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चुनाव के जरिए किसानों को सत्ता दिलाएंगे:चढ़ूनी, भाकियू ब्लॉक प्रधान बोले-किसानों को गुमराह न करें, भाकियू (चढ़ूनी) में ही विरोध के स्वर भी उठने लगे

अम्बाला2 महीने पहले
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सिटी के सेक्टर-8 के कम्युनिटी सेंटर में संविधान बचाओ माेर्चा व भारतीय किसान यूनियन के सम्मलेन में गुरनाम सिंह चढ़ूनी काे राखी बांधतीं कांता आलड़िया। - Dainik Bhaskar
सिटी के सेक्टर-8 के कम्युनिटी सेंटर में संविधान बचाओ माेर्चा व भारतीय किसान यूनियन के सम्मलेन में गुरनाम सिंह चढ़ूनी काे राखी बांधतीं कांता आलड़िया।
  • मंच पर चढूनी ने दलित नेत्री कांता आलड़िया से राखी बंधवाई, बोले- ये किसान व मजदूरों का गठजोड़

किसान आंदोलन के बाद राजनीतिक जमीन तलाश रहे भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी अब दलित नेत्री कांता आलड़िया के साथ मिलकर पंजाब में किसान-दलित कार्ड खेलना चाह रहे हैं। वीरवार को अम्बाला सिटी में ‘देश बचाओ-संविधान बचाओ, किसान-मजदूर बचाओ’ सम्मेलन के दौरान मंच पर आलड़िया ने चढ़ूनी को राखी बांधी और 500 रुपए के शगुन के साथ दोनों भाई-बहन बने।

मंच से ही चढ़ूनी ने कहा कि ये किसान और श्रमिकों का गठजोड़ है, इसका कोई जातीय रंग नहीं बल्कि दलित व जनरल का मेल है। चढ़ूनी ने खुलकर राजनीतिक इच्छा भी जाहिर की। हालांकि भाकियू (चढ़ूनी गुट) में ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अम्बाला ब्लॉक-1 के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह जलबेड़ा इस सम्मेलन में नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि ये किसानों का नहीं राजनीतिक मंच था।

सम्मेलन के दौरान चढ़ूनी ने एक बार फिर मिशन पंजाब चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुद पंजाब से चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि वहां के लोगों को लड़वाएंगे। इसके लिए राजनीतिक दल बनेगा। उन्होंने कहा कि किसान अपने घरों में बाबा भीमराम अंबेडकर की तस्वीरें लगाएं जबकि श्रमिक अपने घरों में दीनबंधू सर छोटू राम की। उन्होंने कहा कि 24 नवंबर को छोटू राम की जयंती थी और 26 नवंबर को संविधान दिवस है, इसलिए दोनों के बीच 25 नवंबर को संविधान दिवस समारोह रखा गया। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में चढ़ूनी ने कहा कि अभी सिर्फ पंजाब चुनाव पर फोकस है, हरियाणा में अभी चुनाव नजदीक नहीं है।

पंजाब में एक मॉडल देना चाहते हैं ताकि पूंजीपतियों से छीनकर सत्ता किसानों को मिल सके। कांता आलड़िया ने कहा कि पंजाब से जब राजनीतिक दल चलेगा तो पूरे देश में फैलेगा। सम्मेलन में दादरी से निर्दलीय विधायक सोमवीर सांगवान भी पहुंचे। किसान आंदोलन के समर्थन में सांगवान ने खट्टर सरकार में हरियाणा पशुधन बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था।

चढ़ूनी को लाडवा हलके से सिर्फ 1,307 वोट मिले थे, आलड़िया कई पार्टियों में रह चुकीं | गुरनाम सिंह चढ़ूनी के मन में राजनीतिक इच्छा कई साल से हिलोरे मार रही है। उन्होंने 2014 में पत्नी बलविंदर कौर को आम आदमी पार्टी के टिकट पर कुरुक्षेत्र सीट से चुनाव लड़वाया था। उन्हें 32,554 वोट (2.87 प्रतिशत) मिले थे और जमानत जब्त हो गई थी। फिर 2019 के विधानसभा चुनाव में चढ़ूनी खुद कुरुक्षेत्र की लाडवा सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे। तब उन्हें कुल पड़े 1,37,771 वोट में से सिर्फ 1307 वोट मिले थे।

कांता आलड़िया भी कई साल से राजनीति में कई पार्टियों में रह चुकी हैं। सपा, बसपा के बाद 2014 में भाजपा जॉइन की थी लेकिन 2017 में ही सरकार पर कई आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी। तब वह प्रदेश कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य और अम्बाला व कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र की प्रभारी थीं। वह प्रजा परिवर्तन पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, संविधान बचाओ मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, मिशन एकता समिति की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं और अब भाकियू चढ़ूनी गुट की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

सीधी बात, एमएसपी की गारंटी सबसे बड़ा मुद्दा, मांगें मानेंगे तो बॉर्डर से लौट आएंगे: चढ़ूनी

  • 3 कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी दिल्ली बॉर्डर पर किसानों क्यों डटे हैं?
  • चढ़ूनी: अभी संसद में पारित होने दें। इसके अलावा एमएसपी की गारंटी सबसे बड़ा मुद्दा है। किसानों पर दर्ज केस वापस लेने, शहीद किसानों के मुआवजा देने की भी बात नहीं हुई है।
  • संयुक्त किसान मोर्चा में सबसे ज्यादा आपकी मुखालफत क्यों होती है?
  • चढ़ूनी: जो ज्यादा काम करता है, कई बार उसी का विरोध होता है। जैसे जिस बेरी के बेर ज्यादा मीठे होते हैं, ज्यादा पत्थर उसी को पड़ते हैं।
  • पंजाब में किसान संगठनों द्वारा चढ़ूनी को काले झंडे दिखाने का एेलान किया है?
  • चढ़ूनी: कहने और करने में फर्क होता है। यदि वे काले झंडे दिखाएंगे भी तो वहीं के किसानों को दिखाएंगे और किसान खुद जवाब देंगे। हमें तो वहां के लोग बुला रहे हैं।

पंजाब विस चुनाव में 32 फीसदी दलित वोट बैंक पर सबकी नजर

अगले साल के शुरू में पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर करीब 32 फीसदी दलित वोट बैंक पर सभी दलों की नजर है। शिअद (बादल) ने बसपा से गठजोड़ किया है, जबकि कांग्रेस ने तो कैप्टन अमरेंदर की जगह दलित चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बना दिया। आम आदमी पार्टी भी दलित समाज को सत्ता में भागेदारी देने की बात कर रही है।

चढ़ूनी के ऐलान पर सुखविंद्र जलबेड़ा ने जताई नाराजगी

भारतीय किसान यूनियन अम्बाला ब्लाॅक वन प्रधान सुखविंद्र सिंह जलबेड़ा ने भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी द्वारा मंच से राजनीति में जाने काे ऐलान करने पर नाराजगी जताई। सुखविंद्र सिंह जलबेड़ा ने कहा कि वीरवार काे भारतीय किसान यूनियन का कार्यक्रम राजनीतिक था। यह राजनीतिक कार्यक्रम हाेने के कारण मैंने जाने से मना कर दिया था। उनके काफी साथी भी कार्यक्रम में नहीं गए।

सुखविंद्र ने कहा कि किसानाें काे यूज करने के लिए यह राजनीतिक मंच तैयार किया गया है। यह हमें गुमराह कर लेकर गए थे। सुखविंद्र ने कहा कि आंदाेलन की शुरूआत में हम लाेगाें काे गांव-गांव जाकर जागरुक किया था। तब हमने किसानाें काे कहा था कि जाे भी किसान चाहे वह किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा है। वह अपनी पार्टी के साथ जुड़ा रहे। लेकिन जहां किसानी का मुद्दा आता है, वहां किसानाें के साथ खड़े हाे।

जिनके इशारे पर विरोध हो रहा, वे भी चुनाव लड़ चुके: मलकीत

भाकियू अम्बाला अध्यक्ष मलकीत सिंह ने अम्बाला ब्लाॅक 1 प्रधान सुखविंद्र सिंह जलबेड़ा व अन्य किसान नेताओं के सेक्टर-8 कम्युनिटी सेंटर में हुए कार्यक्रम में न आने के सवाल पर कहा कि वह हिसार के सुरेश काैथ के पीछे लग रहे हैं। उन्हाेंने भी एमपी का चुनाव लड़ा था।

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