ये मां का दर्द है... / 9 माह की गर्भवती लेबर पेन में 3 दिन पैदल चलती रही, अस्पताल में मरी बच्ची को जन्म दिया

भारतीय पब्लिक स्कूल में 2 दिन से दर्द में कराह रही बिंदिया देवी अपने पति जितिन राम के साथ। भारतीय पब्लिक स्कूल में 2 दिन से दर्द में कराह रही बिंदिया देवी अपने पति जितिन राम के साथ।
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भारतीय पब्लिक स्कूल में 2 दिन से दर्द में कराह रही बिंदिया देवी अपने पति जितिन राम के साथ।भारतीय पब्लिक स्कूल में 2 दिन से दर्द में कराह रही बिंदिया देवी अपने पति जितिन राम के साथ।

  • ये लाचारी... लुधियाना से 1350 किलोमीटर बिहार के औरंगाबाद के लिए निकले

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

अम्बाला. कोरोना संकट में लॉकडाउन में पलायन कर रहे मजदूरों की मजबूरी की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित गर्भवती व बच्चे हो रहे हैं। ऐसी ही दुखभरी कहानी बिहार के औरंगाबाद की बिंदिया की है। उसके गर्भ में 9 माह का बच्चा था। पहली बार मां बन पाती, इससे पहले उसे पति जितिन राम के साथ लुधियाना से पैदल ही 1350 किलोमीटर दूर औरंगाबाद के लिए निकलना पड़ा। 9 महीने की गर्भवती बिंदिया दिन-रात पैदल चलने काे मजबूर थी क्याेंकि अब घर पहुंचने के सिवा उनके पास काेई चारा भी नहीं था। 

तीन दिन पहले रास्ते में लेबर पैन शुरू हाेने लगे। शंभू बॉर्डर के पास से लाेगाें व पुलिस की मदद से उसे अम्बाला सिटी के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहां बेटी काे जन्म दिया जाे मर चुकी थी। तब एक मां का दिल कितना दर्द से भर आया हाेगा, इसका अंदाजा बिंदिया की हालत से लगाया सुनकर लगाया जा सकता है, जिसने मजबूरी में मीलाें पैदल चलने के कारण अपनी पहली संतान काे खाे दिया। उसके बाद भी जल्द ही घर पहुंचने की ललक में परिवार ने बच्ची काे सिविल अस्पताल के पास खाली प्लाॅट में दफना दिया और बिहार तक के सफर के लिए निकल पड़े। दर्द से कराहतीं बिंदिया काे पूरे रास्ते कभी उसका पति ताे कभी उसकी ननद संभाल रही थी। दाे साल पहले ही बिंदिया की शादी हुई थी और लगभग एक साल पहले वे अपने पति के पास गांव से रहने लुधियाना आई थी। उसने कभी नहीं साेचा कि वे जब वापस घर लाैटेगी ताे कितना दर्द उसके दामन में हाेगा। अब बिंदिया सदमे है कि जिस बच्चे काे नाै महीने अपने अंदर महसूस किया उसके साथ एक पल के लिए खेल भी ना सकी। 

शव को अस्पताल में ही दफनाया, संस्था ने खाना व दवाइयां दी 

एक काेशिश टूगेदर वी कैन संस्था की फाउंडर निक्की ढिल्लाें व सदस्य श्वेता बवेजा एसडी काॅलेज के बाहर खाना वितरित कर रहे थे ताे फुटपाथ पर बिंदिया व उसका परिवार मिला। बिंदिया की ननद ने पूरी आप-बीती उन्हें बताई। परिवार ने मदद मांगी कि खाना ताे हर काेई दे रहा है, लेकिन घर तक पहुंचाने में काेई मदद नहीं कर रहा। उसके बाद निक्की ढिल्लों ने बिंदिया को मरहम पट्टी, दवाइयां व अन्य जरूरत का सामान उपलब्ध करवाया। वे अपना कांटेक्ट नंबर भी देकर आए ताे देर शाम काे संस्था की फाउंडर के पास फाेन आया कि बीपीएस स्कूल में अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। उसके बाद फाउंडर निक्की व उनके पति माैके पर पहुंचे और 9 मेंबर्स के रहने की व्यवस्था बीपीएस स्कूल में करवाई। निक्की ढिल्लाें ने बताया कि गवर्नमेंट के द्वारा दिए प्राेटाेकाॅल काे फाॅलाे कर रहे हैं। उनके काेराेना टेस्ट हाेने के बाद ही आगे कुछ कर पाएंगे। अगर उनके घर पहुंचने की व्यवस्था नहीं हाे पाती ताे ऑनलाइन ट्रेन की रिजर्वेशन करवाकर उनके घर पहुंचाने की काेशिश रहेगी।

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