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अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस आज:भाभू परिवार का इतिहास 372 साल पुराना; अम्बाला के कुल 600 जैन परिवारों में से 125 परिवार इन्हीं के वंशज

अम्बाला9 दिन पहलेलेखक: रितिका एस. वोहरा
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बखूआ की पूजा करते वंशज। - Dainik Bhaskar
बखूआ की पूजा करते वंशज।

आज अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस है। हम सब अपनी परिवार की पिछली 3-4 पीढ़ियों के नाम तो जानते होंगे लेकिन अम्बाला में एक ऐसा परिवार भी है जिसका 372 साल पुराना इतिहास आज भी यागदार के तौर पर संजोकर रखा गया है। इस परिवार का नाम है भाभू परिवार, जिन्हें घनौरिया फैमलिी की तौर पर भी जाना जाता है। इनके लिए बाकायदा अम्बाला सिटी की पुरानी घास मंडी में श्री जैन भाभू पूजनीय स्थल बनाया गया है। इस स्थल पर पूर्वजों की फोटो लगी हुई हैं। हर साल इस परिवार के सदस्य दिवाली और मार्च-अप्रैल में किसी एक दिन इकट्ठा हाेकर अपने पूर्वज भूरा मल के बखूओं(स्मारक) पर आकर पूजा-अर्चना करते हैं।

श्री जैन भाभू परिवार में अब लगभग 125 परिवार जुड़े हैं। अम्बाला सिटी के कुल लगभग 600 जैन परिवारों में से 125 परिवार (70 अम्बाला में, 50 देश-विदेश में) भाभू परिवार से ही निकले हैं। इस परिवार के बुजुर्ग व श्री जैन भाभू परिवार संघ के पूर्व प्रधान 82 साल के प्रेमराज जैन ने बताया कि परिवार के पूर्वज भूरामल भाभू पटियाला के घनाैर से 1650 में अम्बाला शहर आकर बसे। वहीं से इस परिवार की शुरुआत हुई। भूरामल के वंशज अम्बाला, लुधियाना, जालंधर, दलि्ली, अहमदाबाद, चंडीगढ़, पानीपत, यमुनानगर, मुंबई व पंचकूला में रह रहे हैं। इस परिवार के 15 से ज्यादा लाेगाें ने दीक्षा लेकर वैराग्य काे भी अपनाया।

परिवार काे जाेड़े रखने के लिए श्री जैन भाभू परिवार संघ बना हुआ है। हर साल दिवाली के दिन परंपरा काे निभाते हैं, जिसमें अम्बाला के 70 परिवार व वंशज सामूहिक इकट्ठा हाेकर बखूओंपर दूध व लस्सी चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। इसी के साथ साल में एक बार 350 लाेेगाें का यह भाभू परिवार इकट्ठा हाेता है।

सबसे पहले 1650 में घनौर से अम्बाला आकर बसे थे भूरा मल भाभू, पूजनीय स्थल में बने इनके बखूआ की होती है पूजा

पुरानी घास मंडी में बने श्री जैन भाभू पूजनीय स्थल में लगी पूर्वजों की तस्वीरें।
पुरानी घास मंडी में बने श्री जैन भाभू पूजनीय स्थल में लगी पूर्वजों की तस्वीरें।

भूरा मल जैन भाभू घनाैर जिला पटियाला से 1650 में अम्बाला शहर आए ताे इस वंश की शुरुआत हुई। हकीम बाबू राम जैन भाभू ने पूर्वजाें काे नमन करने के लिए 1936 में सिटी के रामबाग में बखूआ (स्मारक) का निर्माण करवाया। 25 सितंबर 1981 में प्रबंधक कमेटी ने इस चबूतरे का जीर्णाेद्धार करवाने के बारे में साेचा। तब नेमदास कमलापत जैन भाभू व भाना मल खैराती राम जैन भाभू ने मिलकर इसकाे पूरा करवाने में सहयाेग दिया।

चबूतरे के साइड में नेमदास जैन भाभू परिवार का शिलालेख लगवा दिया गया। उसके बाद स्व. लाला केसरदास, स्व. दर्शन लाल, व राय चंद जैन ने अपने प्रयास किए व पुराने लाेगाें का रिकाॅर्ड तैयार किया। 2007 में अनहाेनी घटना के बाद रामबाग में बने बखूओं काे नाथ ने गिरवा दिया। उसके बाद वर्तमान प्रबंधक कमेटी ने पूर्वजाें काे नमन करने के लिए सिटी की पुरानी घास मंडी में स्थल बनाने का निर्णय लिया। अब यहीं पर परिवार के वंशज भूरा मल का बखूआ बना हुआ है।

परिवार में श्वेतांबर व स्थानकवासी दोनों संप्रदायों काे मानने वाले लाेग
भाभू परिवार की खासियत है कि इसमें श्वेतांबर व स्थानकवासी दोनों संप्रदायाें काे मानने वाले लाेग हैं। इस परिवार से कुछ लाेगाें ने ज्ञान दीक्षा प्राप्त करके वैराग्य के जीवन काे अपनाया। ये साधु-साध्वी भी अलग-अलग संप्रदायाें से जुड़े हैं। इस परिवार में सीए, बिजनेसमैन, एडवाेकेट व, ज्वैलर्स हैं। अभी इस संघ के प्रधान अतुल जैन, सेक्रेटरी मुकेश जैन, कैशियर आशीष जैन व 15 मेंबर इस कमेटी में हैं।

ये वंशज बने साधु-साध्वी
भाभु वंशज से साध्वी देव श्रीजी महाराज, साध्वी निधि ज्याेति महाराज, तपस्विनी कमलेश महाराज, तपाचार्य माेहन माला महाराज, साध्वी रतना डाॅ. सुरभि महाराज, डाॅ. शिव मुनि महाराज, महासती रतना महाराज, तपस्वी स्वामी रूपचंद महाराज, महासती सुमित्रा महाराज, तपसिद्ध याेगिनी संताेष महाराज, वरुण मुनि महाराज, बिमला महाराज, महासती सुदेश महाराज, महासती निर्मल महाराज व किरण महाराज साधू-साध्वी बने हैं।

यादगार के तौर पर... 125 परिवारों के घरों में लगा है वंशावली चित्र
यादगार के तौर पर... 125 परिवारों के घरों में लगा है वंशावली चित्र

गाेपीचंद जैन भाभू व हकीम बाबू राम जैन भाभू के प्रयास से भाभू परिवार का वंशावली एकत्रित किया गया। सबसे पहले वंशावली चित्र हकीम बाबू राम जैन भाभू ने उर्दू में बनवाया था। उसके बाद रायचंद्र जैन भाभू व उसके सहयाेगी स्व. लाला केसरलाल जैन भाभू, स्व. दर्शन लाल जैन भाभू ने वंशावली के रिकाॅर्ड काे दाेबारा से इकट्ठा करके 1999 में प्रिंट करवाया। फिर 2009 में उस समय के प्रधान व महामंत्री ने नया रिकाॅर्ड अपडेट करके वंशावली चित्र बनवाया। श्रीपाल जैन भाभू एस दिनेश जालंधर ने वंशावली कलई चित्र काे अपनी तरफ से प्रकाशित करके श्री जैन भाभू परिवार काे समर्पित किया, जाे आज देश-विदेश में भाभू परिवाराें के घराें में लगा हुआ है।

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