मतदाता सूचियों का हुआ अंतिम प्रकाशन:कैंटोनमेंट बोर्ड ने किया मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन, पूर्व पार्षद साहनी दंपती का सूची में नाम नहीं

अम्बालाएक महीने पहले
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कैंटाेनमेंट बाेेर्ड के पूर्व पार्षद उमेश साहनी व सिम्मी साहनी। - Dainik Bhaskar
कैंटाेनमेंट बाेेर्ड के पूर्व पार्षद उमेश साहनी व सिम्मी साहनी।
  • फिजिकल वेरिफिकेशन में एड्रेस मिस-मैच, इसलिए नहीं बनी वोट

कैंटोनमेंट बोर्ड की मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन बुधवार को किया गया। इनमें पूर्व पार्षद उमेश साहनी, उनकी पत्नी सिम्मी साहनी सहित परिवार के 5 सदस्यों की वोट नहीं बन सकी है। वहीं, मतदाता सूचियाें को लेकर पूर्व पार्षद ने एडवोकेट बेटी महक साहनी के मार्फत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है, जिस पर हाईकोर्ट ने 15 नवंबर को सुनवाई तय की है। हाईकोर्ट के दखल के बाद बेशक कैंटोनमेंट बोर्ड मतदाता सूचियों का फाइनल प्रकाशन कर सकता है, मगर हाईकोर्ट के आगामी दिनों में फैसले के बाद ही इसे मान्य माना जाएगा।

बोर्ड अध्यक्ष एवं स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर आरएस मथारु ने बुधवार को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया और बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट पर यह जानकारी दी। इसके अलावा बोर्ड कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी इसे चस्पाया गया। मतदाता सूचियों में पूर्व पार्षद उमेश साहनी, उनकी पत्नी पूर्व पार्षद सिम्मी साहनी, बेटी एडवोकेट महक साहनी, बेटे भावुक व मधुर का नाम नहीं है। सभी ने वोट बनाने के लिए बोर्ड में आवेदन किया था और स्वयं को हार्डिंग लाइन में बंगला नंबर 3 में बतौर किराएदार बताया था।

बताते हैं कि स्टाफ द्वारा नई वोट बनाने को लेकर इस पते पर जब फिजिकल वेरिफिकेशन की गई तो एड्रेस मिस-मैच मिला, यहां साहनी परिवार का निवास नहीं पाया गया। इसके बाद बंगला की कब्जाधारक जगरूप कौर ने भी बोर्ड को यह जानकारी दी कि साहनी परिवार उनका किराएदार नहीं है। इसी आधार पर साहनी परिवार की वोट बोर्ड द्वारा नहीं बनाई थी। एक जुलाई को मतदाता सूचियों का प्रकाशन कर बोर्ड ने दावे एवं आपत्तियों पर सुनवाई की थी। अगस्त में बोर्ड अध्यक्ष व स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर के समक्ष दावे-आपत्तियां दर्ज कराए गए थे।

याचिका में कैंटोनमेंट बोर्ड पर सुनवाई नहीं करने का आरोप
उमेश साहनी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि उनकी अपील पर बोर्ड द्वारा सुनवाई नहीं की गई। उनके द्वारा अपने निवास से जुड़े दस्तावेज, आधार कार्ड व अन्य जानकारियां सही समय पर कैंटोनमेंट बोर्ड अथॉरिटी को जमा करवाए थे। उनका आरोप था कि जुलाई में मतदाता सूचियों के प्रकाशन से पहले उन्हें बोर्ड द्वारा लिस्टें नहीं दिखाई गई और अंतिम क्षणों में इसे जारी कर दिया। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनका व परिवार का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। इसी को लेकर हाईकोर्ट में अब इस मामले को लेकर चुनौती दी गई है। बता दें कि उमेश साहनी बिट्टू 2014 तक बोर्ड के पार्षद रह चुके हैं।

मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन हो चुका है जिसमें पूर्व पार्षद उमेश साहनी व अन्य की वोट नहीं बनी है। उनकी आपत्तियों को खारिज किया गया है। बोर्ड चुनाव से पहले भी रक्षा मंत्रालय नई वोट बनाने की प्रक्रिया फॉलो करता है और यदि किसी का नाम रह गया तो वह आगे वोट बनवा सकता है।-अनुज गोयल, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, अम्बाला।

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