इमिग्रेशन एक्ट और धोखाधड़ी में दो दिन में 11 एफआईआर / भाजपा नेता मक्खन लबाना पर अवैध तरीके से अमेरिका भिजवाने का केस

Case of BJP leader Butter Labana sent illegally to America
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Case of BJP leader Butter Labana sent illegally to America

  • मक्खन सिंह का तर्क- कोई आदमी थोड़ा सा भी ऊपर चला जाए तो हर कोई उसका नाम यूज करता है
  • लबाना की सफाई- छिंदा फौजी ने मेरा नाम गलत लिया, वो मेरा भाई भी नहीं

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:59 AM IST

अम्बाला. अवैध रूप (डोंकर वीजा) से अमेरिका से एंट्री कराने के मामले में अम्बाला में 5 और एजेंटों पर एफआईआर दर्ज हुई है। शहजादपुर में दर्ज एक एफआईआर में एजेंट मक्खन लबाना व छिंदा फौजी नामजद हुए हैं। शिकायतकर्ता ने कहा है कि लबाना व उसके भाई छिंदा फौजी ने 16 लाख लेकर डोंकर के जरिये अमेरिका में अवैध एंट्री कराई थी। बसपा और इनेलो में रहे जिला परिषद सदस्य लबाना ने पिछले साल मार्च में ही भाजपा जॉइन की है। लबाना राइजिंग अम्बाला फाउंडेशन का चेयरमैन भी है। पिछले दो दिन में अम्बाला में 11 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से 3 में सुरेंद्र उर्फ सिंदा या छिंदा नामजद है। छिंदा के खिलाफ यमुनानगर में भी वीरवार को एफआईआर हुई है। यमुनानगर में दर्ज एफआईआर में छिंदा के पिता का नाम बंता सिंह, जाति लबाना और पता खन्ना माजरा (अब न्यू मिलाप नगर, अम्बाला सिटी) लिखवाया है।


वहीं मक्खन सिंह लबाना ने सफाई दी-छिंदा फौजी मेरा भाई नहीं है। छिंदा फौजी ही मेन एजेंट है। कोई आदमी थोड़ा से भी ऊपर जाता है तो हर कोई उसके नाम का यूज करता है। छिंदे ने मेरा नाम लिखवा दिया। उसे लगता है कि ये खुद भी बचेगा और मुझे भी बचा लेगा। बंता सिंह मेरे पिता का नाम है। छिंदा का असली नाम तो सुखविंद्र सिंह छिंदा है, उसके पिता का नाम जोगिंद्र सिंह खन्ना माजरा है। इस संबंध में परिवार के बयान और शपथपत्र तैयार करवा लिए हैं। इसकी जांच करवाएंगे। 

लबाना और छिंदा ने 16 लाख लिए, 6 लाख की आखिरी किश्त लेकर ही मैक्सिको-अमेरिका बॉर्डर पार कराया था
लबाना व छिंदा पर आरोप है कि सीआरपीएफ में नौकरी कर रहे चंडीगढ़ के हल्लोमाजरा निवासी लखविंद्र सिंह के बेटे यशप्रीत सिंह को अमेरिका भिजवाने के लिए टुकड़ों में कुल 16 लाख रुपए लिए। आखिरी 6 लाख की किश्त मैक्सिको-अमेरिका बॉर्डर पार कराने से पहले ली थी। अवैध एंट्री करते ही यशप्रीत व अन्य युवक पकड़े गए। यशप्रीत के चाचा डिफेंस कॉलोनी सेक्टर-सी में रह रहे बलविंद्र सिंह की शिकायत पर शहजादपुर पुलिस ने केस दर्ज किया है। बलविन्द्र के मुताबिक यशप्रीत के दोस्त रवि ने बताया था कि अम्बाला सिटी में मानव चौक पर मक्खन लबाना व उसका भाई छिंदा फौजी विदेश भेजने का काम करता है।

16 लाख रुपए में अमेरिका भेजने का सौदा तय हुआ। 12 जून 2019 यशप्रीत दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर इक्वाडोर पहुंचा। वहां से टैक्सी से कोलंबिया और बस में टरबो सिटी पहुंचे। जहां हरियाणा और पंजाब के 11 और युवक ठहराए हुए थे। फिर किश्ती में समुंदर के रास्ते कपूरघाना ले गए। 5 दिन जंगलों में चले। जहां इमीग्रेशन वालों ने मिलिट्री कैंपों में रखा। फिर कोस्टारिका देश की इमीग्रेशन के हवाले कर दिया। वहां से बस में बैठाकर निकारागुआ बॉर्डर पर भेज दिया। वहां एक डोंकर के पास सभी 11 युवकों की मोबाइल में फोटो थी। सभी को निकारागुआ इमिग्रेशन के हवाले कर दिया। जहां पर 150-150 डॉलर देकर बस में बैठा होंडुरास बॉर्डर पर छोड़ दिया। जंगल के रास्ते ग्वाटेमाला पहुंचे और अगले दिन मैक्सिको। जहां 6 दिन इमीग्रेशन वालों की जेल में रहे। जिसके बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया में एंट्री करवा दी लेकिन बॉर्डर सिक्योरिटी ने पकड़ कर जेल भेज दिया।

डाॅलर कमाने के लालच में गंवाई जीवन की जमापूंजी

100 दिन के सफर के बाद बॉर्डर पार किया, अगले दिन ही पकड़ा गया
22 साल का हूं और 12वीं तक पढ़ा हूं। बकनौर गांव के एजेंट कप्तान सिंह (नग्गल में 3 व शहजादपुर में 1 एफआईआर दर्ज) ने मुझे अमेरिका भिजवाने के लिए मेरे पिता व चाचा से सौदा किया था। 17 अप्रैल 2019 को तड़के दिल्ली से इक्वाडोर की फ्लाइट पकड़ी। 18 अप्रैल को इक्वाडोर एयरपोर्ट के बाहर डोंकर मिला। उसके बाद कोलंबिया, पनामा, कोस्टारिका, निकारागुआ, ग्वाटेमाला हुए जंगल, सड़क व समुद्र के रास्ते मैक्सिको बॉर्डर पार करवाया। मैक्सिको से मैकसिली तक फ्लाइट में पहुंचे। 26 जुलाई 2019 को मुझे अमेरिका बॉर्डर पार कराया और एक घंटे बाद ही अमेरिका की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। फिर जेल व टैक्सास कैंप में रहा। 1 महीने बाद मेरा वाइट पासपोर्ट बना और 18 मई को टैक्सास एयरपोर्ट से अमृतसर भेज दिया। 
जगजोत सिंह, खासपुरा (नग्गल)

रिटायरमेंट पूंजी से 15 लाख देकर बेटे को अमेरिका भेजा, अब कोरोना लेकर लौटा
मेरी उम्र 58 साल है। आर्मी से रिटायरमेंट के बाद इंडियन अॉयल काॅरपोरेशन में सिक्योरिटी गार्ड हूं। दो बेटियां व छोटा बेटा अनुजपाल है। 23 साल के अनुज को अमेरिका भिजवाने के लिए फरवरी 2019 में बकनौर के एजेंट कप्तान सिंह ने कुल 15 लाख रुपए लिए थे। शुरुआत में एजेंट ने 3 लाख रुपए लिए थे। फिर जैसे-जैसे बेटा एक देश से दूसरे देश की सीमा पार करता रहा, एजेंट हमारे से पैसे लेता रहा। दो महीने में जब मैक्सिको बॉर्डर पर पहुंचा तब तक 15 लाख रुपए ले लिए थे। मुझे रिटायरमेंट पर जो पैसा मिला था, सारा पैसा खर्च हो गया। एजेंट ने अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश कराया था। वहां आर्मी ने अनुज को पकड़ लिया और अब डिपोर्ट कर दिया। फ्लाइट से बेटा अमृतसर उतरा। अमृतसर से पंचकूला भेज दिया, जहां कोरोना टेस्ट हुआ तो अनुज पॉजिटिव मिला। अब एमएम मेडिकल कॉलेज की कोविड यूनिट में भर्ती है। 
प्रदीप कुमार (अनुजपाल का पिता), कोड़वा खुर्द

भाई को 165 दिन लगे अमेरिका में घुसने में, 176 दिन जेल में रहा, अब डिपोर्ट
धनाना में हलवाई का काम करता हूं। मेरे छोटे भाई मनदीप को अमेरिका भिजवाने के लिए पटियाला के गांव टांडा के एजेंट लाभ सिंह ने सौदा किया था। तसिंबली में हमारे रिश्तेदार कुलदीप की वजह से एजेंट से संपर्क हुआ था। 12 जून 2019 को भाई को दिल्ली के प्रिंस होटल में बुलाया गया। अगले दिन तड़के ढाई बजे इथोपियन एयरलाइन की फ्लाइट से इथोपिया की राजधानी अदीस अबाबा पहुंचा। जहां से ब्राजील के शहर साओ पोलो से लीम्मा पहुंच गए। मेरे भाई के साथ तसिंबली का सुरेश भी था। पनामा जंगल में उनके पासपोर्ट डोंकर ने छीन लिए। अलग-अलग तीन कैम्पों में रखा। पैसों के लिए डोंकर हमारे घर फोन करवाया। फिर मैक्सिको बॉर्डर क्रॉस कर 24 नवंबर को अमेरिका में घुसे तो पुलिस ने पकड़ लिया। टैक्सास जेल में भेजा गया। अब 18 मई को डिपोर्ट कर दिया गया। पंचकूला में क्वारेंटाइन के दौरान सैंपल लिया तो भाई कोरोना पॉजिटिव मिला। अब एमएम कोविड यूनिट में भर्ती है। 
डिंपल (मनदीप का भाई), धनाना

ऐसे जा रहे अवैध रूप से
ऐसे बहुत लोग हैं जिनका सपना सिर्फ पैसा कमाना है। उन्हें लीगल राह काफी कठिन लगती है। उनके टूरिस्ट वीजा के लिए इनकम टैक्स रिटर्न नहीं होती या फिर वह स्टूडेंट्स वीजा पर पैसा खर्च नहीं करना चाहते। इसलिए वह एजेंटों के पास पहुंचते हैं। जहां उन्हें विदेश में नौकरी और डॉलरों में कमाई के सपने दिखाए जाते हैं। एजेंट का नेटवर्क पूरा तैयार होता है। अम्बाला के बाद दिल्ली में एजेंट होते हैं। दिल्ली के एजेंट फर्जी टूरिस्ट वीजा और बिजनेस वीजा के दस्तावेज तैयार करते हैं। जिस देश में किसी ने जाना होता है तो उसके आसपास के छोटे देश को देखते हैं जहां पर आसानी से वीजा मिल जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी ने अमेरिका जाना है तो उसे लेटिन अमेरिकी देश जैसे इक्वाडोर में उतार लेते हैं। यहां पर एजेंट जिन्हें डोंकर कहते हैं, अमेरिका में घुसने तक रहने का प्रबंध करता है। जब उन्हें रास्ता साफ लगता है तो उन्हें जंगलों के रास्ते मैक्सिको ले जाते हैं। वहां पर अमेरिका में एंट्री के लिए तैयार रहते हैं। एंट्री के बाद अगर कोई पकड़ा जाता है उसे जेल होती है और डिपोर्ट कर दिया जाता है। अगर कोई कहता है कि उसकी जान को जातिगत खतरा है तो उसे शरणार्थी कैंप में छोड़ दिया जाता है। विदेश जाने के लिए एजेंट के चक्रव्यूह में फंसे लोग 15 लाख से 40 लाख तक फंसा चुके होते हैं।
-जैसा वेस्टर्न ओवरसीज के डायरेक्टर प्रदीप बाल्यान ने भास्कर को बताया

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