जानलेवा हाईवे:एक्सीडेंट प्राेन एरिया में हर 5वें दिन हादसा, 8वें दिन हाे रही माैत, धुंध में और बढ़ सकते हैं हादसे

अम्बाला2 महीने पहले
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जीटी रोड पर नई सब्जी मंडी से पहले अवैध कट के लिए हटाई ग्रिल। - Dainik Bhaskar
जीटी रोड पर नई सब्जी मंडी से पहले अवैध कट के लिए हटाई ग्रिल।
  • जनवरी 2019 से अक्टूबर 2021 तक 200 हादसों में 124 मौतें हुई, 185 लोग घायल हुए
  • जीटी रोड पर ओवर स्पीड के कारण भी लोग जान गंवा रहे, चालान के बावजूद नहीं मान रहे वाहन चालक
  • एक्सीडेंट प्रोन एरिया में काम न होने से हादसों में नहीं आ रही कमी

एक्सीडेंट प्रोन एरिया में हर 5वें दिन हादसा हो रहा है और लगभग 8वें दिन एक मौत हो रही है। जनवरी 2019 से हादसों व मौतों की यही रफ्तार बनी हुई है। नारायणगढ़ काला-अम्ब रोड पर हमीदपुर के पास, जग्गी सिटी सेंटर, अम्बाला सिटी की नई सब्जी मंडी, कैंट में शास्त्री काॅलाेनी कट, मटहेड़ी शेखां, सुलतानपुर बैरियर आदि पाॅइंट तो ऐसे हैं जहां इस औसत से भी तेजी से हादसे हो रहे हैं।

आंकड़ाें के अनुसार जनवरी 2019 से अब तक 200 सड़क हादसे हुए। इनमें 124 लाेगाें की माैत हुई, जबकि करीब 185 लाेग घायल हाे गए। चिंताजनक बात यह है कि इतने लोगों की जान जाने के बाद भी हाईवे पर उस रफ्तार से सुधार नहीं हुए जिस रफ्तार से लोगों की जान जा रही है।

इन एक्सीडेंट प्रोन एरिया को चिन्हित किए जाने के बाद भी हादसे रोकने के लिए जरूरी उपाय नहीं किए गए। हाईवे पर कई जगह सुधार हुए, लेकिन सर्विस लेन पर ध्यान नहीं दिया गया। ये जरूर है कि जिन स्थानों पर एक साथ 4 या इससे ज्यादा लोगों की मौत हुई, वहां रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं।

सिटी के जेल लैंड पुल के चंडीगढ़ टर्न पर रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं। इसी प्रकार 18 दिसंबर 2020 को नारायणगढ़ के जौली मोड़ पर 6 लोगों की जान जाने के बाद रिफ्लेक्टर लगाए गए। इस हिसाब से ऐसा लग रहा है कि एक्सीडेंट प्रोन एरिया में सुधार के लिए हादसों का इंतजार किया जा रहा है। जबकि धुंध गहराने के बाद हादसे होना तय है। हाईवे की सर्विस लेन में अवैध कटों में सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत है।

सिटी कालका चौक से लेकर देवीगढ़ तक सर्विस लेन में ऐसे कट की भरमार है। कालका चौक से निकलते ही रामनगर, हरि पैलेस एरिया की गलियों से लोग सर्विस लेन में एंट्री लेते हैं जबकि दूसरी तरफ गीता नगरी अंडरब्रिज से लोग वापस भी इन कॉलोनियों की तरफ आते हैं। जिससे सर्विस लेने में लोग आमने-सामने रहने से हादसे हो रहे हैं। मंजी साहिब गुरुद्वारे के पास से जब लोग मनमोहन नगर की तरफ निकलते हैं तो सर्विस लेन से निकलने वाले वाहनों से टकराते हैं। जो वाहन बिना रिफ्लेक्टर लगाए चलते हैं वे धुंध में सबसे ज्यादा हादसों की वजह बनते हैं।

  • जीटी रोड पर कई जगह ग्रिल टूटी है, अवैध कट भी वाहनों के लिए खतरा बन रहे

देवी नगर तक अवैध कट बन रहे हादसों की वजह

अम्बाला सिटी में मंजी साहिब कट से आगे सब्जी मंडी व देवी नगर तक कई अवैध कट हैं। पेट्रोल पंप के पास सब्जी मंडी से वापसी कर रहे लोग अकसर पुल से नीचे उतर रहे वाहनों की चपेट में आते हैं। थोड़ा आगे चलकर शराब ठेके के पास हाईवे की ग्रिल से अवैध रास्ता बनाया हुआ है। सब्जी मंडी से आने वाले लोग देवी नगर अंडरपास से घूम कर दूसरी तरफ से वापस आने के बजाय सर्विस लेन से रांग साइड आते हैं जिससे यहां हादसे हो रहे हैं। सब्जी मंडी की दूसरी तरफ पेट्रोल पंप पर से हाईवे जाने के लिए ग्रिल तोड़ी हुई है।

हाईवे के डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर तक नहीं : सैनी भवन की तरफ डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर तक नहीं हैं। धुंध में लोगों को पता ही नहीं चलता है कि यहां डिवाइडर है और गाड़ियां अकसर डिवाइडर पर चढ़ जाती हैं। नेशनल हाईवे की तरफ से इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। जबकि हरि पैलेस से लेकर मंजी साहिब कट तक ढाई साल में 9 लोग जान गंवा चुके हैं।

जग्गी सिटी सेंटर पर भूल-भुलैया में हो रहे हादसे : जग्गी सिटी सेंटर के पास हादसों की एक बड़ी वजह एकाएक वाहन चालकों को 2 रास्ते नजर आना है। हालांकि, यहां नेशनल हाईवे ने दिल्ली से चंडीगढ़ व लुधियाना जाने वाले वाहनों के लिए साइन बोर्ड भी लगाए हुए हैं। लेकिन अकसर वाहन चालक अपनी धुन में चलते हुए गलत दिशा में चले जाते हैं। जिन लोगों को चंडीगढ़ जाना होता है वे अकसर लुधियाना रोड पर चल पड़ते हैं। जब इन वाहन चालकों को अपनी भूल समझ आती है तो फिर ये गाड़ी को बैक करते हैं और इस चक्कर में हादसा हो जाता है। रक्षाबंधन पर यहां हुए हादसे में 2 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी।​​​​​​​

कैंट : एक्सीडेंट प्रोन एरिया में हुआ सुधार

कैंट में एक्सिडेंट प्रोन एरिया की सूची में मोहड़ा, उमराव सिंह पुल (काली पलटन पुल), एसडी कॉलेज, आते हैं। कैंट से साहा हाईवे निर्माण के चलते अब एसडी कॉलेज, खुड्डा में हादसों का खतरा कम हो जाएगा। कैंट में शास्त्री कॉलोनी टी-पाॅइंट हादसे की वजह बनता रहा है लेकिन अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी यहां टी-पाॅइंट की जगह अंडरपास बना रहा है। इसके अलावा रोड चौड़ा भी किया जा रहा है। इसी प्रकार मोहड़ा में नेशनल हाईवे पर फुट ओवरब्रिज कंपलीट नहीं था। अब यहां फुट ओवरब्रिज तैयार हो चुका है। इसलिए कैंट में महज काली पलटन पुल ही एक्सीडेंट प्रोन एरिया की सूची में बचा है। कई हादसे यहां हाईवे पर ट्रक या कोई अन्य वाहन खड़ा होने से हुए हैं।

नेशनल हाईवे बनने से यहां खतरा कम हुआ

अम्बाला-साहा हाईवे बनने से अब खुड्डा गांव के आसपास हादसे कम हो जाएंगे। रोड के बीच डिवाइडर बना दिया गया है। रोड के दोनों तरफ नाला बना दिया है जिससे साइड से वाहन या जानवरों के आने का खतरा कम हो गया है। इसी हाईवे पर मिट्ठापुर भी एक्सीडेंट प्राेन एरिया है। यहां भी हाईवे के बीच डिवाइडर बना दिया गया है लेकिन मिट्ठापुर व समलेहड़ी मोड़ पर रोड के बीच 2 कट दिए गए हैं। इन दोनों कटों के बीच एक किलोमीटर से भी कम दूरी है। ऐसे में यहां वाहन राॅन्ग साइड से आते-जाते रहते हैं जिससे यहां हादसों का खतरा बरकरार है। महमूदपुर के नजदीक साहा-पंचकूला हाईवे पर रोड के बीच डिवाइडर बना दिया है और रोड में कट भी महमूदपुर लिंक रोड मोड़ से कुछ दूर बनाया गया है। इससे हादसों में कमी आएगी।

ओवरस्पीड के 1196 चालान, 23.92 लाख रुपए जुर्माना लगाया

ज्यादातर सड़क हादसाें में ओवरस्पीड के कारण लाेग जान गंवा रहे हैं। जनवरी से लेकर अभी तक 1196 चालान ओवरस्पीड के किए गए हैं। चालान कर लाेगाें काे 23.92 लाख जुर्माना लगाया गया। ओवरस्पीड का चालान 2 हजार का हाेता है।

4 महीने बाद भी नहीं हटे फ्लैक्सीबल पोस्ट

कालका चाैक के फ्लाईओवर पर बरसाती सीजन में साइड से मिट्‌टी खिसकने पर एनएचएआई ने ऑरेंज फ्लैक्सीबल पोस्ट गाड़ दिए थे। इसके बाद साइडों में मिट्‌टी डालकर रिपेयर का काम किया गया लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी इन पोस्ट को उतारा नहीं गया। इस कारण सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। ​​​​​​​

नारायणगढ़ : हमीदपुर के पास एक्सीडेंट प्रोन एरिया में 10 मौतें, 14 लोग घायल हुए

काला अम्ब-नारायणगढ़ रोड पर ऐसे 43 गड्ढे हैं जो लोगों की जान के दुश्मन बन हुए है। हमीदपुर के नजदीक गड्ढे से बचते-बचाते बहुत से लोग या तो मौत के मुंह में चले गए या अपाहिज हो गए। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी या एनएचएआई ने सड़क को ठीक नहीं किया। न यहां कोई रिफ्लेक्टर या साइन बोर्ड भी लगाया गया। नारायणगढ़, शहजादपुर और काला अम्ब रोड पर कई दुर्घटना संभावित एरिया हैं। कहीं भी रिफ्लेक्टर या साइन बोर्ड नहीं लगाए गए। इसके अलावा गलोड़ी मोड़, रुण नदी पुल, बरौली मोड़, मिल्क मोड़, चंडीगढ़ मार्ग पर ब्लाइंड मोड़, बतौरा मोड़, दनोरा मोड़, बड़ागढ़ मोड़, जौली मोड़, शहजादपुर से पतरेहड़ी पुरानी सड़क मुख्य पाॅइंट हैं।​​​​​​​

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