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साइड इफेक्ट:कोरोना के बाद फॉग सिंड्रोम, वीकनेस व साइड इफेक्ट्स से पार पाना चुनौती

अम्बाला सिटी15 दिन पहले
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  • कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों के सामने 2 से 3 महीने तक भी कई तरह की मानसिक व शारीरिक समस्याएं

कोरोना को हराने के बाद भी लोगों के सामने लोगों को मानसिक व शारीरिक कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना की ये चुनौतियां ऐसी हैं कि कोरोना के बाद लंबे समय तक संक्रमित हुए मरीजों के लिए परेशानी बन रही हैं। किसी मरीज को बार-बार सिर दर्द हो रहा है तो किसी को नींद नहीं आती है। किसी को पेट दर्द रहता है और कभी छाती में दर्द हो जाता है।

किसी का चार कदम चलने व थोड़ा काम करने पर सांस फूल रहा है तो कोई शारीरिक वीकनेस का बार-बार सामना कर रहा है। कई मरीज बार-बार अपनी दिनचर्या के दौरान बातों को भूल जाते हैं तो कई हार्ट बीट की असामान्य स्थिति से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीज लगातार फिजिशियन से संपर्क कर रहे हैं। फिजिशियन के मुताबिक कोरोना होने के 2 से 3 महीने तक भी मरीजों के लिए ऐसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

कैंट सिविल अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संजीव गोयल के मुताबिक कोरोना के बाद इससे उभरने में काफी समय लगता है। जिन मरीजों के फेफड़ों पर असर पड़ा होता है, उनका थोड़े कामकाज के बाद सांस फूलने लगता है। मरीज एक चीज से उभरता है तो उसके लिए दूसरी कोई परेशानी खड़ी हो जाती है।

जिन लोगों को संक्रमण के दौरान ऑक्सीजन या वेंटीलेटर स्पोर्ट की जरूरत पड़ी उनके फेफड़ों पर असर पड़ने से वे हांफने लगते हैं। ऐसे मरीजों को संतुलित आहार के अलावा सकारात्मक रहने की जरूरत रहती है। इसके लिए फैमिली स्पोर्ट भी अनिवार्य है। पोस्ट कोविड इफेक्ट्स वाले मरीज लगातार आ रहे हैं।

फॉग सिंड्रोम की वजह से बार-बार भूल रहे मरीज

सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि कोरोना के बाद फॉग सिंड्रोम आम बात है। फॉग सिंड्रोम में एक व्यक्ति बार-बार बात भूल जाता है। जैसे कोई व्यक्ति घर से कहीं जाने के बारे में सोच कर चलता है लेकिन बीच रास्ते में वह खड़ा होकर सोचने लगता है कि आखिर उसे जाना कहां था।

कोरोना के बाद लोग ऐसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं लेकिन एक समय के बाद और अच्छी डाइट व सकारात्मक रहने से इन चीजों से उभरा जा सकता है। ऐसे में लोगों को कोरोना गाइडलाइन को अनिवार्य तौर पर फॉलो करना चाहिए।

पोस्ट कोरोना इफेक्ट्स से सकारात्मक रहकर पार पाएं

मुझे कोरोना होने के बाद बेमतलब ही बहुत ज्यादा गुस्सा आने लगा था। बातें भूल जाना आम बात है। कोविड के बाद बॉडी में पेन रहने लगा था। एक न एक हिस्से में कोई न कोई दिक्कत रहती थी। जैसे लगातार कोई चीज चुभ रही हाे। शुरू में डरावने सपने भी आए। एक तरह से मानसिक परेशानी रही। हालांकि, इससे पार पाने के लिए मैंने खुद को अपने काम में व्यस्त किया।

क्वालिटी टाइम अपनी फैमिली के साथ बिताया। मेडिटेशन, योगा, फ्रेश एयर में मॉर्निंग व इवनिंग वॉक व डाइट पर ध्यान देने से चीजें धीरे-धीरे सामान्य होती चली गईं। कोरोना के बाद अपनी डाइट पर ध्यान देना भी जरूरी है। बाजार की बनी हुई व तली हुई चीजें खाने से बचना चाहिए। अच्छी व हाइजेनिक डाइट लेनी चाहिए।
-जैसा सीएओ कार्यालय में तैनात डॉ. सुखप्रीत ने बताया।

कोरोना से ठीक हो गया हूूं लेकिन सांस फूलती है

कोरोना के दौरान लंग्स में इंफेक्शन होने के चलते करीब 8 दिन अलकेमिस्ट अस्पताल में एडमिट रहा। 22 दिन तक पॉजिटिव रहा। कोरोना से ठीक हो गया हूूं लेकिन अभी भी सांस फूल जाता है। पहले एक साथ दो काम कर लेते थे लेकिन कोरोना के बाद माइंड डाइवर्ट होने पर झल्लाहट सी होने लगती थी।

हालांकि, इन चीजों से बाहर आने में परिवार व महकमे और विशेषकर सीएमओ ने बहुत स्पोर्ट किया। कोरोना के साइड इफेक्ट्स से उभरने के लिए सुबह-शाम पटेल पार्क में सैर करता हूं। काढ़ा पीया, अश्वगंधा-टी व लिक्विड पर ज्यादा ध्यान दिया।
डॉ. विशाल गुप्ता, नोडल ऑफिसर होम आइसोलेशन कैंट

कोरोना के बाद बीपी लो रहने लगा था

जब कोरोना हुआ मैं सीएमओ कार्यालय में मेडिकल ब्रांच की इंचार्ज के तौर पर काम देख रही थी। कोरोना के बाद बीपी लो रहने लगा था। एक माह तक घर रहना पड़ा। चिड़चिड़ापन रहने लगा था। इसी दौरान मेरे घर के बाहर स्ट्रे डॉग ने बच्चे दिए थे। इन बच्चों को खाना देने में ध्यान बंटने लगा। मॉर्निंग वॉक शुरू की। डाइट मंे नारियल पानी को रेगूलर लिया। पति एसएओ डॉ. राजेंद्र राय की रिपोर्ट निगेटिव थी और वे ऑफिस के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी संभाले हुए थे। जिन्होंने बहुत मोटिवेट किया।
डॉ. जयंती, डिप्टी सिविल सर्जन अम्बाला

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