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नगर निगम के गठन का मामला:सिटी नगर निगम के गठन को लेकर हाईकोर्ट में दी चुनौती, 15 जुलाई को सुनवाई

अम्बाला14 दिन पहले
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  • कांवला के पंचों ने रिट में कहा- 2011 सेंसेक्स के तहत नहीं पूरी जनसंख्या
  • ग्राम पंचायत ने निगम में शामिल होने के लिए रेज्युलेशन पास नहीं किया

अम्बाला सिटी नगर निगम के गठन को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। निगम के गठन को लेकर जिन 12 गांवों को को मिलाया गया है, उसे असंवैधानिक बताते हुए निगम के गठन को समाप्त करने की अपील की गई। इस मामले पर 15 जुलाई को सुनवाई होगी।

कांवला गांव के निवर्तमान पंच गुरदेव सिंह, हरजिंद्र सिंह के अलावा सोहन सिंह ने अपने वकील सुनील टंडन की मार्फत हाईकोर्ट में रिट दायर की है। रिट में कहा गया कि अम्बाला नगर निगम था तो सिटी व कैंट दोनों इकट्ठे थे। इसके बाद सिटी को नगर निगम और कैंट को नगर परिषद बना दिया गया। जबकि नियम के अनुसार नगर निगम या परिषद बनाते वक्त 2011 का सेंसेक्स लेना चाहिए था, लेकिन निगम बनाते वक्त ऐसा नहीं किया गया।

सेंसेक्स 2011 में अम्बाला सिटी की जनसंख्या लगभग 1.85 लाख है, जबकि निगम के लिए जनसंख्या 3 लाख और नगर परिषद बनाने के लिए जनसंख्या दो लाख होनी जरूरी होती है। सिटी नगर निगम के लिए जनसंख्या पूरी करने के लिए इसमें 12 गांवों को जोड़ा गया है। जिसमें कांवला व कांवली गांव की पंचायत भी है। सेंसेक्स में इनकी जनसंख्या 16 हजार है। सिटी व इन गांवों की जनसंख्या मिलाकर 2.01 लाख बनती है।

नगर निगम में शामिल होने के लिए पंचायत की मंजूरी जरूरी : वकील ने कहा कि हरियाणा पंचायती राज अधिनियम की 2010 में जो गाइडलाइन थी। उसके तहत निगम में शामिल होने के लिए ग्राम पंचायत का रेज्युलेशन जरूरी होता है। पंचायत ने गांव में धर्मशाला बनाने के लिए रेज्युलेशन पास किया था। इसमें 200-300 ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी कराए गए थे, लेकिन जब इस रेज्युलेशन को आगे भेजा गया तो उसके नीचे कुछ लाइनें जोड़ दी गई कि कांवला पंचायत को नगर निगम में शामिल होने के लिए कोई एतराज नहीं है। जब इस बात का पता पंचों को लगा तो उन्होंने एसपी को शिकायत भी दी थी।

निगम में शामिल गांवों की 2011 में जनसंख्या

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