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सेंट्रल जेल में नशीली चप्पलें:कैदियों को सामान देने की आड़ में चिट्टा पहुंचाने की कोशिश, चप्पलों की सोल उखाड़कर तली में चिपकाई गई थी 15 पुड़ियां

अम्बाला सिटीएक महीने पहले
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कुछ मामलों में जिन बंदियों के पास से मोबाइल मिले, उनके खिलाफ एफआईआर हुई। - Dainik Bhaskar
कुछ मामलों में जिन बंदियों के पास से मोबाइल मिले, उनके खिलाफ एफआईआर हुई।
  • कोविड प्रोटोकॉल के तहत सामान को 24 घंटे सेनिटाइजेशन करने के लिए रखा तो पकड़ में आया मामला
  • एक बंदी, एक हवालाती और उनके दो मुलाकातियों पर केस दर्ज

कैदियों तक मोबाइल पहुंचने की वजह से बदनाम अम्बाला सेंट्रल जेल में अब नशा पहुंचाने की कोशिश शुरू हो गई है। ऐसे ही हैरान करने वाले दो मामले सामने आए हैं। जिनमें चप्पलों में बड़ी चालाकी के साथ चिट्टे की पुड़िया बनाकर कैदियों तक पहुंचाने की कोशिश हुई। हालांकि कोविड प्रोटोकॉल की वजह से मामला पकड़ में गया।

इन दिनों कैदियों के लिए आए सामान को पहले 24 घंटे के लिए अलग रखकर सेनिटाइज किया जाता है। चप्पलों की जोड़ियों को भी अलग रखा गया था। इसी दौरान चप्पलों का वजन सामान्य से कुछ ज्यादा लगने पर रबड़ सोल काटकर देखा तो उसमें पॉलीथीन में पाउडर की पुड़िया बनाकर चिपकाई गई थी। चप्पलों की दोनों जोड़ियों से 15 पुड़ियों में कुल 68 ग्राम नशा मिला। जांच के लिए इसे लैब में भेजा गया है। हालांकि प्रारंभिक अनुमान में यह हेरोइन मानी जा रही है।

जेल उप अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि कैदी बृजपाल और हवालाती बन्दी अमृतपाल के परिजन उनके लिए यह चप्पलें दे गए थे। दोनों जोड़ी चप्पल किकलाइट ब्रांड की थी, जो मोटाई में ज्यादा होती है। बृजपाल के लिए यह सामान जिसमें चप्पलें थी करनाल के नीलोखेड़ी का आदर्श दे गया था। जेल रिकॉर्ड के मुताबिक बृजपाल व आदर्श की मुलाकात नहीं हुई थी। आदर्श पर्ची लगाकर सामान छोड़ गया था।

वहीं हवालाती बन्दी अमृतपाल के लिए नीलोखेड़ी निवासी उसकी पत्नी निशा रानी (जेल के मुलाकात रजिस्टर में जो नाम लिखवाया) सामान देने आई थी। यह सामान 4 मई को सुबह 11.30 बजे जेल में पहुंचाया गया। उक्त सामान को कोविड-19 की हिदायतों के अनुसार 24 घंटे के लिये मुलाकात लिखाई के साथ वाले कमरे में सेनिटाइज करके रखा गया।

बुधवार शाम को करीब 4.15 बजे जेल की ड्योढ़ी में तैनात वार्डर जयभगवान व सतपाल ने उक्त सामान की तलाशी ली। कपड़ों के साथ आई काले व स्लेटी रंग की चप्पल की जोड़ी को शक के आधार पर चाकू से काटा गया। जिसमें 7 पैकेट ब्राउन रंग के पावडर के मिले। ये पाउच चप्पल की सोल काटकर तली पर चिपकाए गए थे। वहीं नीले व गुलाबी रंग की चप्पल में 8 पैकेट मिले। जेल प्रशासन ने कैदी बृजपाल, बंदी अमृतपाल, आदर्श व निशा के खिलाफ एनडीपीएस और जेल अधिनियम में केस दर्ज कराया है।

भास्कर पड़ताल - आदर्श ने जेल में गलत मोबाइल नंबर लिखवाया, ये नंबर आदमपुर के प्यारे लाल का

जेल प्रशासन की ओर से बलदेवनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उसमें बताया गया है कि बृजपाल को सामान देने आए आदर्श ने मोबाइल नंबर .....67288 (आखिरी 5 डिजिट दे रहे हैं) लिखवाया। भास्कर ने पड़ताल करते हुए इस नंबर का डॉयल किया। सामने आया कि यह नंबर आदर्श का नहीं है बल्कि हिसार जिले के आदमपुर क्षेत्र के एक गांव के 57 वर्षीय प्यारे लाल बिश्नोई का है। बिश्नोई ने कहा कि उनका अम्बाला जेल कभी जाना ही नहीं हुआ। वह बिश्नोई हैं, नशा करना तो दूर, नशा करने वाले को पास भी नहीं फटकने देते।

निशा बोली-मैं पति को पहली बार जेल में मिलने गई, आदर्श ने ही मेरे सामान में चप्पल डाली : जेल रिकॉर्ड में दूसरा नंबर अमृतपाल की पत्नी निशा का है, वो सही है। नीलोखेड़ी के निशा ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में पंचकूला में दर्ज एफआईआर में अमृतपाल की गिरफ्तारी हुई।

वह 10 दिन से जेल में है। उसे नहीं पता था कि जेल में कैसे मुलाकात होती है। इस वजह से वह आदर्श को साथ लेकर गई थी। आदर्श उनके घर आता रहता था, वह पहले भी जेल में मुलाकात के लिए जाता रहता है। निशा का कहना है कि उसके सामान में चप्पल नहीं थी, यह आदर्श ने ही डाली।

निशा का कहना है कि उसका पति नशा नहीं करता। उसके दो छोटे बच्चे हैं। नीलोखेड़ी के गांव अंजन थली के जिस जसमेर की शिकायत पर अमृतपाल पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ, वो अमृत का दोस्त था।

पहले टेनिस बॉल, टायर के टुकड़ों और पॉलीथिन के पैकेटों में मोबाइल, सिम पहुंचाने के केस : सेंट्रल जेल में पिछले 20 दिन में मोबाइल मिलने की 14 एफआईआर दर्ज हुई हैं। दो बार तो यहां 5 से 7 मोबाइल मिले। ये मोबाइल टेनिस की गेंद काटकर, टायर के टुकड़ों या पॉलीथिन के पैकेट बनाकर अंदर फेंके गए थे। कुछ मामलों में जिन बंदियों के पास से मोबाइल मिले, उनके खिलाफ एफआईआर हुई।

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