इस बार नारायणगढ़ शुगर मिल चलने में संशय:केन कमिश्नर ने यमुनानगर, शाहाबाद, भादसो मिलों को लिखा- अम्बाला का गन्ना खरीदने के लिए तैयार रहें

नारायणगढ़एक महीने पहले
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केन कमिश्नर की ओर से जारी पत्र। - Dainik Bhaskar
केन कमिश्नर की ओर से जारी पत्र।
  • बनौंदी शुगर मिल की तरफ किसानों का 70 करोड़ बकाया
  • अम्बाला में 7 हजार गन्ना उत्पादकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें

इस बार बनौंदी स्थित नारायणगढ़ शुगर मिल में पिराई सत्र चल पाने पर संशय है। हरियाणा केन कमिश्नर ने शाहबाद, भादसो (करनाल) व यमुनानगर शुगर मिल को ईमेल के माध्यम से लेटर भेजा है। जिसमें लिखा है कि यदि नारायणगढ़ शुगर मिल 2021-22 के पिराई कार्य करने में विफल रहता है, तो क्षेत्र के किसानों का गन्ना इन तीनों मिलों में डाइवर्ट किया जाए। कमिश्नर के इस लेटर के जारी होने के बाद गन्ना उत्पादक किसानों, किसान संगठनों, मिल कर्मचारियों और बैंकों में हलचल मच गई है।

किसान संगठनों और विपक्ष का आरोप है कि सरकार मिल को बंद करना चाहती है। अगर ऐसा हुआ तो क्षेत्र का किसान बर्बाद हो जाएगा। किसान नेताओं ने इस मुद्दे पर किसानों से सम्पर्क करना शुरू कर दिया है। केन कमिश्नर ने 13 सितंबर को सरस्वती शुगर मिल यमुनानगर, पिकाडली एग्रो इंडस्ट्री भादसों (करनाल) व शाहबाद कोऑपरेटिव शुगर मिल के प्रबंधकों को लेटर लिखा है। लेटर में कहा गया है कि लगभग 51 लाख क्विंटल गन्ना निर्धारित क्षेत्रों में उपलब्ध है। केन कमिश्नर ने मिलों से गांवों की सूची के साथ प्रस्ताव मांगे हैं।

यानी मिलों से पूछा गया है कि वह किस-किस गांव का गन्ना खरीद सकते हैं। केन कमिश्नर के इस पत्र ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। नारायणगढ़ शुगर मिल की तरफ किसानों की करीब 70 करोड़ की पेमेंट बकाया है। दूसरी चिंता है कि अगर मिल न चली तो उनके नाम पर मिल ने बैंकों से जो क्रॉप लोन लिया गया था, उसे कौन जमा करवाएगा। क्षेत्र के 7,000 गन्ना उत्पादक किसानों के साथ-साथ मिल के 500 कर्मचारी सहमे हैं। कई महीने से वेतन न मिलने से पहले ही मिल के कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

कौड़ियों के भाव बिकेगा गन्ना : विनोद राणा
गन्ना संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विनोद राणा ने कहा कि क्षेत्र के 30 हजार एकड़ में करीब 90 लाख क्विंटल है। अगर मिल बंद हुआ तो क्रशरों पर गन्ना सस्ते दामों में बिकेगा। एक तरफ सरकार ने गन्ने के दाम बढ़ाए हैं, दूसरी तरफ मिल बंद करने की सोच रही है। सरकार को मिल चलाना चाहिए। मिल बंद नही होने देंगे।

एक साल पहले बताती सरकार : रतन मान
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि पिछले एक साल से सरकार की देखरेख में मिल चल रहा है। सरकार को एक साल पहले बताना चाहिए था ताकि किसान अपना इंतजाम करता। अब फसल तैयार खड़ी है। किसान को जोखिम उठाकर गन्ना बाहर ले जाना पड़ेगा। सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए और मिल को टेकओवर कर चलाना चाहिए।

सरकार की मंशा ठीक नहीं: शैली चौधरी
नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी ने कहा कि मिल को चलाने को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है। पिछले पिराई सत्र में सरकार के अधिकारियों की देखरेख में मिल चलाया गया था। अधिकारियों ने ही किसानों के चेक कटवाए हैं। अब अगर मिल बंद होगा तो किसानों का पैसा कौन देगा। मिल मालिक पहले ही हाथ खड़े कर चुके हैं। कांग्रेस के 10 साल कर शासनकाल में कभी ऐसी नौबत नहीं आई।

ये आंकड़े डरा रहे किसानों को

  • 32 करोड़ रुपए का क्रॉप लोन किसानों के नाम पर मिल ने यूनियन बैंक और आईसीआईसी आई बैंक से ले रखा है।
  • 55 लाख क्विंटल गन्ना पिछले पिराई सीजन में मिल ने खरीदा था।
  • 6 लाख क्विंटल चीनी बनी थी।
  • 70 करोड़ रुपए मिल मालिक पिछले 6 साल में मिल से निकाल चुके हैं। जो घाटे का एक कारण हैं।
  • 1997 में शुरू हुआ था शुगर मिल।
  • 130 करोड़ रुपए का कर्ज हरडा है मिल के ऊपर। जो पावर प्लांट के लिए लिया था। ये प्लांट बंद पड़ा है।
  • 125 करोड़ सरकार का बकाया है। 32 करोड़ का क्रॉप लोन व 70 करोड़ किसानों का बकाया है।
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