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  • 82 year old Omprakash Veerji, Who Started The Famous Rambazar By Starting A Business From 200 Rupees, Is No More

स्मृति शेष:200 रुपए से बिजनेस शुरू कर मशहूर रामबाजार को खड़ा करने वाले 82 वर्षीय ओमप्रकाश वीरजी नहीं रहे

अम्बाला6 महीने पहले
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  • छोटी सी उम्र से आरएसएस से जुड़े थे, इमरजेंसी के समय जेल भी गए, स्वतंत्रता सेनानी की उपाधि मिली

कैंट में हिल रोड पर पुल चमेली के पास मशहूर रामबाजार के संस्थापक ओमप्रकाश गुप्ता का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से दिल व शुगर की बीमारी से ग्रस्त थे लेकिन पूर्ण रूप से स्वस्थ थे। बुधवार को सुबह सांस लेने में तकलीफ होने पर सिविल अस्पताल के कोविड आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। जहां देर शाम निधन हो गया।

वीरवार को कोविड प्रोटोकॉल से कैंट रामबाग में संस्कार किया गया। शहजादपुर में 25 जनवरी 1939 को बसंत पंचमी के दिन पैदा हुए ओमप्रकाश गुप्ता ने मेहनत और संघर्ष से यह मुकाम हासिल किया। जब 10 साल के थे, तब सिर से पिता नराता राम व मां का साया उठ गया।

उन्होंने भाई गोपाल कृष्ण गुप्ता व 4 बहनों की जिम्मेदारी संभाली। यहीं से उनके संघर्ष का सफर शुरू हुआ। शहजादपुर से भाई व बहनों के साथ अम्बाला Eए। घर चलाने के लिए कभी फ्रूट, कभी क्रॉकरी की ताे कभी सब्जी की रेहड़ी लगाई। छाेटी उम्र में ही आरएसएस से जुड़ गए थे। बताैर सेवक संघ में काम किया। इमरजेंसी के समय जेल भी गए। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी की उपाधि दी गई थी और ताम्रपत्र भी मिला।

उनकी सोच थी ऐसी जगह हो, जहां सारी चीजें एक ही छत के नीचे मिलें : दीपक गुप्ता

200 रुपए जेब में थे, जब उन्होंने चीनी मिट्टी के बर्तन का बिजनेस शुरू किया। उसी बिजनेस से भाई-बहनाें को पढ़ा-लिखा शादियां की। पुल चमेली के पास जिस जगह आज रामबाजार है, पहले वहां घर हुअा करते थे। मेहनत करते हुए वह जगह खरीद ली और दाे दुकानें शुरू की।

डिपार्टमेंटल और स्टेशनरी स्टाेर। धीरे-धीरे और दुकानें बनाई गईं और देखते-देखते 2002 में शहर में जाना-जाने वाला श्री राम बाजार बनकर तैयार हो गया। उन्हाेंने श्री राम बाजार काॅम्पलेक्स को खुद नाम दिया। आरएसएस से जुड़े थे और राम भक्त होने के चलते इसे रामबाजार का नाम दिया। यहां अब 12 बड़े स्टोर हैं।

काॅम्पलेक्स से कई लाेगाें को राेजगार मिलता है। उनकी साेच थी कि ऐसा काॅम्पलेक्स हो जहां लाेगाें को एक छत के नीचे सब चीजें मुहैया करवाई जाए। उसी सपने को उन्हाेंने, उनके भाई गोपाल कृष्ण गुप्ता व बच्चाें ने मिलकर पूरा करवाया। उन्हाेंने राखी बनाने का कॉन्सेप्ट शुरू किया।

वीरजी की राखी के नाम से मशहूर हुए। उनके इस राखी बनाने की साेच से आज कई महिलाओं को राेजगार मिलता है। राम बाजार में डिपार्टमेंटल स्टाेर, काॅस्मेटिक, स्टेशनरी, पूजा सामग्री, प्रोवीजनल स्टाेर, खिलाैनाें की दुकानें एक छत के नीचे हैं।

घर में जलता है साझा चुल्हा

पूरे परिवार को एक धागे में पिराेया हुआ। 25 लाेगाें का परिवार एक साथ रहता है। घर में एक ही किचन में साझा चूल्हा जलता है। बच्चाें को अच्छी एजुकेशन देने के बाद पारिवारिक बिजनेस में ही लगाया। हमें यह भी नहीं पता कि कजिन शब्द क्या हाेता है। हम सब भाई-बहन हैं। पापाजी ने सभी को एक परिवार के सूत्र में बांधे रखा है। -जैसा भतीजे दीपक गुप्ता व रवि गुप्ता ने रीतिका एस. वोहरा को बताया।

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