट को सिविल हॉस्पिटल छोड़ने आ रहे हैं, ताकि मोहल्ले में डर का माहौल न हो।

हमने जो बैग दिल्ली जाने के लिए पैक किया था, उसे अब आइसोलेशन के हिसाब से पैक किया। सबकी आंखों में आंसू थे। मम्मी कैंसर की मरीज थी। अगले दिन नौकरानी आई तो उसे वापस भेज दिया। फिर फोन आया कि अभी एम्बुलेंस आएगी और सभी का टेस्ट करवाने के लिए लेकर जाएगी।

एम्बुलेंस ने जैसे ही मोहल्ले में एंट्री कि तो सारा मोहल्ला घबरा गया। कोई छत पर तो कोई खिड़की के पीछे से हमारे घर की तरफ ही झांक रहा था। अब सबकाे पता चल गया था। जितने मुंह उतनी बातें। कोई कह रहा था कि इनके बच्चे हमारे बच्चाें के साथ खेलते हैं, कोई कह रहा था कि ये दिल्ली जाते हैं, वहीं से बीमारी चिपटी होगी। हम सभी एम्बुलेंस में बैठेे। 90 साल से ऊपर की दादी सास शीला मेहता और मेरा 5 साल का बेटा सानव पूछते रहे कि हम कहां जा रहे हैं। टेस्ट करवाकर वापस आ गए। सभी घर में आइसोलेट हो गए। डर इतना था कि उस रात किसी ने खाना नहीं खाया। मम्मी की टेंशन थी और दूसरी तरफ अपनी टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार।

अस्पताल में आइसोलेट मम्मी ने सबका हाैसला बढ़ाया कि यहां सब ठीक है। अगली सुबह बे-मन से नाश्ता किया। दाेपहर को लैब से फोन आया-ससुर अमरनाथ, बेटा सनव, पति मानिक मेहता, दादी सास शीला मेहता, कजन दिव्या मेहता और चाची पूनम मेहता पाॅजिटिव अाए थे। मैं, बेटी सानवी और चाचा अनिल मेहता की ही रिपोर्ट निगेटिव थी। अब पूरी बिल्डिंग के लाेगाें का काेराेना टेस्ट हाेगा।

उनकी बात सुनते ही सभी के पैराें तले जमीन खिसक गई। हेल्थ डिपार्टमेंट के लाेग पीपीई किट पहनकर लेने आए तो मेरा और बेटे का राे-राेकर बुरा हाल हो गया। जैसे-तैसे बेटे को हाथ में खिलाैना देकर एंबुलेंस में बैठाया। अस्पताल में पूरी रात बेटा राेता रहा। हसबैंड का फोन आया कि काेराेना से तो कुछ न हो लेकिन राे-राेकर सानव को बुखार हो जाएगा। फिर हमने परमिशन ली कि मैं और मेरी बेटी भी अस्पताल में ही आइसोलेशन में रहेंगे क्याेंकि बेटा मां के बिना अकेला नहीं रह सकता। अगले दिन हम दाेनाें भी चले गए। अब पूरा घर खाली हो गया। बिल्डिंग में पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। बिल्डिंग से 120 सैंपल हुए। शुक्र था कि सभी निगेटिव रहे।

अस्पताल में बच्चे अक्सर कुछ ना कुछ खाने की जिद्द करते। तब मेरे चाचा की बेटी रिद्धि व उसके हसबैंड साहिल भूषण बच्चाें के लिए बाहर का सामान चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट व टाॅयज दे जाते। हमारे डीपीएस स्कूल की प्रिसिंपल अमिता ढाका ने मोरल सपोर्ट दिया। हम वहां काढ़ा, गर्म पानी लेते रहते। 5 दिन बाद दाेबारा टेस्ट हुआ तो सभी की रिपाेर्ट निगेटिव आ गई।

हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गीता गाेपाल की तरफ से परिवार के के लिए यज्ञ किया गया। जब हम वापस लाैटे तो बिल्डिंग के लाेगाें व गीता गाेपाल की तरफ से फूल बरसाकर स्वागत किया गया। सास मम्मी ने काेराेना को मात दे दी थी लेकिन दुर्भाग्य रहा कि 4 जनवरी को कैंसर के कारण उनका देहांत हो गया।

मेरी सभी से अपील है कि उस समय के काेराेना और अब में जमीन आसमान का फर्क है। नए वायरस की वजह से अब हर तरफ भयानक मंजर है, जो दिल को छलनी कर रहा है। इसलिए सभी साेशल डिस्टेसिंग का पालन करें। साेशल मीडिया व अफवाहें फैलाने वाली खबराें से दूर रहें।श्वेता मेहता, अहलुवालिया बिल्डिंग, अम्बाला कैंट | कोरोना वॉरियर

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